दाङदेउखर, राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरीक् पैल्हक हेडसर मंगलप्रसाद चौधरीक् घरअंगनामे लेखक कृष्णराज सर्वहारी
आज्कल देउखरओर बटुँ । इहे कुँवार १० ओ ११ गते दाङ, घोराहीके कविला रेसोर्टमे हुइल ‘थारुज क्याराभान कन्क्लेभ’मे भाग लेना सिलसिलामे डस्यासे कुछ अगमने काठमाडौंक् खोभल्टिमेसे उटर गइल रहुँ । उ बहसमुलक कार्यक्रममे थारु समुदायसे सम्बन्धित १८ ठो कार्यपत्र अपनेमे ऐतिहासिक रहे । डस्यक् टिकाके बिहाने देउखर नारायणपुर होटल सिक्सटी नाइनमे थारु भासाके लावा डग्गर त्रैमासिक आपन १६औं बार्षिकोत्सव मनाइल, उ कार्यक्रमके बर्का पहुना रहुँ । इ लगायट फुटकर आउर फेन कार्यक्रम रहे ।
लावा डग्गर त्रैमासिकसे काठमाडौं, कीर्तिपुरमे सँगे रना मैगर संघरिया शत्रुघन चौधरीहे सम्मान कैटि रहि । उहाँसे उक्वार भेट करक लग उहाँक् घर दाङदेउखर, राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरी गाउँक् भिट्टर खुँस्टल रहुँ । उहे गाउँक् मस्टरवा सुवर्णमान चौधरी गाउँमे डोरयइटि रहिँट । हुँकार घरसे पानी पिके निकरलि टे उहाँ कहलाँ, हेडमास्टर मंगलप्रसाद चौधरी बिमार बटाँ । चलि, एकघरि भेंट कर लि ।

पैल्हक हेडमास्टर मंगलप्रसाद चौधरीक् घर पुग्लि टे उहाँ बैसाखिके सहाराले बरबट्टि सरबट्सट्टि नेंग्ना प्रयास कैटि रहिंट । हमार लग बैठ्ना कुर्सी आइल । सँगे उहाँ फेन बैठ्लाँ । ८० बरसके उमेर टेक्टि रहल उहाँ पुछ्लाँ, ‘अपने सर्वहारी हुइ ना ?’
ओट्रा उमेर, उपरसे गुरुसे भेट नइ हुइल बहुट साल हो गइल रहे । महि बहुट फोंहि लागल कि ओट्रा बुढापामे फेन उहाँ महि पहिचन्लाँ । मंगल गुरुहे मैं काठमाडौंसे देउखर डस्या मन्ना बहानामे उप्रक् २ कार्यक्रमके जिकिर करलुँ । उहाँ कहलाँ, ‘अपेनक खबर लेटि रठुँ । बहुट खुसि लागठ, अपने लोग थारु भासा साहित्यहे मलगर बनैनामे दिलोज्यान डेके लागल बटि । मै टे अंग्रेजी बिसयके मास्टर बन्के जिन्गि भर अंग्रेजी भासा, साहित्यके वकालत करलुँ । अपन मातृभासा थारुके कोनो सेवा नै करे सेकलमे पस्टो लागठ । आब मन लागके का कइना हो, उमेर चला गइल ।’
गुरुसे उहाँक् घर बट्वइटि रहल समयमे संघरिया शत्रुघन चौधरी फेन काठमाडौंसे आ पुग्लाँ । उहाँ फेन एकघरि गुरुके उहाँ छिरलाँ । अपनेहे पुँछके अपनेहे हँुक्रा भरके पह्रैना उहाँक् सैलि बहुट मन परे कना सुनैलाँ ।
बिसं २०३७ सालमे मैं दाङदेउखर श्री बाल जनता उच्च मावि (पहिले मावि किल) मे ३ कलास पह्रेबेर मंगलप्रसाद चौधरी हेडमास्टर रहिँट । टब्बे ३ कलासके जिल्लास्तरिय परिक्षा होए । हेडमास्टरके रुपमे मंगलप्रसाद चौधरीके सहि करल ३ कलासके मार्कसिट मोर घरक् सन्डुखामे सुरक्षित रहल हस लागठ । टब्बे अंग्रेजी बिसय एकफाले ४ कलाससे किल पह्रा जाए । ४ कलास पह्रेबेर हेडमास्टर राजेन्द्रप्रसाद चौधरी आ पुगल रहिँट । उहाँक् फेन अंग्रेजी बिसय रहिन । मंगल गुरु सिसहनिया या गोबरडिहा सरुवा होके गइलाँ । महि अंग्रेजी राजेन्द्र गुरु जो पह्रैलाँ ।
राजेन्द्र गुरुके घर गढवा गाउँपालिका खर्गुपुर हुइन् । उहाँ हाल गउँहिम खेटिपाटिमे डँटल सुन गइल बा । बनगाँवा स्कुलिम जो उहाँक् डेरा रहिन । पियन देवी चौधरी उहाँहे खाना बनाके खवाइट । सुखके घरे जाके अटवारके स्कुल लग्नाबेला अपन गाउँ खर्गुपुरसे राप्ती लडिया नाँघके छिंगटपुर, राजपुर–बुटकह्वा, छुटकी घुम्ना हुइटि उहाँ स्कुल आइंट । अनुशासनमे महाँ आँखर उहाँक् बोलि सुन्के फेन हम्रे डराइ । छुटकी घुम्नाक् मैं डग्रक आँरिटिर बन्सि लगाइक डराउँ । उहाँ भल्भाग इहे डगर अइहिं ओ महि बन्सि लगाइट भेटैहि टे मोर का हाल हुइ कना लागे । भल्चे उ नौबट नै आइल ।
आइ, जे जहाँ बटि, आ आपन गुरुलोगनके कर्लक योगदानके पोस्टा बनाइ । गुरुन्हे असलि गुरु दक्षिणा इहे रहि कि ?
राजेन्द्र गुरु पाछे लर्कापर्का, गुरुमासहिट सपरिवार स्कुल अइलाँ । उहाँक् बर्का छावा सुरेन्द्र चौधरी ओ बर्कि छाइ सुनिता चौधरीसे हम्रे क्लासमेट हुइ । उहाँक् मझला छावा पैल्हक सांसद योगेन्द्र चौधरीसे हमारसे छोट कलासमे पह्रिट । उहाँलोगनसे मै महा हलि घुलमिल हुइलुँ । कबो जबो उहाँलोगनके भन्सम् मिझ्नी फेन खइलुँ । स्कुल पह्रहि बेर उहाँलोगनके घर खर्गुपुर पहुनि खाइ फेन गइलुँ ।

पैल्हक हेडसर राजेन्द्रप्रसाद चौधरी बर्का छावा सुरेन्द्र चौधरीहे डसैहा टिका लगाके आर्शिवाद डेटि, साथमे गुरुमा ।
पहिले एसएलसी परिक्षम् किल ब्याक लागल सुन्जाए । अम्रिकासे पह्रके आइल राजेन्द्र गुरु ४ कलास पह्रेबेर अंग्रेजीमे ब्याक लगा डेलाँ । ६ कक्षम् पह्रना डाडु ऋषिराजके फेन उहे बिसयम् ब्याक लाग गइल रहिन् । संघरेन पास होके फोहाइट । हम्रे जुन मुँह लट्कोइले कोचिङ कलास पह्रे जाइ । ब्याक डेके पास हुइलि, डोसर बरससे डाडा भाइ फस्ट सेकेन आइ लग्लि । राजेन्द्र गुरुके छोटे कक्षम् ब्याक लगाके कोचिङ कलास पह्राके मौका परिक्षा डेह्वाके लर्कन पह्राइप्रति सचेत करेन गुन मैं जिन्गि भर भुलाइ नइ सेकम । इ संझनाके पुँछि जोराके कोनो डिन लम्मा बनइना मना बा ।
महि लागठ, मंगलप्रसाद, राजेन्द्र प्रसाद चौधरी जे जिन्गि भर अंग्रेजी भासाके सेवा करलाँ । उहाँलोगनके अंग्रेजी साहित्यके टमान मिथक थारु भासामे अपने मौलिक साहित्यमे उटारके थारु साहित्यके बखारि भरे सेक्टाँ । समय गुजर सेकल । आब उहाँलोगन्से बट्वाके शिक्षा, समाज सुधारमे उहाँलोगनके कइलक योगदानके मजा पोस्टा बनाइ सेक्जाइठ । देउखर गंगदी स्कुलके हेडसर पुरन चौधरी फेन बहुट बरस पह्रैलाँ । आइ, जे जहाँ बटि, आ आपन गुरुलोगनके कर्लक योगदानके पोस्टा बनाइ । गुरुन्हे असलि गुरु दक्षिणा इहे रहि कि ?
प्रकाशित:
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२१ असोज २०८२
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१० कात्तिक २०८३
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