तिमी मेरो को हौ ?

तिमी मेरो को हौ ?

३२ दिन अगाडि

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१५ असार २०८३

प्रिय खेत

प्रिय खेत

३९ दिन अगाडि

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८ असार २०८३

प्रिय खेत, उच, निचके बात नै छेलै नै छेलै अगारी पछारीके बात दिन, राइतके बात नै छेलै नै छेलै निक बेज्याके बात छेलै केवल हमर या तोहर बीचके बात । प्रिय खेत, ढोङा खसैछै तोहर उपर कतौ कतौ दुर बरी जोरसे हवा बहै छै कतौ पाइन परै छै तोहे कहियो पाइनमे डुगैत रहैचिहि कैहियो रौदसे सुखाइत टटाइत रहैचिहि यी सबके बन करैके तागत नै छे हामरमे हमर पछारी कोइ छै  जेकरा हम नै रोइक सकैचियै प्रिय । प्रिय खेत, हम जहै पेरा गेलियै ओहै पेरा नै घुमैले सकलियै हमरा निक नै लागैये दोसरके नापै जोखैले नियन्त्रण करैले लेकिन हमर मजबुरी छै हम केकरोसे नियन्त्रित चियै  प्रिय खेत, हमर वश चलतियै त  हवा के रोइक देतियै झाट बिहाइरके थाइम लेतियै पाइनमे नै हेलैले देतियौ तोरा झाट बिहाइर नै सहैले देतियौ तोरा आइरके काइटके  हमरा बनाइछै तैदने पाइन पटाइछै  कैहियो हमरा खुलले दैछै छोइरके कैहियो बान्ह उपर बान्ह बाइन्ह दैछै  हम आपने चियै दोसरके बशमे सायद तोहर भलाइ खातिर हमरा काटैछै  तोहर निक खातिर हमरा बान्हैछै तोहे खुसी चिही कि दु:खी से त हम नै जाइन सकलियौ हम स्वयम् दोसरके नियन्त्रणमे चियै घोरा लगाम के नियन्त्रणमे रहैछै कर्मचारी हाकिमके नियन्त्रणमे रहैछै तैहनङ हम कोदाइरके नियन्त्रणमे चियै प्रिय खेत, हमर मजबुरी बुइझ दे ।                     सिराहा नेपाल, हालः पोर्चुगल

मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ

मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ

५५ दिन अगाडि

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२३ जेठ २०८३

पुनाराम कर्याबरिक्का   मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ म्वाँर सत्रु नि डेख परट टर हरेक डिन महि किच्लठा  मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ । म्वाँर रगत गोलीले नाहि अन्यायले बहठा मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   सत्ताके मेच म म्वाँर  नाउ नि हो तर हुकन्हँक कुर्सी म्वाँर हड्डी उप्पर टिकल बा मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   महि चुपाइ सिखैल ढैर्यह धर्म कल ओ सहनाहे भाग्यक नाउ डेल मै युद्ध कर्ना भुइमनियाँ ।   म्वाँर पस्नक म्वाँल नि हो सड्डभर सस्टो रठा तर म्वाँर मौनटा सक्कुनसे महँग बा । एकडिन यि भुईमनियाँ लराइँ केल नाहि इतिहास फे लिखुइया बा।                          दंगिशरण, दाङ                         ९८४११४८६५७

पैसा ये तोरैछै नाता 

पैसा ये तोरैछै नाता 

५६ दिन अगाडि

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२२ जेठ २०८३

अङ्किता चौधरी        सन्सार कहैछै जिवन अमूल्य, समय अनमोल   तर आइके युगमे पैसा ये चि सबसे बरका मुल    खाली हात ल्याके चलबाहा त सखि कम     तर हातमे रहतौ पैसा त, पाथर पनि बनैछै फूला एते        पैसा बिना घर अधुरा, शिक्षा अधुरा        रोजगारी, सपना, यात्रा सब अधुरा       जिवन सिखाइछै माया, इज्जत, इमान्दारिता       तर पैसा बिना जिवनके दुखाइयो अधुरा        पैसा दैछै सुरक्षा, सुविधा, इमान्दारिता,      करैछै हरेक सपना, और  सोचाइ के पुरा       तर पैसा ये नै चि सबहे  हिस्सा के सुख      आनन्द मिलैछै केबल मात्र प्रेम से        एते त एक एक पल सास लैले पनि तिरे परैछै        मूल्य पैसा के       मूल्य गन्बाहा त जिवन  सक्बाहा किने     और के त कुन कहबौ, पैसा बिना आप्नो    भ्या जाइछै पराइ        आइके युगमे, किने परैछै मलामी  मानव जिवित रहैछै त, सास औ के मूल्य तिरैले मुस्किल   लेकिन मरण के बाद, लहास उठैले मुस्किल   पैसा ये जोरैछै सम्बन्ध पराइयोसे         पैसा ये तोरैछै नाता आफन्तो से ।            रामधुनी–९ ,धुराहा, सुनसरी सम्पर्कः ९८२६०८०३४०

हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ?

हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ?

५७ दिन अगाडि

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२१ जेठ २०८३

                                                                                                  फोटुः नेपालन्यूज सतीरानी विश्वास थारू हे थारू समाज अख्नो नय जाग्वै त जाग्वै कहिया थारू समाजके अन्त हेतु जहिया ।। जात धर्मके नाममे लड्छै ऐक दोसरके दुश्मन बन्याके यथार्थ बुझे लग्ना सदये मौका गम्याके।। आँख नै हेल मानुस संसारके वास्तबिकता देखे खोज्छि आँखो हाविके थारू समाजमे गलतीयोरा परम्पराके सहि सोच्छि।। हमे धनिक, त्या गरिब, हमे सुधर्ल, त्या विगर्ल एकेरा भगवानके हातसे आपन सिनके जिवन छो बन्ल।। जेहनेङ करवै ओहनेङ भोग्वै  आपन बेटा बेटिके गलति अचराके आँचलमे लोकहवै।। लोकके बेटा बेटिके आगु बढेसे आपने सिनके थारू समाज रोकहवै।। कते धामी कते माता खोज्तै जेछै धामीनाके दारू दान मातानाके खाता खुल्याके फाइदा देछै।। समय बदलली संसार बदलली तर थारू समाज नय आवे वाला पिढीके याहना अन्धविश्वासके ज्ञान देहवै।। अखने संसारमे सव कुनुके परमाण जुटल छि भरममे बाँचिके आधुनिक युगोमे थारू समाज आगु बढेसे पाछु छुटलछि।। भगवान कते छि आपने मनमे शैतान कते छि आपने मनमे मौसम लखान बदलछि यिटा मन छन छनमे।। लोकके गलती पकडे लग्ना बैठल छि यिटा समाजमे आपन गलती सुधारे लग्ना कोई नै सोच्छे थारू समाजमे।। हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ? थारू समाजके अन्त हेतु जहिया।।                                              ग्रामथान गाउँपालिका–५ , सिमरिया                               मोरङ्ग