Above News Title

संझनामे  मंगल सर  

इ कट्रा अचम्मके बाट हो, जे हम्रहिन लिखक् सिखाइल, आज उ बिटल बेला ओकर नाउँमे हमार एक लाइन नइ फुरठ् । का हम्रे असलि चेला हुइ ?
संझनामे  मंगल सर  

दाङदेउखर, राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरीक् पैल्हक हेडसर मंगलप्रसाद चौधरीक् घरअंगनामे लेखक डा कृष्णराज सर्वहारी । फायल फोटो

गइलक बरस २०८२ कुँवार १० ओ ११ गते दाङ, घोराहीके कविला रेसोर्टमे हुइल ‘थारुज क्याराभान कन्क्लेभ’मे भाग लेना सिलसिलामे डस्यासे कुछ अगमने काठमाडौंक् खोभल्टिमेसे उटर गइल रहुँ । उ बहसमुलक कार्यक्रममे थारु समुदायसे सम्बन्धित १८ ठो कार्यपत्र अपनेमे ऐतिहासिक रहे । डस्यक् टिकाके बिहाने देउखर नारायणपुर होटल सिक्सटी नाइनमे थारु भासाके लावा डग्गर त्रैमासिक आपन १६औं बार्षिकोत्सव मनाइल, उ कार्यक्रमके बर्का पहुना रहुँ । इ लगायट फुटकर आउर फेन कार्यक्रम रहे । 

लावा डग्गर त्रैमासिकसे काठमाडौं, कीर्तिपुरमे सँगे रना मैगर संघरिया शत्रुघन चौधरीहे सम्मान कैटि रहि । उहाँसे उक्वार भेट करक लग उहाँक् घर दाङदेउखर, राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरी गाउँक् भिट्टर खुँस्टल रहुँ । उहे गाउँक् मस्टरवा सुवर्णमान चौधरी गाउँमे डोरयइटि रहिँट । हुँकार घरसे पानी पिके निकरलि टे उहाँ कहलाँ, हेडमास्टर मंगलप्रसाद चौधरी बिमार बटाँ । चलि, एकघरि भेंट कर लि । 

पैल्हक हेडमास्टर मंगलप्रसाद चौधरीक् घर पुग्लि टे उहाँ बैसाखिके सहाराले बरबट्टि सरबट्ट् िनेंग्ना प्रयास कैटि रहिंट । हमार लग बैठ्ना कुर्सी आइल । सँगे उहाँ फेन बैठ्लाँ । ८० बरसके उमेर टेक्टि रहल उहाँ पुछ्लाँ, ‘अपने सर्वहारी हुइ ना ?’

ओट्रा उमेर, उपरसे गुरुसे भेट नइ हुइल बहुट साल हो गइल रहे । महि बहुट फोंहि लागल कि ओट्रा बुढापामे फेन उहाँ महि पहिचन्लाँ । मंगल गुरुहे मैं काठमाडौंसे देउखर डस्या मन्ना बहानामे उप्रक् २ कार्यक्रमके जिकिर करलुँ । उहाँ कहलाँ, ‘अपेनक खबर लेटि रठुँ । बहुट खुसि लागठ, अपने लोग थारु भासा साहित्यहे मलगर बनैनामे दिलोज्यान डेके लागल बटि । मै टे अंग्रेजी बिसयके मास्टर बन्के जिन्गि भर अंग्रेजी भासा, साहित्यके वकालत करलुँ । अपन मातृभासा थारुके कोनो सेवा नै करे सेकलमे पस्टो लागठ । आब मन लागके का कइना हो, उमेर चला गइल ।’ 

गुरुसे उहाँक् घर बट्वइटि रहल समयमे संघरिया शत्रुघन चौधरी फेन काठमाडौंसे आ पुग्लाँ । उहाँ फेन एकघरि गुरुके उहाँ छिरलाँ । अपनेहे पुँछके अपनेहे हँुक्रा भरके पह्रैना उहाँक् सैलि बहुट मन परे कना सुनैलाँ ।  

आब मंगल सरसे बट्वाके पुरान बाट लेना अवस्ठा नइ रहल । उहाँक् नाउँमे स्मारिका निकारे सेक्लेसे पुन्यके काम हुइना रहे । उहाँक् घरपरिवार, नाँटपाँट, सत्गौंवा समाज, उहाँक् चेला, शिक्षक सहकर्मिन् यम्ने हाँठ बटैंहि टे मजा रहि । 

बिसं २०३७ सालमे मैं दाङदेउखर श्री बाल जनता उच्च मावि (पहिले मावि किल) मे ३ कलास पह्रेबेर मंगलप्रसाद चौधरी हेडमास्टर रहिँट । टब्बे ३ कलासके जिल्लास्तरिय परिक्षा होए । हेडमास्टरके रुपमे मंगलप्रसाद चौधरीके सहि करल ३ कलासके मार्कसिट मोर घरक् सन्डुखामे सुरक्षित रहल हस लागठ । टब्बे अंग्रेजी बिसय एकफाले ४ कलाससे किल पह्रा जाए । ४ कलास पह्रेबेर हेडमास्टर राजेन्द्रप्रसाद चौधरी आ पुगल रहिँट । उहाँक् फेन अंग्रेजी बिसय रहिन् । मंगल गुरु सिसहनिया या गोबरडिहा सरुवा होके गइलाँ । 

लावा डग्गर अनलाइन, २१ असोज, २०८२ मे मै लिख्ले बटुँ, महि लागठ, मंगलप्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद चौधरी जे जिन्गि भर अंग्रेजी भासाके सेवा करलाँ । उहाँलोगनके अंग्रेजी साहित्यके टमान मिथक थारु भासामे अपने मौलिक साहित्यमे उटारके थारु साहित्यके बखारि भरे सेक्टाँ । समय गुजर सेकल । आब उहाँलोगन्से बट्वाके शिक्षा, समाज सुधारमे उहाँलोगनके कइलक योगदानके मजा पोस्टा बनाइ सेक्जाइठ ।  गुरुन्हे असलि गुरु दक्षिणा इहे रहि कि ?

मने समयके खेल, इहे २०८३ कार्तिक १ गटे मंगल सर हमन सडाके लग छोरके जा सेक्लाँ । उ राट बिहानि मंगल सरके छिमेकि सुवर्णमान चौधरी सर उहाँ नइ रहल खबर जनइलाँ टे महा दुःख लागल । आब मंगल सरसे बट्वाके पुरान बाट लेना अवस्ठा नइ रहल । उहाँक् नाउँमे स्मारिका निकारे सेक्लेसे पुन्यके काम हुइना रहे । उहाँक् घरपरिवार, नाँटपाँट, सत्गौंवा समाज, उहाँक् चेला, शिक्षक सहकर्मिन् यम्ने हाँठ बटैंहि टे मजा रहि । 

मंगल सरसे अंग्रेजी पह्रके २०४८ सालमे एसएलसी करल केशव शर्मा घिमिरे कार्तिक ७ गटेक् फेसबुकमे अपन गुरुके संझना लिख्ले बटाँ । मै उहाँसे कहलुँ, इ लिख्नौटि आउर लम्मा बनाइ । 
...
इ कट्रा अचम्मके बाट हो, जे हम्रहिन लिखक् सिखाइल, आज उ बिटल बेला ओकर नाउँमे हमार एक लाइन नइ फुरठ् । का हम्रे असलि चेला हुइ ?

स्रोतः लावा डग्गर अनलाइन, २१ असोज, २०८२

प्रकाशित:

३ दिन अगाडि

|

८ कात्तिक २०८३

रेशम चौधरीको उम्मेदवारी विरुद्ध उजुरी किन ?
रेशम चौधरीको उम्मेदवारी विरुद्ध उजुरी किन ?

१४७७ दिन अगाडि

|

२५ असोज २०७९

डा. केआई सिंहको बिर्तावाल ‘गुलयारी’ : थारू उपर कहिल्यै नमेटिने ती घाउहरू
डा. केआई सिंहको बिर्तावाल ‘गुलयारी’ : थारू उपर कहिल्यै नमेटिने ती घाउहरू

१५१२ दिन अगाडि

|

२१ भदौ २०७९

स्वतन्त्रहरु अनि नागरिक उन्मुक्ति पार्टीको उदयको दस्तक
स्वतन्त्रहरु अनि नागरिक उन्मुक्ति पार्टीको उदयको दस्तक

१५२२ दिन अगाडि

|

१२ भदौ २०७९

‘रेशम रक्तबीज हो, एक रेशमको उमेदवारी खारेजले हजार रेशम जन्मिन्छन्ः’ हिमाञ्चल भट्टराई
‘रेशम रक्तबीज हो, एक रेशमको उमेदवारी खारेजले हजार रेशम जन्मिन्छन्ः’ हिमाञ्चल भट्टराई

१४७७ दिन अगाडि

|

२६ असोज २०७९

टीकापुर घटनाको मुद्दा फिर्ता नलिइए नागरिक उन्मुक्तिका सांसदले शपथ नलिने 
टीकापुर घटनाको मुद्दा फिर्ता नलिइए नागरिक उन्मुक्तिका सांसदले शपथ नलिने 

१४२६ दिन अगाडि

|

१५ मंसिर २०७९

रातीसम्म नाचगान गरेको भन्दै टीकापुर प्रहरीबाट जानकीका ३ जनालाई पक्राउ
रातीसम्म नाचगान गरेको भन्दै टीकापुर प्रहरीबाट जानकीका ३ जनालाई पक्राउ

१४८२ दिन अगाडि

|

२० असोज २०७९

टीकापुर घटना राज्यसत्ताले चलाखीपूर्ण रूपमा घटाएको घटना होः मोहना अन्सारी
टीकापुर घटना राज्यसत्ताले चलाखीपूर्ण रूपमा घटाएको घटना होः मोहना अन्सारी

१४१५ दिन अगाडि

|

२७ मंसिर २०७९