शर्मिला सृष्टि
सबसे पहिले नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानहे बहुट ढेर धन्यवाद बा, जे नेपाल प्रज्ञा मातृभाषा (थारू) साहित्य पुरस्कार २०७९ तराई मधेसमे बोल्ना मातृभाषा साहित्यके लग महिन फे एक लाख राशीके रकमसे सम्मानित करल ओरसे ।
सम्माननीय राष्ट्रपति विद्या भण्डारीके हाँठसे पुरस्कार पक्रेबेर खुसिके हल्कोराके साथसाथे माननीय संस्कृति पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मन्त्री एवम् नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके संरक्षक जीवनराम श्रेष्ठप्रति आभारी बटुँ । ओस्टक कुलपति गंगाप्रसाद उप्रेती, उपकुलपति डा जगमान गुरुङ सदस्य सचिब प्राध्यापक जगतप्रसाद उपाध्याय हुकहनके झङ्झङ्ग्यार छहुँरिके बिचमे दोसल्ला डडुरे डडुर बधाई पाके गड गड बटुँ ।
महिनहे साहित्यके फँटुवामे दौडधुप कर्ना अपन साहित्यक कलमहे टिस्लार पर्ना जरुरी लागल वा । कर्मके फल एक ना एक दिन जरुर मिलठ । पेरुवा लगैबो टे एकदिन जरुर फल लागठ् । आज मै आपन कर्मके स्वाद चिखे पाइल अनुभूति करले बटुँ ।
ठोरचुन मोरिक साहित्यक पहुरा मनके फुला (२०६२), दुःखके हल्कोरा (२०६४) प्रकाशन हुइल बा । साथसाथे कथा, कविता, नाटक आउर फे बिधामे कलम चलैले बटुँ मने प्रकाशनमे नै नन्ले हु । यी मै आपन बहुट वरवार कमजोरी मानटु । यी पुरस्कार आज महिन अप्रकाशित कृति झट्टसे झट्ट निकरना कहिके मन झक्झकुवाइटा ।
महिनहे साहित्यके फँटुवामे दौडधुप कर्ना अपन साहित्यक कलमहे टिस्लार पर्ना जरुरी लागल वा । कर्मके फल एक ना एक दिन जरुर मिलठ । पेरुवा लगैबो टे एकदिन जरुर फल लागठ् । आज मै आपन कर्मके स्वाद चिखे पाइल अनुभूति करले बटुँ ।
महिनहे साहित्य लेखनमे सहयोग साथ डिहुइया महानुभाव हुक्र, बिलाइल जुनिमे किताब छपाइक लग छपाइल बेलामे आर्थिक सहयोग डेहुइयनसे लेके मोरिक सहित्यक फँटुवामे आगेपाछे सहयोग साथ करुइया सक्हुनहे धन्यबाद डेहक चाहटुँ ।
अइना दिनमे आपन भाषा संस्कृतिके अखुवारी करनाके संग सगे मोर थारु जाति समुदायमे रहल अन्धविस्वास, फटरङ कुरीतिहे उजाभङ्ग कराक लग अपन साहित्यिक कलमहे चलैबु कना सोच्ले बटुँ । नेपाल प्रज्ञा मातृभाषा साहित्य पुरस्कार पाके आज फेरसे मोर साहित्यक फुलरियामे छलाङ्ग मारडेले बा । पुरुस्कृत होके मोर मन आव कुछ करे परल कहिके थप बलबुटाके साथ कुलबुलाइटा ।
पुरस्कार डेहेवेर सहि मनैन हे छाने सेक्लेसे संस्थाके ओ ब्यक्ति डुनु जहनके लेखुइयक ओ डेहुइयक अर्थ रहट । नै ट कि अर्थ न तीर्थ । यी चिज नै हुइ कना मोर हरबड्डा बा । यी पुरस्कार पाके मिहिनहे ऐसिन अनुभूति हुइटा कि करल कामके मै पुरस्कार नै पैले हु कि अइना दिनमे कुछ करक लग मै पुरस्कृत हुइल बटुँ ।

साहित्यक टिपुन्नीमे अकेली एक्चोट्टे नै पुगे सेक्जाइठ । यी चिज मै खिडोर बिडोर करके बरी ध्यान नजर करके हेरले बटुँ । उपर चह्र्रेबेर खढ्ढुके फेन ओत्रै भारी देन रठिस । बिना खढ्ढुके मनै उपर चउह्रेबेर कर्रा परजाइठ । ओस्टके महिन फेन उपर बह्र्रेबेर बहुट जाने अपन हाँठके खढ्ढु बनाके उप्पर चहरना हौसला डेले बटै ।
आज मोर मनमे ऐसिन अनुभूति हुइटा कि मोरिक साहित्यिक हरेक पाइलामे सहयोग हौसला सुझाब डेहुइया मनके धनी धनवान हुकन फे मै पुरस्कार पाके ओत्रै खुसी लागट हुइहिन । अइना दिनमे फेन हजुर हुकनके सुझाव ओ साथ लेके मै आगे वह्रे सेकु कना अस्राके डगरमे बोटिया हेरके बैठल बटुँ ।
प्रकाशित:
१५०१ दिन अगाडि
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३ असोज २०७९
३ दिन अगाडि
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१० कात्तिक २०८३
३ दिन अगाडि
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९ कात्तिक २०८३
४ दिन अगाडि
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८ कात्तिक २०८३
१४ दिन अगाडि
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२९ असोज २०८३
१५ दिन अगाडि
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२८ असोज २०८३
१९ दिन अगाडि
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२४ असोज २०८३
२२ दिन अगाडि
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२० असोज २०८३
१४७९ दिन अगाडि
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२५ असोज २०७९
१५१३ दिन अगाडि
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२१ भदौ २०७९
१५२३ दिन अगाडि
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१२ भदौ २०७९
१४७८ दिन अगाडि
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२६ असोज २०७९
१४२७ दिन अगाडि
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१५ मंसिर २०७९
१४८३ दिन अगाडि
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२० असोज २०७९
१४१६ दिन अगाडि
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२७ मंसिर २०७९