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रोज सरेसिकारः का हरढौवा, का गुरही

रोज सरेसिकारः का हरढौवा, का गुरही

अशिराम डंगौरा

हरडहुवा (हरढौवा) थारू गाउँमे बर्खामे खेट्वाम धान लगाके सेकल पाछे गाउँ भरिक मनै संगे जिटा मारके खेट्वा सेकाई खैना एकठो विषेश टेहुवार हो । बर्खाभर घाम पानी हिलाकिचा सहके सरटारे हुके खुशियाली स्वरूप मना जैना यी टेहुवारमे थारूनके जिटा सुरा, छेग्रा, भेंर्वा मारके गाउँभरिक मनै अपन सिहरावन मेटाईक लग हरढौवा मनैना चलन बा । हरढौवा हरेक गाउँक मनै अपन अपन सल्लाह अन्सार फरक फरक मनैटी आईल बाटै । मनो इही एकरूपटामे मनैलेसे अउर मजा हुइट ।

एक डशक आगेक हरढौवाक रमझम सम्झेबेर मन आनन्दित हुइठ । जस्टेक जस्टेक रान परोसके खेट्वाम धान लगाके ओराए, ओस्टेक हरढौवा खैना दिन लग्गे आए, धान लगाके आढा हुई लागे टबसे लिखन्डरिया हुक्रे हरढौवाम केकर सुरा जिटा मर्ना बा । लिस्ट तयार करे लागैह । हरोहियान हर जुवा खुट्यैटी सायट हुरडुङ्ग्वा नाच करेक लग मन्ड्रा गीट नचनिया नाचे सिखैह । 

यदि दुई चार घरेक मनै ढिला हुजाए टो रानपरोसिक मनै धान लग्वाई हर जोटाई, लेवा कराई मद्दत जाईह । जब सक्कु गाउँझारा मनै खेट्वा लगा सेकैह, टब जाके बल्ल हरढौवाक जिटा मरना चलन रहे । हरढौवाम हुरडुङ्ग्वा नाच झुम्रा नाचसे गाउँ चैनार हु जाए । मनो अब यी सब कहाँ गैल खै किहु पटा नाई हो । आझकलके मनै हरढौवाक महत्व विशेषता भुलागिनै । 

अबके समय रोज एक लेवाही लगाउ, रोज हरढौवा मनाउँ । गाउँमे टोल टोलमे लालभाजी मिल्ना दुकान खुललके कारन हो कि आझकलके डलिड्डर मनै हुके हो । ठोरचे डटसे काम करटीके सिकार, मछार चहना । पहिले यी सब नाई रहे । खेट्वा लगाई शुरू करल दिन खेट्वैम पाँच सात मेरिक टिना रिझाके खाना खैना चलन रहे । सायट केक्रो घरेम ढेर मुर्गी बक्टी रहलेसे हो उ दिन सिकार रिझा लेईह, नि सिकार खाईक लग एकचोट्टे हरढौवाक आस लागे परे ।

हरढौवा थारू खेट्वाम धान लगाके संगे जिटा मारके खैना चलन हो कना पुरा नेपाल संगे परोसी देशके भारतके  थारू गाउँमे फे चर्चित बा । पहिल ढेर कृषि औजार नाई हुईलेक कारन बैठौवा लगैना ढिला हुईलेसे कबु कोई साल गुरही ओ हरढौवा संगे संगे हस मनैना हु जाए । 

पहिले पहिलेक रट लगैलेसे हमार पाठक हुक्रन अन्कुस लागे सेकठ, मनो वास्तविकता इहे हो पहिले ढेर सेवा सुविधा नाई रहे, टब फे हर चीज टर टेहुवार अपन अलग अलग विशेषता रहे, जौन समय सापेक्ष बहुट मजा लागे । 

समय संगे मनै बड्लटी जैना हुईलेक ओरसे कोई ठाउँमे बड्लना जरूरी फे बा । बड्लनाक अर्थ भर यी नाई हो कि हमार पुर्खौसे चल्टी आईल टर टेहुवारके स्वरूपे बडल डेना ओकर, अस्तित्वा हेर्वा डेहना । यहे अस्तित्वा हेरैना कगार पर बा हमार थारूनके हरढौवा । यकर खास कारन खोज्लेसे साफ मिलठ, आझकलके मनै हड्बड्हा हुगिनै, जौन पहिलेक समयमे रानपरोस समुदायमे मेल मिलाप सहयोगके भावना रहे, ऊ अब्बै कहु नाई डेखाईठ । उ चाहे मै लेखकमे हो या अपने पाकठमे सबकोई स्वार्ठी हुगिल बाटी । अपन काम बनाईक लग जेकर फे गोर पकरलेना, मनो अपन काम बनल पाछे ऊही चिन्हबे नि करना । 

हर जोटे बेर, मेरूवा कसे बेर सजना मैना बियार काटे बेर मचियाम बैठके बाँससे बिनल मौहरैनिक पातासे छाँईल छट्रिक छाँहीम खिसा, बट्कोही सुन्बी, टब बर्खा लगाईल हस लागि ।

हम्रे आधुनिकता हे अपन समाजके ऊप्पर कुछ ढेरे हावी हुई डैके सहयोगके भावना भुलाके हाँरिक हुस्सा वाला भावना अंगाल सेकल बाटी । खेट्वा जोटे बेर, मेरूवा बाँढे बेर गैना सजना मैना सब भुलागिली । बियार काटे बेर जन्ना बुझ्ना छिपाल पाकल मनैनके मुहसे खिसा कहानी सुने भुलागिली । बेर्हामे रङगीबिरङ्गी छाता किल बिल्गठ, छट्री हेरागिल । मचिया पिर्काक बड्ला ईट्टाम बैठे लग्ली।महिना दिन खेट्वाम धान लगा सेक्के हरढौवाम भल्हे दुई बुट्टी सिकार मिले, ओकर अलग स्वाद सन्तुष्टी मिले । अब हर रोज खैना दवाईक बुटे बार्हल बोईलर मुर्गीनमे खोज्ठी टो कहाँसे मिली ?

ओरौनीम,

हरढौवा खेट्वाम धान लगाके खैना हमार खास टेहुवार हो । जिही पुरा नेपालभर एकरूपटा भलहे नाई कराई सेकमिले मनो गाउँघरमे टो एकरूपटा पक्कै कराई सेकजाई। ओ खास बाट, आझकल खेट्वा कहना केकर ढेर बा ? सबके हाल ओहे हो पाँच दश कट्ठा ढेरमे बिगहा दुई बिगहा टो हो। मजासे लगैलेसे एक अठवारमे ओराजाईठ ।  बिच आझकलके डेख्नौटी चाल रोज डुग्गीक सिकार खैना जरूरी टो नाई डेखाईठ । हमरे कहठी, आझकलके टेहुवार टेहुवार हस नाई लागठ ।

अब रोज सरेसिकार खैबी टो का हरढौवा । का गुरही रोज खैटी रहनामे का फरक लागि । हर जोटे बेर, मेरूवा कसे बेर सजना मैना बियार काटे बेर मचियाम बैठके बाँससे बिनल मौहरैनिक पातासे छाँईल छट्रिक छाँहीम खिसा, बट्कोही सुन्बी, टब बर्खा लगाईल हस लागि । हप्ता दश दिन खेट्वा लगा सेकके एकफाले गाउँ समाजके सबकोई संगे हरढौवा खैबि, टब ओकर रौनक डेखे मिली । 

ऐसिके हमार फजुल खर्च घट्नाक साठे बोईलर खाके रोगी बन्टी रहल हमार शरिरहे फे हप्ता दशे दिन हुइलेसे फे कुछ अराम मिली । ओ, पुर्खानी कला, गला सिप ओ टर टेहुवारके रौनक हरडम बचल रही ।साभारः पहुरा

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