रुमा चौधरी
महीँ टे इ डेसके असली हिरो
किसान हुइट जस्टे लागठ।
जिही न घाम के पटा रठिन,
न टे बर्खा के डर,
बस उब्जनीके आसमे
घाम पानी बिन हेरल
अपन काममे राटो डिन डटल रठाँ।
उहे किसान,
जे आपन घर चलाइक लग
डिन राट मेहनत कर्ठा
अट्रे किल नाही,
पूरा देशके पेट भरक लग
हरडम पस्ना बहैटी रठाँ
उहे किसान,
महँगा बिया बालर, मलखाद
मोल लेके खेटी टे कर्ठा
मने अपन लगानी
फिर्ता आई कना भरोसा
कभु नै कर्ठा ।
कबो बाह्र, कबो सुख्खा,
आउर जहन खवाके अपने भुख्खा
सक्कु परिस्थितिसे जुझे पर्ठिन किसानहे,
महँगाईके बोझा
सडा डिन बोक्टी रठाँ किसान
खेट्वामे डिन भर
पसना चुहैटी,
मेहनट कैटी रठाँ,
मजा उत्पादन डेखके
मन फोहैटी रठाँ ।
लेकिन,
जब बजार जैठाँ
मजा भाउ नै पैठाँ,
टब किसान डुखी हुइटी
घर लउट जैठाँ ।
लेकिन किसानके पीड़ा बुझक लग
कोई आगे नै बह्रठाँ ।
बिचारा किसान,
जट्रा मिहनेट करलेसे
सबओर घाटेघाटा
अभिन
बजारमे बिन बुझल
कनैं एक मुट्ठा सागमे
मोल भाउ करठाँ।
किसान मेहनत कैके
सबके पेट पल्ठाँ
लेकिन दुःख टब लागठ
जब जागिरे, धनीमानी मनै
खेटी कैके काम नै हो,
कहिके किसानहे हेप्ठाँ।
बिचारा किसान ।
हाय रे किसान ।
राप्ती गाउँपालिका–८, पिपरी
दाङ देउखुरी
प्रकाशित:
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