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चौठीचान (चरचना) पावन

चौठीचान (चरचना) पावन

 नेपाल बहुजाति, बहुभाषिक, बहुधार्मिक, बहुसांस्कृतिक हेल देश छेकै। यतेकरा आपन आपन समुदाय, आपन आपन धर्म संस्कृति बमोजिम बिभिन् प्रकारके पावन, उत्सव मनछै। तराईमे भादो शुक्ल चतुर्थी तिथिके बिषेश महत्व छै।  भारत लगायत नेपालमे तिज, गेणेश चतुर्थी, चौठचन्द्र, कलंक चतुर्थी, पत्थर चतुर्थी आदी बिभिन्न नामसे जानल जेछै।

थारु समुदायमे चौठीचान, चरचना पावन कहिके मनछै। भादो उजरियाके चौथा (चार) दिनके चान हेलके कारण चौथीचान अपभ्रंस हवीके चौठीचान हे चरचना बोलचालमे छै। चौथीचानके खाली हाथ नय देखछै। फलफुल हाथमे ल्याके देखे साकछै। खाली हाथ देखलासे बिना कारण कलंक लागे साकछै कहिके जनबिश्वास छै।

चौठीचानके कथा प्रसंग 

स्कन्द पुराण, अग्नी पुराण बमोजिम भादो उजरिया चौथी तिथीमे श्री गणेश भगवानके जलम हेलके कारण गणेश चतुर्थी कहलकैस। सवसे सुन्दर पुर्णेमाके चान रहेक। एक बेर देवलोके सभामे चानरा भगवान गणेशके बडकापेट, हथीके मुडा हेलके कारण हांसी देलकै। तव गणेश चानके सराप देलकै कि तोर रुप क्षिण हेतौ तव अन्हरिया हेलै। यिटा श्रापसे मुक्ति पावे लगिन चान सोमनाथ मे शिव लिङ्ग स्थापना करिके पुजा करलकै ताव शिव प्रसन्न हवीके आपन शिरमे चानके धारण करलकै हे तव कहलके हे चान तेंह्या गणेश जलम लेल दिन गणेशके पुजा करिह तव चानरा भादो शुक्ल चतुर्थीमे पुजा करलकै। चान के पुजासे प्रसन्न हवीके गणेश जी बरदान देलकै – हे चान देख ! हमर वचन खाली नय जेथौन मतर पखे पखे तोहर उजरिया हे अन्हरिया हेथौन। मतर आजकर दिन जे तोहरा खाली हाथ देखथोन वकरा कलंक लागवे करथोन। सेहासे सरापसे मुक्त हवे लगिन चौठीचान पावन करछै।

बिष्णु पुराणमे भगवान श्रीकृष्ण चौठीचान देखलाके कारण दोष (कलंक) लागल कथा छै। भागवत कथामे राजा सत्राजित नामके राजा संगे स्मंतक मणी रहेक जे कि आठ भरी सोना दैनिक दैक। वेहारासे आपन प्रजाके प्रतिपालन करेक। एक दिनके बात छेकी भगवान कृष्ण राजा सत्राजित से हंसीमजाकमे उटा मणि मथुराके राजा उग्रसेनके लगिन माङलकै मतर नय लेलकै। संयोगके बात छेकी सत्राजितके भाई प्रसेन उटा मणी मला पिन्हीके जंगलमे सिकार खेलावे गेलै मतर जंगलमे वकरा बाघरा मारी देलकै। बाघरा जंगलमे घुमते छेली तव जामन्त भौल भेट हेलै। जामबन्त बाघके मारीके स्मंतक मणिके हार ल्याके गेलै हे बेटी जामबतीके उटा हार देलकै।

बिष्णु पुराणमे भगवान श्रीकृष्ण चौठीचान देखलाके कारण दोष (कलंक) लागल कथा छै। भागवत कथामे राजा सत्राजित नामके राजा संगे स्मंतक मणी रहेक जे कि आठ भरी सोना दैनिक दैक। वेहारासे आपन प्रजाके प्रतिपालन करेक।

यी महर मणी हरल हल्ला चारोदिस फैलली हे भगवान कृष्णके मनी चोरल कलंक लगले। भगवान कृष्ण बुझे पता लगावे यले तव वे मणिके खोजमे जंगल गेलै। जंगलमे प्रसेन मोरल भेटलै। वतेकरा बाघके पांज देखलकै हे पांज भजियते गेलै त बाघराके मोरल देखलके। वतेकरा भौलके पांज देखलकै हे पांज भजियते गुफा सुरुङ लगत पुगलै। भित्रि सुरुङमे जामबन्त संगे २१ दिन तक  कुस्ति खेलकै तयो कोयनी हारलै। तव जामबन्त घ्यान करिके देखलकै त भगवान रामके स्वरुप देखलकै हे सरण परलै। तव बेटी जामबती से मणिके हार ल्याके कृष्णके देलकै। उटा हार ल्याके भगवान कृष्ण राजा सत्राजितके देलकै। राजा सत्राजित प्रसन्न हवीके कृष्णके आपन बेटी सत्यभामा संगे बिहा करिदेलकै हे स्मंतक मनि उपहार देलकै। चानके भगवान कृष्ण शिरमे धारण करलके कारण कृष्णचन्द्र भी कहछै। सेहास यकरा कलंक चतुर्थी कहछै।

चौठीचान पावनके बिकृति 

कोइ कोइ चान देखलासे दोषमुक्त हवे लगिन लोकके घर येङनमे पथल फेकी देछै,  फोहर मैला करिदेछै, फलफुल चोर्याके बिपनास करछै। वकरा खुवसे गार देलासे दोष मुक्त हेतै कहिके मान्यता राखछै। मतर यिना बिकृतिसे बचिके रहना चाही। पथल फेकलके कारण पथल चतुर्थी भि कहछै।

चौठीचान ब्रत पुजन संक्षेप बिधि

चौठीचान ब्रत खास करिके महिलाना करछै मतर बालबच्चा, युवा युवती सबकोइ यीटा ब्रत लेवे साकछै। घर येङन सफा सुथरा निपापोछा करिके शुध्द करछै। घरके दरदेवताके धुपदिप द्याके जगछै। भिनसरमे स्नान करिके ओटगन खेछै। ओटगनमे दहि, चुडा, खिर, सोहारी, मिठाई, फलफुल जे जुरछै खेछै। चौथीके दिन निराहार रहिके सांझ आपन दरदेवताके धुपदिप द्याके तयार करल सरजामना के अरग देवेवला जगहमे निपपोछ करिके पिठार अरपैन देछै हे सिनुर पिन्हछै। केला पताके उपरमे  प्रसादके डाली राखछै । उपरसे केला पता ल्याके झापी देछै।

खास करिके जीवनमे कलंक नय लागे हे कलंक लागवो करला पर निस्कलंक (दाग नय लागे) पार हवे लगिन गणेशके जलम दिन भादो शुक्ल चतुर्थी तिथीमे ब्रत करछै।

पुजा समाग्रीमे दुरीबोन, पानसुपाडी, नरियर, आकोपतै, धुप दीप, केला, लड्डु मिठाई, सिनुर, फलफुल, दही , खिर, सोहारी, दुध, जल आदी तयार करे परछै। अरग देवे लगिन आकोपतै, पान सुपाडी हाथमे ल्याके उगल चानके देखते दुधके अरग गणेश जी के तीनवेर देछै।  भगवान गणेश से मने मने कलंकसे मुक्त करिदेवे लगिन बिन्ति गोचर करछै। चानके अरग देलाके बाद ब्रत ओरछै। सिनुरके टीका लगछै क्यामकी सिनुर गणेशजी के पसिमके टीका छैकै। सिनुर सुख समबृधीके प्रतिक छेकै। आपनसे बोडनाके सेवा पारीके आशिर्वाद लेछै। कुदेवतासे आसिरवाद लेछै। तव ब्रतालुनाके ब्रत टोडे लगिन प्रसाद ग्रहन करछै।

गोचर बिन्ति 

हे गणेश जी ! हमे चौठीचानके ब्रत लेलछिन। मलवैया छेकिन। अनपानी खेछिन । झुठ बोलछिन। घडीघडी अपराध करछिन। सेहास जान अनजानमे हेल दोष माफ करिदिह। हमर कलंक दुर करिदिह। हमरा अमृत, पुष्टी, बिद्या, श्रीसम्पती, सौन्दर्य, तेज, कान्ति, शान्ति, सुख आदी चान ढवक १६ कलासे पुर्ण करिदिह। हे गणेश जी ! हम अदना प्रणी छेकौन। जे जुरलोन से चढलोन, जे जानल छहोन से करलोन। घटीबढी माफ करिदिह। सदा हमर दाहिन रहिय। पुजा समापन हेलोन आपन पन ठाम लागिह। कहिके जलढारीके गोडमोड लागिके पुजा सोपी देछै। गणेश भगवान कि जय। चन्दामामा कि जय। कुलदेवता कि जय। ग्रामदेवता कि जय। सकले देवी देवता कि जय।

चौठीचान ब्रतके महत्व 

खास करिके जीवनमे कलंक नय लागे हे कलंक लागवो करला पर निस्कलंक (दाग नय लागे) पार हवे लगिन गणेशके जलम दिन भादो शुक्ल चतुर्थी तिथीमे ब्रत करछै। खाली हाथ चानके देखलासे कलंक लागछै। रिध्दिसिध्दि गणेशके ब्रत करला पर जीवनमे काममे सपलता पेछै। भगवान राममे १२ गुण, भगवान कृष्णमे १६ गुण हे चान ढवक १६ कला हेलके कारण भगवान कहलछै। मतर मलवैयाना कमसे कम सत्य, पराक्रम, धैर्य, श्री, सिध्दी, मान, कान्ति हे शान्ति गुण हे कला प्राप्तीके लगिन ब्रत करछै। सुख, शान्ति, सन्तान, श्रीसम्पति प्राप्त हेछै। काममे सफलता प्राप्त हेछै। रोगबियाद, संकट, दुख दुर हेछै। दोष, कलंकसे मुक्त हेछै कहिके जनबिशास छै।

बर्तमान अवस्था हे यकर पुस्तानान्तर 

थारु समुदाय लगायत तराईके आर समुदायमे चौठीचान परवके महत्व घटते गेलछै। क्यामकि ज्ञानके कमी, परंपरागत पुजनबिधी हे महत्व पुस्तानान्तरके कमी, आधुनिकता के प्रभाव, दोसरके पावनके चमकदमकके चलते थारु समुदायके पावन मनावे लगिन हिनता बोध, दोसरके देखासिकी, दोसर समुदायके पावनके सहज ग्रहण, सरकारसे थारु समुदायके चांड परवके प्रोत्साहन हे संरक्षनके कमी, थारु समुदाय आपन भाषा संस्कृति प्रति उदसिनता, पुस्तानान्तरके दुरी, शैक्षिक पाठ्यक्रममे थारु समुदायके परव समावेस के कमी, शासक बर्गसे उपेक्षा हे नेपालीकरणमे जोड, आदी बिबिध कारण से चाडपरवना लोपउन्मुख छै। याकर संरक्षण हे पुस्तानान्तर होना जरुरी छै। यकर लगिन थारु समुदाय लगायत चौठीचान ब्रत करेबला सबकोय लागेभिडे परतै। पावन तिहार सव्हैके साझा छेकै हे सब कोइ हर्ष उललासके साथ मनावे परछै।

                                      

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