जवानि ओ मोर पहिचान

जवानि ओ मोर पहिचान

९९ दिन अगाडि

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२५ जेठ २०८३

मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ

मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ

१०१ दिन अगाडि

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२३ जेठ २०८३

पुनाराम कर्याबरिक्का   मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ म्वाँर सत्रु नि डेख परट टर हरेक डिन महि किच्लठा  मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ । म्वाँर रगत गोलीले नाहि अन्यायले बहठा मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   सत्ताके मेच म म्वाँर  नाउ नि हो तर हुकन्हँक कुर्सी म्वाँर हड्डी उप्पर टिकल बा मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   महि चुपाइ सिखैल ढैर्यह धर्म कल ओ सहनाहे भाग्यक नाउ डेल मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   म्वाँर पस्नक म्वाँल नि हो सड्डभर सस्टो रठा तर म्वाँर मौनटा सक्कुनसे महँग बा । एकडिन यि भुईमनियाँ लराइँ केल नाहि इतिहास फे लिखुइया बा।                          दंगिशरण, दाङ                         ९८४११४८६५७

पैसा ये तोरैछै नाता 

पैसा ये तोरैछै नाता 

१०२ दिन अगाडि

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२२ जेठ २०८३

अङ्किता चौधरी        सन्सार कहैछै जिवन अमूल्य, समय अनमोल   तर आइके युगमे पैसा ये चि सबसे बरका मुल    खाली हात ल्याके चलबाहा त सखि कम     तर हातमे रहतौ पैसा त, पाथर पनि बनैछै फूला एते        पैसा बिना घर अधुरा, शिक्षा अधुरा        रोजगारी, सपना, यात्रा सब अधुरा       जिवन सिखाइछै माया, इज्जत, इमान्दारिता       तर पैसा बिना जिवनके दुखाइयो अधुरा        पैसा दैछै सुरक्षा, सुविधा, इमान्दारिता,      करैछै हरेक सपना, और  सोचाइ के पुरा       तर पैसा ये नै चि सबहे  हिस्सा के सुख      आनन्द मिलैछै केबल मात्र प्रेम से        एते त एक एक पल सास लैले पनि तिरे परैछै        मूल्य पैसा के       मूल्य गन्बाहा त जिवन  सक्बाहा किने     और के त कुन कहबौ, पैसा बिना आप्नो    भ्या जाइछै पराइ        आइके युगमे, किने परैछै मलामी  मानव जिवित रहैछै त, सास औ के मूल्य तिरैले मुस्किल   लेकिन मरण के बाद, लहास उठैले मुस्किल   पैसा ये जोरैछै सम्बन्ध पराइयोसे         पैसा ये तोरैछै नाता आफन्तो से ।            रामधुनी–९ ,धुराहा, सुनसरी सम्पर्कः ९८२६०८०३४०

हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ?

हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ?

१०३ दिन अगाडि

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२१ जेठ २०८३

                                                                                                  फोटुः नेपालन्यूज सतीरानी विश्वास थारू हे थारू समाज अख्नो नय जाग्वै त जाग्वै कहिया थारू समाजके अन्त हेतु जहिया ।। जात धर्मके नाममे लड्छै ऐक दोसरके दुश्मन बन्याके यथार्थ बुझे लग्ना सदये मौका गम्याके।। आँख नै हेल मानुस संसारके वास्तबिकता देखे खोज्छि आँखो हाविके थारू समाजमे गलतीयोरा परम्पराके सहि सोच्छि।। हमे धनिक, त्या गरिब, हमे सुधर्ल, त्या विगर्ल एकेरा भगवानके हातसे आपन सिनके जिवन छो बन्ल।। जेहनेङ करवै ओहनेङ भोग्वै  आपन बेटा बेटिके गलति अचराके आँचलमे लोकहवै।। लोकके बेटा बेटिके आगु बढेसे आपने सिनके थारू समाज रोकहवै।। कते धामी कते माता खोज्तै जेछै धामीनाके दारू दान मातानाके खाता खुल्याके फाइदा देछै।। समय बदलली संसार बदलली तर थारू समाज नय आवे वाला पिढीके याहना अन्धविश्वासके ज्ञान देहवै।। अखने संसारमे सव कुनुके परमाण जुटल छि भरममे बाँचिके आधुनिक युगोमे थारू समाज आगु बढेसे पाछु छुटलछि।। भगवान कते छि आपने मनमे शैतान कते छि आपने मनमे मौसम लखान बदलछि यिटा मन छन छनमे।। लोकके गलती पकडे लग्ना बैठल छि यिटा समाजमे आपन गलती सुधारे लग्ना कोई नै सोच्छे थारू समाजमे।। हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ? थारू समाजके अन्त हेतु जहिया।।                                              ग्रामथान गाउँपालिका–५ , सिमरिया                               मोरङ्ग  

बाबक जस्ट छावा

बाबक जस्ट छावा

११० दिन अगाडि

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१४ जेठ २०८३

                                                                                              कवि  कृष्ण समर्पण बाबा, टुँँ नै बोल्ठो ढ्यार, तर टुँहार गुम्मरपन म, म्वार भविष्य नुकल बा टुँहार आँक्खर हाँठम, म्वार जिन्गिके सुरक्षा बा टुँहार आँखिम,  नै बोल्लक हजार सपना बा टुँ दुःख अप्नेह ढर्लो, महिन मुस्कान डेक टुँ डट्करके फे कब्बु नै बिसैलो, का कर कि म्वार अइना काल्ह  टुँहार आझसे बहुट बरुवार रह मै न्याँग बेर गिरजैठुँ,  तर उठ्ना आँट अप्नेसे सिख्ल बाटुँ मैं अप्नेक जस्ट बन ट नै सेकम तर अप्नेक ईमान, धैर्य ओ सहास म्वार रगतम डौर्टि बा मै नेँग्टि बाँटु मनै कठ– ‘बाबाक जस्ट छावा’ हुँकिन का पटा एम्न एक्ठो जिन्गिके त्याग और जिन्गिके आस अट्रा गहिंरक नुकल बा हुँकिन का पटा म्वार नेङ्ना आँट, अप्नेक अधुरा जिन्गिसे अइलक हो मै कब्बु कमजोर डेखैम कलसे बाबा, महि माफ कर्डेहो, का कर कि बल्गर हुइना कलक, अप्नक जस्ट चुपचाप सहना हो।    बारबर्दिया नगरपालिका, बर्दिया हालः कीर्तिपुर, काठमाडौं सम्पर्कः ९८५७८७९९९९

 बिचारा किसान 

 बिचारा किसान 

१११ दिन अगाडि

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१३ जेठ २०८३

रुमा चौधरी   महीँ टे इ डेसके असली  हिरो  किसान हुइट जस्टे लागठ। जिही न घाम के पटा रठिन, न टे बर्खा के डर, बस उब्जनीके आसमे घाम पानी बिन हेरल अपन काममे राटो डिन डटल रठाँ। उहे किसान, जे आपन घर चलाइक लग   डिन राट मेहनत कर्ठा अट्रे किल नाही,  पूरा देशके पेट भरक लग हरडम पस्ना बहैटी रठाँ उहे किसान,  महँगा बिया बालर, मलखाद  मोल लेके खेटी टे कर्ठा मने अपन लगानी फिर्ता आई कना भरोसा कभु नै कर्ठा ।  कबो बाह्र, कबो सुख्खा, आउर जहन खवाके अपने भुख्खा सक्कु परिस्थितिसे जुझे पर्ठिन किसानहे, महँगाईके बोझा  सडा डिन बोक्टी रठाँ किसान  खेट्वामे डिन भर पसना चुहैटी, मेहनट कैटी रठाँ, मजा उत्पादन डेखके मन फोहैटी रठाँ । लेकिन,  जब बजार जैठाँ  मजा भाउ नै पैठाँ, टब किसान डुखी हुइटी  घर लउट जैठाँ ।  लेकिन किसानके पीड़ा बुझक लग कोई आगे नै बह्रठाँ । बिचारा किसान, जट्रा मिहनेट करलेसे  सबओर घाटेघाटा  अभिन बजारमे बिन बुझल कनैं एक मुट्ठा सागमे मोल भाउ करठाँ। किसान मेहनत कैके सबके पेट पल्ठाँ लेकिन दुःख टब लागठ जब जागिरे, धनीमानी मनै खेटी कैके काम नै हो, कहिके किसानहे हेप्ठाँ। बिचारा किसान । हाय रे किसान । राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरी  दाङ देउखुरी  

मैयाके पाठ 

मैयाके पाठ 

११२ दिन अगाडि

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१२ जेठ २०८३

पविता चौधरी   नौ नौ महिनामा कोखमा ढर्क जन्म डेहलो  अपन छातीके दुध पिवइटी गीत गुन्गुनैलो  आँखीके तारा बनलो हमरा हो।    दुःख सहिके हमार सपना पुरा करेमा लगलो  अपन दुःख भुलाईक टन हमार संग मुस्कुरैलो नै बिस्रैहो अपन डाइ बाबा, खाली गोरा  फाटल, चिंठल लुगा लगाके हमन खुशी डेहनै।   छोट छोट रहल बेला हाँठ पकरके नेंगक सिखैनै  हमार उ बोलीमा मिठास भर्नै, अपन आँस लुकैनै  लाठीके सहारा बन्न ठाउँमा आज पराई कैनै  दुःख कष्ट करके पढाईले यी सजाई डेहनै हो।   छाइ छावाके सपना पुरा करेक टन  घाम पानी सहके पुरा जो कर्ठइ  अपन आँस कबु नै गिरैठइ हाँसके आपन दुःख भुलैठइ।   छाइ छावाके मा चोट लागल बेला कुछ नैहुइल हो  कहिके ठगे खोजला से फे बुझ लेठइ हो बिना मंगले सप कुछ डेठइ  अइसिन महान मनाइन खोजलासे फे नइ मिलहि ।   हारल बेला जिटेक सिखैलो  गिरल बेला उठ्ना हिम्मत डेलो यी स्वार्थी दुनियाँसे बँचैलो   अपन करम करेक सिखैलो ।   जिन्दगीमे मेहनत करेक सिखैलो  सपना पुरा करेके टन आशा, विश्वास  करेक सिखैलो, मैया व प्रेमसे  घर परिवार चलाइक सिखैलो।   टोहार यी मैंयाले आघे बढेक सिखैलो  हाँसी खेली जिन्दगी बिटाइक सिखैलो  मैया व मेहनतले टुँ हमन  सड्ड सड्ड आघे बह्रेक सिखैलो।    मधुवन–१, बर्दिया