पैसा ये तोरैछै नाता
१०२ दिन अगाडि
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२२ जेठ २०८३
अङ्किता चौधरी
सन्सार कहैछै जिवन अमूल्य, समय अनमोल
तर आइके युगमे पैसा ये चि सबसे बरका मुल
खाली हात ल्याके चलबाहा त सखि कम
तर हातमे रहतौ पैसा त, पाथर पनि बनैछै फूला एते
पैसा बिना घर अधुरा, शिक्षा अधुरा
रोजगारी, सपना, यात्रा सब अधुरा
जिवन सिखाइछै माया, इज्जत, इमान्दारिता
तर पैसा बिना जिवनके दुखाइयो अधुरा
पैसा दैछै सुरक्षा, सुविधा, इमान्दारिता,
करैछै हरेक सपना, और सोचाइ के पुरा
तर पैसा ये नै चि सबहे हिस्सा के सुख
आनन्द मिलैछै केबल मात्र प्रेम से
एते त एक एक पल सास लैले पनि तिरे परैछै
मूल्य पैसा के
मूल्य गन्बाहा त जिवन सक्बाहा किने
और के त कुन कहबौ, पैसा बिना आप्नो
भ्या जाइछै पराइ
आइके युगमे, किने परैछै मलामी
मानव जिवित रहैछै त, सास औ के मूल्य तिरैले मुस्किल
लेकिन मरण के बाद, लहास उठैले मुस्किल
पैसा ये जोरैछै सम्बन्ध पराइयोसे
पैसा ये तोरैछै नाता आफन्तो से ।
रामधुनी–९ ,धुराहा, सुनसरी
सम्पर्कः ९८२६०८०३४०