गजलः नैचाहि सोना चाँडि

गजलः नैचाहि सोना चाँडि

१२८१ दिन अगाडि

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१४ वैशाख २०८०

मेर मेरके फुला फुलल् डेख्ठुँ 

मेर मेरके फुला फुलल् डेख्ठुँ 

१२९४ दिन अगाडि

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१ वैशाख २०८०

दिपक चौधरी "असीम" प्राकृतिक बग्यामे मेर मेरके फुला फुलल् डेख्ठुँ  ओहे फुलामे जोग्नि, मढ्वा,भौंरा भुलल् डेख्ठुँ।  अपन बोलि भासा संस्कृति पहिरान छोर्के यहाँ,  लावा युबा हुक्रन बिडेसि संस्कारमे डुलल् डेख्ठुँ।  कट्रा सुहावान हमार अप्ने नाचकोर गिटबाँस बा, फेर काजे इ छोर्के फिल्मि डुन्यँम् झुलल् डेख्ठुँ।  डफ्ला मन्ड्रा, झाल मजिरा कस्टार हमार संगिट,  इ सब छोर्के बजारमे डिस्को डिजे खुलल् डेख्ठुँ।  कसिके लावा पुस्टाहे हमार अपन संस्कृति डेना हो,  एहे सोंचमे हमार पहिचान हेरैना डर नुकल् डेख्ठुँ।                                 कैलारी २ बसौटी, कैलाली

धनगढीमे गोंरि डारल समाज रुपान्तरणके लाग ‘बातचित घर’

धनगढीमे गोंरि डारल समाज रुपान्तरणके लाग ‘बातचित घर’

१३०० दिन अगाडि

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२४ चैत २०७९

समाज रुपान्तरण कैना अभियानके साथ धनगढीमे ‘बातचित घर’ सुखसे सुरु हुइल बा । बातचित घरके उद्घाटन सुदूरपश्चिम प्रदेश लोकसेवा आयोगके उपसचिव हिरालाल चौधरी करला । उहाँ बातचित घरहे राजनीतिक, सामाजिक, साँस्कृतिक, आर्थिक लगायत टमान विषयबस्तुके छलफल, विचार विमर्श कैना प्लेटफर्मके रुपमे लेहल जनैलाँ । बातचित घरके सञ्चालक संयोजक, बरघर ठाकुर करिया प्रधान समसामयिक विषयवस्तुमे छलफलके लाग एक साझा मञ्चके विकास कैना उद्देश्यसे बातचित घर सुरु कैगैल बटैलाँ । उहाँ बातचित घरसे थारू कला, साहित्य लेखन ओ सिर्जनात्मक कामके बखान कैजैना ओ इहिसे थारू समुदायमे रहल बौद्धिकताके प्रर्वद्धन, दस्तावेजीकरन फेन हुइना कहलाँ । धनगढीके थारु छात्रबासमा स्थापना हुइल बातचित घरमे मासिक रुपमे कम्तिमे एकफेरा ओ आवश्यकता ओ समय अनुकुल चाहेजब कार्यक्रम कैना जना गइल बा । घरके किसन्वा तथा व्यवस्थापन संयोजक माधव थारू कार्यक्रममे आइल पहुनन्हे मनतब्य सहित स्वागत करल रहिट । कार्यक्रमके सञ्चालन अघरिया उन्नती चौधरी करले रहि । कार्यक्रममे साहित्यकार सागर कुश्मी, सानु चौधरी, गायक राज चौधरी, निर्देशक चन्द्र चौधरी लगायत ढेरजने आ आपन रचना सुनैले रहिट । कार्यक्रममे थारू वुद्धिजीवी, समाजसेवी, पत्रकार, विद्यार्थी लगायतके जुटौला रहे ।

जिन्गिसे लर्टि बटुँ मै

जिन्गिसे लर्टि बटुँ मै

१३०३ दिन अगाडि

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२२ चैत २०७९

दिपक चौधरी ‘असीम’ कब कहाँ कह्या ओराइ जिन्गि मोर सोंच्टि बटुँ मै।  हर कडम यहाँ समस्यासे लर्टि जिन्गि कट्टि बटुँ मै।  खै कौन कलमसे कौन डिन भाग्य लिखल बिढाटा फेँ,  कहुँ सुख नै लिखल् मोर डुखक आँस पोंछ्टि बटुँ मै।   कबु सोडेस कबु बिडेस स्ठाइ रुपसे बसोबास नै हो,  कबु घरबास कबु परबासके बिच डगर नेग्टि बटुँ मै।  घर परिवार इस्ट मित्र सक्कुजे कह्ठैं कब सम जैबि,  आनक डेस श्रम बेँचे कुछ कर्ना सपना डेख्टि बटुँ मै।  गरिबन्के सपना सपना रैह्जाइट् कबु सफल नै हुइट्,  टबु फेन सपना डेखक् नै छोर्के जिन्गिसे लर्टि बटुँ मै।  कैलारी–२ बसौटी, कैलाली

छिनार जन्नि

छिनार जन्नि

१३०५ दिन अगाडि

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१९ चैत २०७९

सोम डेमनडौरा पन्ज्रक घरम ढोल डमैया बाजटह । भख्खर एक घचिक हुइल् रहिन् डुल्हि पठैलक । उह मार सुनसान हस् फे हुइटह । उह ब्याला अचानक गेलगेल्ह्यँट् घ्याँचा बोल्लक आवाज सुन्ठि चिल्रहान बर्कि । हड्बडैटि डौर्ठि बनघुस्रान घर । झन्न अउर जे फे सुन्ल रल्ह ट बचा डर्ल ।  छिहट्टर बर्सक बुह्र्वा लस्रिम झुल गैल रह । लबरुक यि टेस्रा फ्यारा हुइटिस् मुव गैलक् । बनघुस्रान घरम बरा लम्मा समयसे झग्रा हुइटि आइल् बाटिन् । टर्ना भ्वाज करल् एक बरस पाछ असिन समस्या बझ्टि बाटिन् । हुँकन्हँक टिनठो छावा छावा बाटिन् । लबरु टिन नट्यनक बुबा हो । उह जमानमसे लबरु पावरवाला ठुल्का चश्मा लगाइठ् । चश्मा कानम निअँट्कना हुइलक ओर्से डोर्या कस्ल रहठ् । वाकर जन्नि बिट्लक फे दश बरससे ढ्यार हो चुक्लिस् ।  लबरु भख्खर चार बरसक रह, टबसे आपन बाबक सँग आपन किसन्वक गैया चह्राई जाए । कुछ भारि हुइल् ट आपन किस्नान् घर भेंरउह्वा लगा डेलिस् बाबा । हुँक्र डुनु जे गैया भेंरी सँग चह्राई लग्ल ।  ऊ आपन डाइ बाबक् मैया ढ्यार बरस् पाइ नि स्याकल् । भख्खर ट १४ बरस्क हुइल् रह, वाकर डाइ बाबा पालिक पाल्या संसार छोर्डेलिस् । गैया भेरिनक सँगसाथले सयान हुइल् लबरु ।  लबरुक भ्वाज उह किसन्वा कर्डेलिस् । लववँर्या फे टुवर रह । लान्क परछ् डेलिस् । बहुट बरस् पाछ हिँकन्हँक एकठो छावा हुइलन् । मलिक्वक गारी भुवा, रोग भुँख, बट्ठा सारा भुलागैल छावा पैलकम ।  लबरु एकचो एक बगाल गैया लेल आइटह । गैया कर्यैना जुन हो गैल रह । डख्खिन ओंर्से भुर्वा महलिक मलिक्वा आइटक ट्याक्टर लेल । कैयौचो टिं टिट् पारल् । लबरु हालहाल गैया भगैना कोसिस करल् । मने गैया पान्जर नि लागठ् ।  ओहोर भुर्वा मलिक्वक् झ्वाँक उठ् गैलिस् । लबरुक कल्लर पक्रठ् । ट्याक्टरम बैठाक एक हाँठ्ले घुस्सा लगैटि लैजाइठ् । बिचारा लबरु मुन्टा कन्ढम अँट्काक हाँठ जोर्ल पलि रहठ् । पावरडार चश्मा डगर मुलुर मुलुर हेर्टि रहठ् । मलिक्वा आपन कोठर्वम लैजाक चप्काले मन्का पिटठ् । पिट्वा पाइल बिचारा बल्जब्रि घर पुगठ् । एक महिनासम् मजासे वाकर आंग नि टंग्रल रहिस् ।  लबरुक छावा बागलुङ्गसे कमाक भख्खर आइल् रठिस् । कमाक अइलक राट लबरु गहिँक्क पिटावा पाइल् रह आपन छावासे । हुइना ट इहिँसे पैल्ह फे डु चो पिटावा पा स्याकल् । टर यि फ्यारा बहुट नि मजासे लछार पटार कराक पिटावा पाइल् रह । नट्या आक बचैलिस् । वाकर पर्गा लगुइया एकठो उह नट्या बाटिस्, जे आपन बुबक जिना आस बह्राइस् । लौंरा आपन बाबाहँ कह फे– अट्रा बुह्राइल बुबा ह का कर मठ्र्या कैक ।  “छावक ठे कहठ् कि ससुर्वा डब्वाट अइठ हुँ । मै अट्रा बुह्राइल मनै, मुना डिन आ स्याकल् मनै, आपनअ पटोइह्य असिक कसिक कर स्याकम भैन ? म्वार छावा महि बिन पुछ्ल आपन जन्निक बाटले महि मार लागठ् । महि काट डेम कल रह । उह मार, कटावा पाइल् से ट अपन्हे मु जैम कना लागल् ।” ऊ डिन बहुट नि मजासे गर्याक आपन बाबा पिटल रह घुमल्या ।  “कुक्कुर हुइट्या टैं । बाबा रट्या ट असिक कर्ट्या ? म्वार जन्नीहँ कहाँ छिन्ड्राइट् डेख्ल्या ? आपन पटोइह्य टैं असिन सोंच्ठ्या ? आभिन् ट टैं अपन्हे गैल् रह्या हुँ म्वार जन्नी हँ डाब । लाज सरम नि हो ट्वार, आपन पटोइह्यसे असिक कर खोज्ठ्या ?” लबरु बुह्वक बोलि फे नि अइठिस् । आपन छावा असिक आरोप लगाक पिट्लकम । बल्जब्रि मुह खोल्क कह ख्वाजठ् ।  “मै कुछु नि कर्ल हुँ छावा ।” “आभिन कुछु नि कर्ल हुँ कठ्या ?” घुमल्या एक लाट गमसे डिहठ् ।  जन्नी हालहाल घुमल्या ह पक्र अइठिस् ।  “ना मारो अट्रा बुह्राइल् बाबाहँ । असिक ट नि कर्ना हो ।” “डेख्ल्या ! टैं असिक कर्लसे फे ट्वार पटोइह्या टुहि कट्रा मैया करठ् । आबसे सुढर जाइस् । जट्रा जिना बा, जसिक जिना बा जि ल्या । उ घरक भ्वाज ओराई ड्या । ट्वार अन्टिम दिन रहि । ट्वार मुँरि काट्क ट्वार ग्वारम ढर्डिहम् । ज्या ज्या घिंच्ना इच्छा बा घिंच डार ।” लबरु बिचारा भगवान् बाट कि नि हुइट कनाहस् लग्लिस् । कौन जुनीक पाप काट परटा कनाहस् लग्लिस् । छुटिहँसे भेंरी गैया चर्हैलक, छुटिहँम डाइ बाबा बिट्लक । आब आक आपनअ छावासे पिट्वा पैना, पटोइह्यसे हेलहा करावा पैना, यि का करम् हो भगन्वा कैक स्वाँच ।  हुइना फे हो, वाकर पटोइह्या कब्बु फे मजासे खैना पिना नि डेलिस् । छावा पटोइह्या सिकार लन्लसे हड्डिहा, ग्वारा मुन्टा वाकर लाग छोर्डिहिस् । कबु काल ट उहिँका भाट फे नि पुगिस् । कैयो राट ट भुँख्ल घरिक सुइ कटाइल् ।  लबरु स्वाँचल्, आपनअ छावासे कटावा पाइल्से ट मै गर्झुल् मुजैम् । म्वार छावा का जे पाप काम करि । बस् इह कारनले लबरु लस्रिम झुल गैल् रह ।  ड्वासर डिन केस बरघर्यन ठे पुगल् । बर्का बरघर्या बुह्र्वा सुनसान ठाउँम लैजाक अकल्हे बैठाक गँरझुल् मुव गैलक कारन पुछ्ल ।  घुमल्या एक घरिक भल्भल्ह्यँट आँस गिराइल् । फेर कट्कटाइल् गम्छाले आँस प्वाँछल् ।                                                                                                                                     खिस्साकार सोम डेमनडौरा “का कर्बो भैन । म्वार करम अस्ट फुटल् रह काहुँ । आपनअ छावा पटोइह्यनसे पससे ज्याडा घिनावा पैनु । पिटावा पैनु ।” बरा लम्मा साँस लेटि लबरु बट्वाइ लागल्, “हेरो भैन, म्वार पटोइह्यक ठे अउर मनै अइठ । म्वार छावा बाहर कमाइ जैटि कि हिँक्र अइठ । मै आपन आँखिक सामने डुचो भेटा गैल बाटुँ । पटोइह्या महि ढम्क्याइल् फे आपन छावक् ठे ना बटाइस् कैक । कहुँ बाट खुलि ट जिन्डा नि रब्या कैक कहल् ।  आपनअ पटोइह्या म्वार घरम असिक करबेर महि मजा लागि भैन ? टबहँसे म्वार पटोइह्या महिका ड्याख नि स्याकठ् । म्वार छावक् ठे उल्टा उल्टा बटा डिहठ् ।” “मतलब ?” “छावक ठे कहठ् कि ससुर्वा डब्वाट अइठ हुँ । मै अट्रा बुह्राइल मनै, मुना डिन आ स्याकल् मनै, आपनअ पटोइह्य असिक कसिक कर स्याकम भैन ? म्वार छावा महि बिन पुछ्ल आपन जन्निक बाटले महि मार लागठ् । महि काट डेम कल रह । उह मार, कटावा पाइल् से ट अपन्हे मु जैम कना लागल् ।” १९ चैत २०७९ । जोतपुर, बर्दिया  

पहिला अन्तराष्ट्रिय थारु सम्मेलन सुुरु

पहिला अन्तराष्ट्रिय थारु सम्मेलन सुुरु

१३१९ दिन अगाडि

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६ चैत २०७९

टिकाराम चौधरी बर्दियाके ठाकुरबाबा नगरपालिकामे पहिल अन्तर्राष्ट्रिय थारु सम्मेलन शनिच्चरसे सुरु हुइल बा । थारु अन्तर्राष्ट्रिय महासभाके आयोजनामे नेपाल तथा भारतके थारु अगुवा, नेता तथा बुद्धिजीविहुकनके सहभागितामे ठाकुरबाबाके सिंहबाहीनी खैल मैदानमे प्रथम अन्तर्राष्ट्रिय थारु सम्मेलन हुइल हो । उदघाटन कार्यक्रमके प्रमुख अतिथि पुर्व शिक्षा राज्यमन्त्री तथा थारु नेता तेजुलाल चौधरीसे नेपाल भारतके थारुहुकनके पहिल नेपाल जमघट हुइल बटैलै । थारु समुदाय आघे बह्रेक लाग एकजुट हुई पर्ना बटैलै । कार्यक्रममे बोलुइया थारु समुदाय अभिनफे राज्यके टमान निकायमे पहुच पुगे नइसेकल अवस्था रहल ओरसे आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक क्षेत्रमे आघे बह्राइक लाग सक्कु थारु समुदाय एकजुट हुइना पर्ना आवश्यकता रहल बटैलै । अब्बेफे थारु समुदायसे राज्यसे अपेक्षा करल अनुसार न्यायोचित स्थान ओ अवसरसे वञ्चित हुइटी रहल अवस्था ओरसे थारु समुदाय एकमत हुके थारु संगठनहे बल्गर बनैनाके कौनो विकल्प नइरहल बटैलै । नेपालमे थारु समुदायके लाखौके संख्यामे बसोबास रहलेसेफे राजनीतिक तथा प्रशासनिक क्षेत्र न्युन सहभागिता रहल ओरसे थारु समुदायके राज्यसत्ता संचालनमे पुगे नइसेकल अवस्था औल्यइलै । नेपालमे अभिनफे तराई क्षेत्रमे थारु समुदायके बाहुल्यता रहलेसेफे स्थानीय तहमेफे बल्गर उपस्थिति हुई नइसेकल हो । यी मध्य झन् थारु महिला झन पाछे रहल कार्यक्रममे बोल्न महिलाके कहाई रहे । नेपालमे थारु महिला नगरप्रमुखमे दुई जाने केल रहल बा । महिलाहुकनहे राजनीतिक दलसे चुनावके बेलामे टिकटसम नइडेहल ओरसे यैसिन अवस्था सिर्जना हुइल सुरङगा नगरपालिकाके नगरप्रमुख गीता चौधरी बटैली । महिलाहुकनहे टमान क्षेत्रमे पाछे पारल बटैली । कार्यक्रममे बोलुइया बक्ता सक्कु जे थारु संगठनहे बल्गर बनैनाके विकल्प नइरहल बटैलै । कार्यक्रममे बारबर्दिया नगरपालिकाके नगरप्रमुख छबिलाल थारु कार्यक्रमके सफलताके शुभकामना डेटी थारुहुकनके सबसे पुरान संस्था थारु कल्याणकारिणी सभाहे समन्वय करल हुइलेसे आउर ब्यापक सहभागिता जुटाई सेक्ना सुझाव रख्लै । ठाकुरबाबा नगरपालिकाके नगरप्रमुख तिलकराम लम्साल अन्तराष्ट्रिय स्तरके प्रथम कार्यक्रम अपन पालिकामे धारके ठाकुरबाबा नगरपालिकाहे चिन्हैना सुनौलो अवसर प्राप्त करल बटैलै । कार्यक्रमहे अपने ओ पालिकाके ओरसे हरेक दृष्टिकोणसे सहयोग कैना तयार रहल बटैलै । सम्मेलनमे नेपाल तथा भारतमे बासोबास कैना थारु बुद्धिजीवि तथा थारु अगुवाहुकनके सहभागिता रहल बा । थारु समुदाय मिलके हम्रे ढेर पाई सेक्बी कना नाराके साथ ठाकुरबाबा नगरपालिका १ सिंहबाहिनी खेलमैलानमे सुरु हुइल सम्मेलनमे पहिल दिन उदघाटनके कार्यक्रम हुइल बा । दुसरा दिन थारु समुदायमे रहल टमान मेरिक सवालमे वृहत छलफल कैना कार्यक्रम रहल आयोजक जनैले बा ।   कार्यक्रमके उदघाटनमे कार्यक्रमके शुभकामना मन्तब्यसंगे थारु परम्परागत टमान मेरिक साँस्कृतिक प्रस्तुती तथा थारु राष्ट्रिय कलाकारहुक्रे अपन कलाप्रस्तुत करले बटै । थारु अन्र्तराष्ट्रिय महासभाके अध्यक्ष दीपप्रसाद नारायण थारुके सभापतित्वमे हुइल कार्यक्रममे भारत तथा नेपालके अगुवा नेता तथा बुद्धिजीविहुकनके सहभागिता रहल बा । अटवारके रोज थारु समुदायके सवालमे विविध छलफल करटी ठाकुरबाबा प्रथम अन्तराष्ट्रिय थारु सम्मेलन घोषणा पत्र जारी करटी सेक्ना आयोजक जनैले बा ।