हम कथिले जेबै बिदेश ?

हम कथिले जेबै बिदेश ?

६४ दिन अगाडि

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३० असार २०८३

लैहर 

लैहर 

६५ दिन अगाडि

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२९ असार २०८३

                                                                                                                   फोटुः वसन्ती चौधरी बिस बरस बिटल घर अंगना साँझ बिहान डाईक पाछे पाछे घरढन्ढा चुल्हा चौका कर्ना जहाँ बोली, भासा, संस्कार, सिप सिखल ढकिया बिँरा भंगना उ अपन अंगना छाईक लग आझ लैहर हुइल। आढा जिन्गी जलम घर छाइक आढा जिन्गी पराइ घर डुनु ओरिक काम बोली, भासा संस्कार, सिप सिखट सिखट छाइक मन कम हाँसल, ढेर रूइल। जलम घर छोरके पराइ घर  जिन्गी बिटाई पर्ना सेन्डुरके भर ठरूवा मरहा कट्हा फट्हा चाहे, मद्हा भंगहा लौन्डिया बाज रहे हिँग उरके डब्बा महकटि रना  डेखावटी धनी समाज रहे पठा डेठै एकठो दोराक भरमे छोरक परठिन छाइन अपन घर ओहे सत्तर मेरिक बाट कटुईया रानपरोस के हाँसिक डरमे । बचपनमे लरी डाडा भैयनसे मोर घर मोर डाइ बाबा ऊ आझ समय संग लैहर हुइल सखि सहेली गोचा छुट्नै घर घारी बारी ब्यौंरासे बचपनके मिठ मैयाँ टुट्नै छाइक जलम घर लैहर हुइल अञ्जान घरमे बिना सैहर हुइल जिन्गी जिएक लग सक्कु छाइ हुक्रन ऊ बोक्लार कुहिरा चिर्टी अपनही हिम्मट करके  ऊठे पर्ना बा  नेगें पर्ना बा जेकर हाँठ पकराके पठैनै डाइ बाबा ओहे मनियाक राजमे जिन्गीक फुला फुलैना बा लावा ठाउँमे सखि सहेली लावा नाट बनैना बा बिस बरस बिटाइल  बचपनके घर भुलैना बा काहे कि, ऊ घरसे जिट्टी साँठ निकरल बा बिडा करे बेर डाइ बाबा सखि सहेली छाइक पालल्  जिउ जन्टुके आँस निकरल  डाइ बाबक् सम्मानके लग मोह मैयाँ टुरेके छाइ हुक्रनके जलम घरहे इ समाज परम्परा बनाके कैह डेहल लैहर । कैह डेहल लैहर ।।   जोशीपुर ५, सिमराना, कैलाली सम्पर्कः ९८२२६५८७४७, ९८४८५३१५२५ ईमेलः asi.dangaura@gmail.com

मनसेक जुनी

मनसेक जुनी

७० दिन अगाडि

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२४ असार २०८३

संजय कुमार चौधरी   मन्से मन्से एके हलउ,.. रगत सबको लाल हसउ ! उचनिच हेय कतउ,.. मरलेपर एके हाल हसउ !!   यन्दिने कुने देखले बणइ,.. यीअ सारा संसारमा !                  जनम मरण जिनगीक,.. चलल याइली चाल हलउ !! मन्से मन्से एके हलउ,.. रगत सबको लाल हसउ ! उचनिच हेय कतउ,.. मरलेपर एके हाल हसउ !!   मरके जाएके चोला सबको,.. याउ मिलाउँ हात हमरा !         मिलबेत ठिके बणउ,.. नत मोरोतरफसे बाल हतउ !! मन्से मन्से एके हलउ,.. रगत सबको लाल हसउ ! उचनिच हेय कतउ,.. मरलेपर एके हाल हसउ !!   समानता न्याय समभाव,.. मनसेक मनक चाह हलउ !           बकि यहवाँ मनसेक,.. यापन यापन ताल हसउ !! मन्से मन्से एके हलउ,.. रगत सबको लाल हसउ ! उचनिच हेय कतउ,.. मरलेपर एके हाल हसउ !!   माया प्रेम करुणा फिजाउँ,.. मिलके सबजन विश्वभरी !          दुख पीडा दुर हखले,.. तबन मालामाल हतउ !! मन्से मन्से एके हलउ,.. रगत सबको लाल हसउ ! उचनिच हेय कतउ,.. मरलेपर एके हाल हसउ !   खैरहनी नगरपालिका वडा नं.-१२, कपिया, चितवन सम्पर्क: ९८४५०६५६४५ Email: sanjay.rights@gmail.com 

खौर

खौर

७३ दिन अगाडि

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२१ असार २०८३

हमर कहानी छै बहौत अजिबके  हम जन्मलियै एक ठाम बरहलियै दोसर गाम करम घर भेलै तेसर ठाम जते जते गेलियै  ओतै-ओतै बनेलियै आपन ठाम ।  गिरहत बहौत प्यारसे जोतलकै खेत  तै खेतमे छिटलकै धान धानसे हम जन्मलियै जन्मैते मातर हमर नाम रहलै बिया हमर जन्मलहा खेतके नाम भेलै बिरार हम चियै बिरारके बेटा  यी हमर बालककाल छेलै हमरा वर निक लागै छ्याल  बाप, महताइरके कोरा । लेकिन हमर खुसी नै रहलै बेसी दिन साथीसबजरे रहैले- खेलैले वर निक लागै छ्याल हमरा हम रसेरस बरहै छेलियै खेलै छेलियै साथी सबजरे हाँसै छेलियै  एक दिन बालक कालमे बाप महताइरके साथ छुटलै साथी सबके समूह छुटलै हम टुटलियै  हमरा उखारलकै बिरारसे गौछी बान्हलकै या  फेक देलकै हमरा खौर लगाइवला खेतमे । हम कानलियै हल्ला करैत रहलियै बाप महताइरके खोजैत रहलियै साथी सबले तरपैत रहलियै कोइने सुनलकै हमर पुकार दोहन बाइल उब्जैवला  खेतमे रोपैखातिर  हमरा दोसर खेतमे रोपलकै  ताब हमर नाम भेलै खौर हमरा खौर लगेलकै  । हम गबके रूपमे  अलग भ्या गेलियै अलग भ्याके हमर नाम भेलै खौर हम आइसे भेलियै खौर  खौरके रूपमे बरहै छेलियै बाप, महताइरसे छुटल  भ्याल जाइछेलै दुई मैहना सब दु:ख बिसरैके प्रयासमे छेलियै   तखैनते हमरा फैन उखारलकै  गौछी बान्हलकै या फेकलकै गौछीके भादो मैहनामे  तेसर खेतमे बिरारसे खेतमे खेतसे दोहन लगइबला  तेसर खेतमे रोपलकै हमरा  हमरा उपटा भार करैत रहलै साथी अइहनङ छै हमर कहानी । हमरा जतहेक उपटेलकै हम ओतहेक बलगर भेलियै आसिनमे हम बैरहैत सिसाओरमल फरलियै  हमर सिस देखके  खौर लगेलहा धान फरैलछै लुदलुद कहैत गिरहत प्रशंसा करैत रहलै हमर  हम आपन प्रशंसा सुइनके हाइस उठलियै खेतभोइर । ============== नेपालीमा अनुवाद खौर  मेरो कथा धेरै अनौठो छ म एउटा ठाउँमा जन्मेको थिएँ हुर्किएको अर्को गाउँ हो कर्म घर तेस्रो ठाउँ हो म जहाँ गए पनि मैले त्यहाँ आफ्नो ठाउँ बनाएँ। किसानले धेरै मायाले खेत जोते  उनले खेतमा धान छरे म त्यही धानबाट जन्मेँ म जन्मँदा मेरो नाम थियो बीउ म जन्मेको खेतको नाम थियो बिरार  म बिरारको छोरा हुँ यही मेरो बाल्यकाल थियो मलाई बाआमाको काख  बेस्सरी मन पर्थ्यो । तर मेरो खुशी धेरै समय टिकेन साथीहरूसँग खेल्न र बाआमाको काख मलाई खुब मन पर्थ्यो   म बिस्तारै हुर्किँदै थिएँ साथीहरूसँग खेलिरहन्थेँ हाँसिरहन्थेँ बाल्यकालमा एक दिन बुबाआमाको साथ छुट्यो साथीहरूको समूह छुट्यो म टुटेँ म बिरारबाट उखेलिएँ तिनीहरूले गौछी बाँधे  म गौछीको रूपमा बाँधिएँ त्यसपछि तिनीहरूले मलाई  अर्को खेतमा फ्याँकिदिए म कराएँ म आवाज निकालिरहेँ रोइरहेँ म मेरा आमाबाबुलाई खोजिरहेँ म मेरा साथीहरूको  साथ मागिरहेँ  मेरो रोदन कसैले सुनेन । म गबको रूपमा अलग भएँ दोहन लगाउने खेतमा रोप्नको लागि  तिनीहरूले मलाई अर्को खेतमा रोपे  त्यसपछि मेरो नाम भयो खौर म खौरको रूपमा परिणत भएँ  म गबको रूपमा  अलग भएँ अलग हुँदा, मेरो नाम रह्यो खौर । म  टुक्रा टुक्री रूपमा हुर्किन थालेँ बुबा, आमाबाट छुटेँ साथीहरूसित अलग भएँ  दुई महिना भयो म सबै पीडा बिर्सन खोजिरहेको थिएँ त्यसपछि  मलाई  फेरि उखेले तिनीहरूले गौछी बाँधे  भादौ महिनामा फ्याँकिदियो  तेस्रो खेतमा  बिरारबाट खेतमा  खेतबाट खौर गर्दै  तेस्रो खेतमा रोपिएँ म मलाई एक खेतबाट दोस्रो र दोस्रोबाट तेस्रो खेतमा सारियो यही मेरो कथा हो। मलाई सकेसम्म धेरै दुःख दियो जति दुःख दियो म त्यति नै बलियो भएँ म शरद ऋतुमा बस्थें म धानको बालाको रूपमा लटरम्म फलेँ  किसानले हेर्दै भन्थे खौर लगाएको धानको बीउ लटरम्म फलेको छ किसानले मेरो प्रशंसा गरिरहे म मेरो प्रशंसा सुनेर खेतभरि हाँसिरहेँ । अनुवादः कवि स्वयम् सिरहा, नेपाल हालः पोर्चुगल

तिमी मेरो को हौ ?

तिमी मेरो को हौ ?

७९ दिन अगाडि

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१५ असार २०८३

मेरो मनस्थिति बिगार्ने तिमी को हौ ? छरछिमेक होइनौ न म तिमीलाई चिन्छु न तिमीले मलाई चिन्छौ न मेरो तिमी हौ न म तिम्रो हुँ कुरा कुरामा मलाई तल गिराउछौ मलाई तल गिराउने तिमी मेरो को हौ ? मेरो असहज परिस्थितिमा  मुखले ठिक पार्दै भन्छौ, कठै ! धेरै दुःख पाइस् तर, मनमनै सराप्दै भन्छौ कर्मले ठगिएकी यो मान्छे  कहिले अगाडि नबढोस् सधैँ ठक्कर खाइरहोस्  मेरो दुःखमा देखावटी दु:खी हुन्छौ न मेरो आफन्त हौ  न छरछिमेक मेरो दु:खमा खिस्स हाँस्ने तिमी को ? मनमा रामराम वगलीमा छुरा मेरो अगाडि मेरै प्रशंसा गर्छौ तिम्रो प्रशंसा सुनेर म लोभिन्छु तिमीलाई हितैसी मान्न थाल्छु संसारको सबैभन्दा प्यारो मान्छे  तिमी नै लाग्न थाल्छौ यति दिनसम्म, म भ्रममा थिएँ  मलाई थाहा थिएन तिम्रो दुईटा रूप मलाई भ्रमित पार्ने तिमी मेरो को ? अगाडि मीठो बोल्छौ मेरो पिठ्यु पछाडि मेरो कुरा काट्छौ मलाई नङ्ग्याउँछौ सबैको नजरमा गिराउँछौ मलाई बेज्जत गर्छौ अब भन,  मलाई निचा देखाउने तिमी मेरो को ? तिमीलाई विश्वास गर्नु मेरो भ्रम थिय‍ो म ठोकुवासाथ भन्छु, तिमी मेरो शत्रु हौ  आज, अहिलेबाट, म तिम्रो साथ छोड्दैछु  मलाई मानसिक रूपमा असर पुर्याउने तिमी मेरो कट्टर शत्रु हौ आजदेखि म तिमीसँग कुनै सम्बन्ध राख्दिनँ म तिमीलाई चिन्दिनँ  न बाउतिरको न आमातिरको  तिमी मेरो कोही पनि पर्दिनौ बस्, कुरा सक्यो । ====================== थारु भाषामा अनुवाद ====================== तु हमर के चिहि ?  हमर मनस्थिति बिगारैबाली तु के चिहि ? लरने जर सनपटुवाके फर ने हम चिन्है चियौ तोरा  ने तु चिन्है चिहि हमरा ने हम तोहर  ने तु हमर बात बात मे निचा देखाइ चिहि हमरा निचा देखाइवाली तु हमर  के चिहि ? हमर तकलिफ मे मुहसे कहैचिही विचारी ! वर दु:ख पावलिहि मनेमन असी सराप दैत कहैचिहि यी करमजरी कैहियोने अगारी बरहे सब दिन अइहनङ ठोकर खाइत रेहे हमर दुःख मे देखावटी तोहे दुःखी हैचिहि वास्तविक रूपमे हमर दुःख मे तोहे भित्री मनसे खुसी हैचिहि तोहे ने हमर परोसिया चिहि  ने हमर नातेदार चिहि हमर दुःख मे खिलखिल्याके हासैवाली तु के चिहि ? हमर अगारी हमर प्रशंसा करैचिही तोहर प्रशंसा सुइनके हम लोभ्या जाइचियै तोरा हितैसी मानैले लागैचियौ संसारमे सबसे निक लोक  हमरा तुहि लागैले लागैचिहि  हम भ्रममे छेलियै लेकिन  हमरा थाह नै छेलै तोहर दुईटा रूप हमरा भ्रमित पारैवाली तु हमर के चिहि ? मनमे राम राम बगलीमे छुरा आगु निक बात बाजैचिहि पाछु हमर बारेमे नैनिक नैनिक बात काटैत हमरा नङ्गा बनाइचिहि सबके अगारी गिराइचिहि हमर इज्जतके धज्जी उराइचिहि  आब कहै, हमरा निचा गिराइवाली तु हमर के चिहि ? तोरा विश्वास करनाइ हमर भ्रम छेलै ह, हम ठोकुवासाथ कहैचियौ तु हमर कट्टर दुश्मन चिहि आइसे, अखैनसे  हम तोहर साथ छोरैचियौ  हमरा मानसिक असर पुगाइवाली तु हमर दुश्मन चिहि  आइसे हम तोहरसे कोनो सम्बन्ध नै राखबौ ने बाप दिसरका  ने महताइर दिसरका चिहि तु कोइने चिहि हमर आइसे हम तोरा नै  चिन्है चियौ   बस, बात खतम !   अनुवाद कवियत्री स्वयम् सिरहा नेपाल, हालः पोर्चुगल  

प्रिय खेत

प्रिय खेत

८५ दिन अगाडि

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८ असार २०८३

प्रिय खेत, उच, निचके बात नै छेलै नै छेलै अगारी पछारीके बात दिन, राइतके बात नै छेलै नै छेलै निक बेज्याके बात छेलै केवल हमर या तोहर बीचके बात । प्रिय खेत, ढोङा खसैछै तोहर उपर कतौ कतौ दुर बरी जोरसे हवा बहै छै कतौ पाइन परै छै तोहे कहियो पाइनमे डुगैत रहैचिहि कैहियो रौदसे सुखाइत टटाइत रहैचिहि यी सबके बन करैके तागत नै छे हामरमे हमर पछारी कोइ छै  जेकरा हम नै रोइक सकैचियै प्रिय । प्रिय खेत, हम जहै पेरा गेलियै ओहै पेरा नै घुमैले सकलियै हमरा निक नै लागैये दोसरके नापै जोखैले नियन्त्रण करैले लेकिन हमर मजबुरी छै हम केकरोसे नियन्त्रित चियै  प्रिय खेत, हमर वश चलतियै त  हवा के रोइक देतियै झाट बिहाइरके थाइम लेतियै पाइनमे नै हेलैले देतियौ तोरा झाट बिहाइर नै सहैले देतियौ तोरा आइरके काइटके  हमरा बनाइछै तैदने पाइन पटाइछै  कैहियो हमरा खुलले दैछै छोइरके कैहियो बान्ह उपर बान्ह बाइन्ह दैछै  हम आपने चियै दोसरके बशमे सायद तोहर भलाइ खातिर हमरा काटैछै  तोहर निक खातिर हमरा बान्हैछै तोहे खुसी चिही कि दु:खी से त हम नै जाइन सकलियौ हम स्वयम् दोसरके नियन्त्रणमे चियै घोरा लगाम के नियन्त्रणमे रहैछै कर्मचारी हाकिमके नियन्त्रणमे रहैछै तैहनङ हम कोदाइरके नियन्त्रणमे चियै प्रिय खेत, हमर मजबुरी बुइझ दे ।                     सिराहा नेपाल, हालः पोर्चुगल