इन्द्र चौधरीके थारु लोकखिस्साके घुर्घुट खोलाइ

इन्द्र चौधरीके थारु लोकखिस्साके घुर्घुट खोलाइ

४७० दिन अगाडि

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३१ असार २०८२

कलाकार मित्थु थारुहे सम्मान

कलाकार मित्थु थारुहे सम्मान

४७१ दिन अगाडि

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३० असार २०८२

काठमाडौं, कीर्तिपुरस्थित ठुम्रार साहित्यिक बखेरीके १०६औं श्रृंखलामे कलाकार मित्थु थारुहे असार २८ गते सनिच्चरके सम्मान कैगैल बा । कैलालीके जानकी गाउँपालिका, भगतपुरके कलाकार मित्थु थारु इ बरस संस्कृति पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मन्त्रालयसे सुदूरपश्चिमसे लोककला क्षेत्रसे क्षेत्रीय पुरस्कार पैले बटाँ । उ इहिसे पहिले नेपाल ललितकला प्रज्ञा प्रतिष्ठानसे मेरमेरिक पुरस्कार पैले बटाँ । दाङके चखौरालगायत संग्रहलायमे हुँकार मूर्तिकला, चित्रकला डेखे सेक्जाइठ ।  उ अवसरमे ठुम्रार साहित्यिक बखेरीके संयोजक डा कृष्णराज सर्वहारी थारु साहित्यमे किल नाहि, थारु लोककला, लोकसंस्कृति जोगैना अभियानमे लगुइयन फेन बखेरी सम्मान कैटि रहल बटैलाँ । सम्मानित कलाकार मित्थु थारु सम्मानसे आपनहे थप प्रेरना डेहल कहटि अइना डिनिम संयुक्त रुपमे व्यावसायिक ढंगसे कलाकारिता आगे बह्रैन प्रतिबद्धता कर्लां ।  शत्रुघन चौधरी सहजिकरन करल कार्यक्रममे साहित्यकार गणेश वशिष्ठ, सन्तोषी चौधरी, राकेश सिंह, नन्दुराज चौधरी, गणेश वर्तमान, सिताराम चौधरी, विवश चौधरी, कमल संघर्ष, भीमेश चौधरीलगायत स्रस्टालोग आअपन रचना सुनैले रहिट ।

धनगढीमे बुढनी उपन्यास उपर चर्चा

धनगढीमे बुढनी उपन्यास उपर चर्चा

४७३ दिन अगाडि

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२९ असार २०८२

बुढनी लोकबट्कोही उपन्यासमे आके थारु भासा संरक्षणमे सहयोग पुगल एक कार्यक्रमके सहभागीहुक्रे बिचार ढैले बटै । लोककथामे आधारित इन्दु थारुसे थारु भासामे उल्ठा करल बट्कोही ‘बुढनी’के २८ असार शनिच्चरके रोज धनगढीमे हुइल समिक्षा  कार्यक्रममे सहभागीहुक्रे टिप्पणी करटि इ किताबमे हेरैटि रहल लोककथा ओ लोप हुइटि थारु भासा, शब्दके संरक्षणमे सहयोग पुगल बटाइल रहिट । थारु कल्याणकारिणी सभा कञ्चनपुरके सभापति सुनिता चौधरी ‘सानु’ बुढनी बट्कोहीमे एकठो सघर्षशिल जन्नी मनैनके खिस्सा जोरल बटैलि । उहाँ कहलि, “एकठो डाइ मनै आपन लर्कापर्का, परिवारमे कौनो विपट ना आए कना चिज समेटल बा ।” यकर संगसंगे हमार पुर्खनके बोल्ना थारु शब्द लिखल बेलसगिल बा, जौन अब्बेक लौवा पिढी विस्राई लागल बटै । उ बुढनी बट्कोहीमे थारु समुदायसे बेल्ना रुख्वा बरिख्वा, चिरैचुरङगन, किराकाँटीनके नाउँ उल्लेखसे हमार भासा मौलिक शब्दके संरक्षणमे सहयोग पुगल सभापति सानु बटैलि । जानकी गाउँपालिकाके अध्यक्ष गणेश चौधरी अब्बे लोकखिस्सामे आधारित बट्कोही सुन्ना ओ सुनुइया मनै कम हुइटि गैल बटैलै । उहाँ कहलै, “इ किताबके खोलमे उल्लेख हुइल थारु समुदायसे मनाजैना अष्टिमकी चित्र हँठिया, घोरुवा, हर्ना, मञ्जोर, पाँच पाण्डव, चिरैयाके चित्र, थारु नाउँ जोरल बुढनी बट्कोही थारु समुदायके पहिचान झलकल बा ।” उहाँ कहलै, “किताव पह्रुइयनके संख्या घटटी गैल बा । मने मै इ किताव पह्रेबेर थारु समुदायसे बेल्सना मौलिक भासा, शब्द पैनु । पहिले पहिले थारु समुदायहुक्रे ज्ञानगुनके रुपमे लेजैना बट्कोही सुनाइट, मैं यम्ने उहे इतिहासके उल्लेख हुइल पैनु ।” ओस्टेक, करके बुढनीके समीक्षा करटि बाँधुराम हरडिउला कुश्मी हेरैटि रहल लोकखिस्साहे जिवन्त ढैना सहयोग पुगल बटैलै । इ बट्कोहिसे जन्नी मनै शसक्त हुइ परठ कना सन्देश डेहल फे बटैलैं । लोककथामे आधारित थारु भासामे उल्ठा बुढनी बट्कोही उल्ठा करुइया इन्दु थारु बुढनी बट्कोही काल्पनिक रहल मने थारु समुदायके जन्नी मनैसे भोगल परिस्थितिमे आधारित  खिस्सासे जोरल बटैलि । बुढनी उपन्यासके मुल लेखक प्रविण अधिकारी हुइट । उहाँ अंग्रेजी भासामे लिखल पोस्टाहे इन्दु थारु थारु भासामे उल्ठा कर्लि, जेकर सम्पाडन छविलाल कोपिला कर्ला । पहुरासे 

महेश चौधरीक् भासिक योगदान उपर छलफल

महेश चौधरीक् भासिक योगदान उपर छलफल

५०१ दिन अगाडि

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३२ जेठ २०८२

काठमाडौं, कीर्तिपुरस्थित ठुम्रार साहित्यिक बखेरीके १०५औं भागमे जेठ ३१ गते साहित्यकार महेश चौधरीके भासिक योगदानके उपर विस्तृत छलफल कैगैल बा । थारु भासके पहिला पत्रिका गोचाली (२०२८) के संस्थापक प्रधानसम्पादक महेश चौधरीके थारु, नेपाली ओ अंग्रेजीमे दर्जनसे ढेर पोस्टा प्रकाशित बटिन् । २०६२/२०६३ पाछे हुइल पहिचानके आन्दोलनमे थारु मधेसी नै हुइट कना मेरमेरिक लेखके संगसंगे ‘नेपालको तराई तथा यसका भूमिपुत्रहरु (२०६४)’ पोस्टा लिख्के प्रतिवाद कर्ले रहिट । दाङ, बैबाङका स्थायी वासिन्दा उहाँ २०८२ जेठ २४ गते राप्ती स्वास्थ्य विज्ञान प्रतिष्ठान, घोराहीमा उपचारके क्रममे बिटल रहिट । थारु भाषासेवी महेश चौधरीक् टिसर स्मृति दिवसके अवसरमे उहाँक्  बारेम ठुम्रार साहित्यिक बखेरीक संयोजक डा कृष्णराज सर्वहारी बिस्तृत चर्चा कर्ले रहिट । थारु लोकसाहित्य माँगर, बर्किमार, गुर्वावक् जल्मौटि, झुमरा नाचके गिट लगायत पोस्टा पहिल फेरा छाप्के महेश बरा गुन लगैलक उहाँ बटैलाँ । थारु व्याकरनसे लेके छारा नाटकके लेखन किल नैहेक नाटक मञ्चनमे समेत उहाँक् योगदान रहल सर्वहारी जनैलाँ ।  कार्यक्रममे डा. रामबहादुर चौधरी महेश चौधरीक् सँग व्यक्तिगत अनुभव साझा कैटि कहलाँ ‘उहाँक् लो ल्याण्ड अफ नेपाल पोस्टाके अंग्रेजी भासामे उल्ठाके लग सहकार्य करेबेर बिहानि ६ बजे मोर डेरामे पुगेबेर उहाँको कामप्रतिके खन्गर झुकाव डेख्के मै छक्क परल बटुँ । विडम्वना मोर सच्याइल सामग्री नै छप्के पुराने सामग्री छपलमे बहुट दुख लागल । उहाँक् सब पोस्टा फेनसे छप्ना चाहि ।’ ओस्टक, शत्रुघन चौधरी महेश चौधरीक् अनुसन्धानके कामके प्रसंसा कैटि कहलाँ, ‘महेशके सबहस अनुसन्धानमे थारु समुदायहे जोरके बहुट गहन अध्ययन बा । उहाँक् सिख्खा अन्य अनुसन्धानकर्तालोग फेन कैना चाहि ।’ कार्यक्रममे नन्दुराज चौधरी, गणेश वर्तमान, दिलबहादुर चौधरी, सिताराम चौधरी, विवश चौधरी, कलम बडुवाल लगायत स्रस्टालोग रचना वाचन कर्ले रहिट ।

थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी

थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी

५१५ दिन अगाडि

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१९ जेठ २०८२

थारु भसा साहित्य केन्द्र नेपाल जेठ १७ गते अपन डुस्रा अधिवेशन नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके पारिजात हलमे निम्जैले बा । अधिवेसनसे थारु भसा साहित्य केन्द्रके अध्यक्षमे फेनसे भुलाइ चौधरी चयन हुइल बटाँ । ओस्टक उपाध्यक्ष बुद्धसेन चौधरी, महासचिव सियाराम चौधरी, सचिव सहदेव चौधरी, कोषाध्यक्ष राकेश सिंह लगायत सब पुरान पदाधिकारीे हुइल बटाँ । ओस्टक सदस्यमे राम स्वागत चौधरी, कल्पना चौधरी, इन्दु चौधरी, आशिष चौधरी, सुमन चौधरी उदयनारायण चौधरी रहल महासचिव चौधरी जनैलाँ । केन्द्रके अध्यक्ष भुलाइ चौधरीके घरगोस्याइमे हुइल उद्घाटन कार्यक्रममे बर्का पहुना युवा तथा खेलकुद मन्त्री तेजुलाल चौधरी डा कृष्णराज सर्वहारीलगायत ३ जनहन सम्मान कर्ल । सम्मानित हुइनामे समाजसेवी शत्रुघनप्रसाद चौधरी ओ साहित्यकार सन्तोषी चौधरी बटाँ । कार्यक्रममे मन्त्री चौधरी अइना बरससे थारु भसा साहित्य केन्द्रमार्फत् २५ हजारके साहित्यिक पुरस्कार स्थापना कर्ना घोसना फे कर्ल । उहाँ थारुन् खानपानमे सुधार करे पर्ना, जागिरसे फेन लावा लावा व्यावसायमे हाँठ डारे पर्ना बटैलाँ ।  थारु लेखक संघ नेपालके केन्द्रीय अध्यक्ष डा कृष्णराज सर्वहारी केन्द्रहे अपन स्थापना दिवसके अवसरमे साहित्यिक पुरस्कार स्थापनाके लग अर्जि करलमे मन्त्री चौधरी सहकार्य करना वाचा कर्ले रहिट ।  उद्घाटन सत्रमे विनय वैद्य, डा रामबहादुर चौधरी, विजय चौधरी, सुशीला बेटी, विमल चौधरी, शान्ति चौधरी, आशिष चौधरी, थाकस केन्द्रीय अध्यक्ष प्रेमीलाल चौधरी, थारु आयोगके माननीय भोलाराम चौधरीलगायत बोलुइयन शुभकामना डेले रहिट । कार्यक्रममे रचना वाचन फेन हुइल रहे । कार्यक्रममे शान्ति चौधरीके ६९औं पोस्टा सलहेस फुलवारी डा अम्वेडकर पार्क ? के विमोचन बर्का पहुना मन्त्री चौधरी ओ अन्य पहुनालोग कर्ले रहिट ।  केन्द्रके उपाध्यक्ष बुद्धसेन चौधरी स्वागत ओ कार्यक्रमके सहजीकरन महासचिव सियाराम चौधरी कर्ले रहिट । थारु भसा साहित्य केन्द्र प्रत्येक महिनक् पहिला सनिच्चरके थारु साहित्यिक रचना वाचन बसघराके ८३औं भाग निम्जा सेक्ले बा । ओस्टक वाचित रचनाके ६ अंक बसघरा पत्रिका प्रकासन फे कर्ले बा ।   

थारु लेखक संघके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

थारु लेखक संघके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सम्पन्न

५३४ दिन अगाडि

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३० वैशाख २०८२

थारु लेखक संघ, नेपालके पचवाँ बार्षिक साधारण सभा सोम्मारके रोज धनगढीमे एक कार्यक्रम बिच वैशाख २९ गते सोम्मरके निम्लज बावै । थारु लेखक नेपालके अध्यक्ष जीत बहादुर चौधरी ‘ट्रासन’के घरगोसियाइमे हुइल कार्यक्रमके बर्का पहुना वरिष्ठ साहित्यकार यज्ञराज यात्री रहल रहिट । कार्यक्रमहे सम्बोधन कैटी बर्का पहुना यात्री आपन भाषा, कला रीति संस्कृति चालचलन, रहन सहन बचैना आवश्यक रहल बटाइल रहिट । उहाँ कहलै, ‘आपन पन सबकुछ होवई, आपन‐आपन हो । ओहेमारे हम्रे आपन भाषा, कला रीति संस्कृति चालचलन, रहन सहन सक्कु चीज बचैना आवश्यक रहल बावै ।’ ओकर लाग उहाँ थारु लेखक संघ, थारु साहित्यकार, पत्रकार कलाकारहुक्रनके मुख्य जिम्मेवारी रहल फेन बटाइल रहिट । उहे बिच उहाँहे साहित्यिक क्षेत्रमे योगदान पुगाइल कहटी सम्मान करल रहे । उहाँहे थारु लेखक संघके पूर्व अध्यक्ष सीताराम चौधरी दोसल्ला प्रमाणपत्रसे सम्मान करल रहिट । कार्यक्रममे बोलुइया सक्कुजाने फेन थारु भाषा, कला, साहित्यहे बचैना जरुरी रहल बटाइल रहिट । उहाँहुक्रे थारुहुक्रनके पहिचान, इतिहास बचाइक लाग सक्कु जाने लागे पर्ना औंल्याइल रहिट । कार्यक्रमके खास पहुना तथा थारु लेखक संघके संस्थापक सदस्य माधव चौधरी, दिलबहादुर चौधरी, थारु लेखक संघके कानुनी सल्लाहकार जोहारी लाल चौधरी, प्रतिभा महिला पुरस्कारके संस्थापक चन्द्रसिंह चौधरी, कर्मशिल बचत तथा ऋण सहकारी संस्थाके अध्यक्ष रामप्रसाद चौधरी, थारु गाउँ भादा होमस्टेके अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण चौधरी, फोनिज सुदूरपश्चिम प्रदेश इन्चार्ज लखन चौधरी, फोनिज सुदूरपश्चिमके महासचिव भानुप्रताप राना, थारु लेखक संघके पूर्व उपाध्यक्ष सानु चौधरी, गायिक मनमति बखरिया, थारु चलचित्रके निर्देशक चन्द्र चौधरी चाँद लगायत शुभकामना मनतब्य राखल रहिट । उहे बिच थारु लेखक संघ नेपालके सचिव अनिल कुश्मी आव २०८१/०८२ के बार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करल रहिट । उहाँ बार्षिक क्रियाकलाप अन्र्तगत कैलारी गाउँपालिकाके स्थानीय विषयक पुस्तक ‘हमार कैलारी’ कक्षा २ के लेखन, प्रकाशन ओ वितरण करल, धनगढीके गुरही चौकमे असराजैना गुहरी टिहवार कार्यक्रमके समन्वय सहकार्य ओ आयोजना, २०८१ साल फागुन १५ से १७ गतेसम बर्दियाके राजपुर‐२ जोतपुरमे ९औं थारु साहित्य राष्टिय सम्मेलन आयोजनाके साथे उहे कार्यक्रममे बर्दियाके सुशील चौधरीहे नगद ५० हजार शाशीके थारु साहित्य सम्मानसे पुरस्कृत ओ बेलारी नगरपालिका ७ कञ्चनपुरके सुनिता चौधरी सानुहे नगद २५ हजार राशीके प्रतिभा सशक्तिकरण पुरस्कारसे सम्मान करल जनाइल रहिट । ओस्टके उहाँ आगामी कार्य योजना अन्र्तगत थारु लेखक संघके केन्द्रीय कार्यालय धनगढीमे स्थापना कैना, मासिक साहित्यिक कार्यक्रम कैना, आजीवन सदस्य संख्या वृद्धि कैना, अइना १०औं थारु साहित्य राष्टिय सम्मेल २०८२ माघ १५ से १७ गते पर्सा जिल्लाके सुगौली पटेर्वा गाउँपालिकाके बेलवा गाउँमे कैना, विद्यार्थी साहित्य महोत्सव आयोजना कैना, थारु मौलिक बाजागाजा बजैना तालिम ओ सामाजिक कार्य ओर रक्तदान कैना कार्ययोजना रहल सुनाइल रहिट । ओस्टके थारु लेखक संघसे अब्बेसम पाँच जनहनहे थारु साहित्य सम्मानसे पुरस्कृत करल बटैलै । उहाँ कैलालीके लक्ष्मी राना, बर्दियाके शेखर दहित ओ सुशील चौधरी, दाङ देउखरके दोषहरण चौधरी ओ सुनसरीके रामसागर चौधरीहे उ पुरस्कारसे पुरस्कृत करल हो । ओस्टके प्रतिभा महिला सशक्तिकरण पुरस्कारसे दाङदेउरखके मन्जिता चौधरी, बाराके शान्ति चौधरी ओ कञ्चनपुरके सुनिता चौधरी सानु सहित ३ जनहनहे पुरस्कृत करल जनाइल बावै । ओस्टके कार्यक्रममे कोषाध्यक्ष दुर्जन कुमार चौधरी आव २०८१/०८२ के आयव्यय विवरण प्रस्तुत करल रहिट । उहाँ आठ लाख ८७ हजार १०८ रुप्या बराबरके आयव्यय प्रस्तुत करल रहिट । कार्यक्रममे थारु लेखक संघके जिल्ला कार्यसमिति सदस्य राजुराज चौधरी स्वागत करले रहिट कलेसे सञ्चालन सहसचिव दिनेश संगम करले रहिट । कैलारी अनलाइनसे