सुशीलके नजरमे सर्वहारी

सुशीलके नजरमे सर्वहारी

२८५ दिन अगाडि

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४ माघ २०८२

जोहारी वकिलः थारु समुदाय ओ समयके पदचाप

जोहारी वकिलः थारु समुदाय ओ समयके पदचाप

२९९ दिन अगाडि

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१८ पुष २०८२

                                             नियमित मोर्निङ वाकके संघरिया दिलबहादुर चौधरीसे जोहारीलाल (पत्रिका हेर्टि)  सामाजिक सन्जाल आज्कल सुचनाके बरवार माध्यम बनल बा । इहे क्रममे २०८२ पुस ६ गते वकिल जोहारीलाल चौधरीके असमायिक निधनके खबर सामाजिक सन्जालसे मिलल् । इ खबरले मन मुर्झा गइल । काजे कि उहाँसे हम्रे संग्संग्हिक रहि । महिसे केवल एक बरसले भारि उहाँक् निधनले अपन जिन्गिके पन्ना फेन उल्टा बिल्टाके बिठ्कोर्नस मन लागल । मने इ आलेखमे अपन नाहि वकिल जोहारीके जिन्गिक फाइल खोल्नास मन लागल बा । मने उहाँसे मोर संगत कम हुइल कारन इ लेख भिट्टर गहिंर बुरनासे छिछ्लिएमे रना डर बा । उ डिन सामाजिक सन्जालके कभरमे वकिल जोहारीलालके निधनले दुःखी हुइल बहुट जाने डुचार लाइन लिख्के पोस्ट कर्ला । सामाजिक सन्जाल घम्झुल्का हो, एकघरि पहिले मनै ओराइलमे दुःखी हुइल बाट लिखि, डोसर स्टाटस होटलेम मिझनी सोखल फोटु डारि । गोह्वक् आँस गिराइ हस एक घरि दुःखी हुइना ओ केक्रो निधनसे कुछ शिक्षा लेना, कुछ प्रण कर्ना अलग अलग बाट हो । हम्रहिनसे सदाके लग विदा लेके गइल जोहारीसे का शिक्षा लेहे सेक्ठि कना प्रसंगमे इ लिख्नौटि नेंगल बा । जोहारी विसेसांक जौन डिन वकिल जोहारीलालके असमायिक निधनके खबर आइल । उहाँक बारे थाकस कैलालीके पहिलक कावा अध्यक्ष माधव चौधरी ओ मैगर संघरिया दिलबहादुर चौधरीसे फोनेम बाट कर्नु । दिलजीहे उहाँक् बारे लिख्ना अर्जि कर्लु । उहाँ जोहारीक् बारे हलि हलि लिख्लाँ, मने मन निचोरके लिख्लाँ । उहि लावा डग्गर अनलाइनमे प्रकाशित कैगैल । (इहे बिसेसांकमे फेन उ लेख समोट गइल बा) मने अट्रेमे मोर मन नै भरल । पहुरा दैनिकके कानुनी सल्लाहकार रहल उहाँक बारेम कुछ बिसेस निकारक चाहि कना मनसुवा सम्पादक प्रेम दहितहे कहलुँ । फलस्वरुप इ लिख्नौटि फेन जन्मना मौका पाइल । जोहारी आउर वकिलसे बिसेस रहिट । समाजसेवा कुट कुटके भरल रहिन । थारुपनके नारा उहाँक् भित्रि मनसे निक्रिन । आउर वकिललोग पैसेक लग किल डौरठाँ, मने उहाँ अपन समाजसे जोरल अलग वकिल रहिट । मोर चिनजान वकिलसापसे मोर पहिल चिनजान २०४५ सालओर महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पस नेपालगन्जमे हुइल हस लागठ । पाछे बेस संस्थासे कमैयन्के बारे स्थलगत अध्ययनके सिलसिलामे कैलारीमे परगा डारेबेर २०४७÷२०४८ सालओर उहाँक घर हालके जानकी गाउँपालिका दुर्गौली गाउँ पुगल रहुँ । चार दशक पहिले हुइल भेट अब्बे हुइल हस लागठ । थारु समाजहे कइसिक आगे उठाइ सेकजाइ, थाकस काजे सुटल रहठ, इहि कैसिक जगाइ सेकजाइ कना सबहस भेटमे उहाँ चिन्ता जटाइट । थारु भासाके वकालत जोहारी वकिल जिन्गिभर थारु भासाके वकालत कर्ला । थारु लेखक संघ नेपालके संस्थापक सदस्य, कानुनी सल्लाहकार, पहुरा दैनिकसे लेके बहुट संघसंस्थाके कानुनी सल्लाहकार रहिट । मने कोनो संस्थाहे उहाँहे पारिश्रमिक डेके सेवा लेहल कना महि नै लागठ । थारु भासामे पह्राइ लिखाइ हुइक चाहि कना उहाँक मनसुवा रहिन । मने पुस १८ गतेक् उहाँक रोटी भातके नेंउटा हेरेबेर नेपाली भासामे बिल्गाइल । यदि उहाँक सपना पुरा कर्ना हो कलेसे लिखाइ, बोलाइमे ढेरसे ढेर अपने मातृभासा बेल्से पर्ना जरुरि बा । सद्भाव बह्रे धनगढी बजारके सद्भावना टोलमे बैठिट उहाँ, जौन टोल कुछ डिन यहोर उहाँक् निधनले सुनसान बा । मने ढिरे ढिरे उहाँ कन्फोर मचाइ जरुर डिजे बजे लागि । माघ लग्गे बा, डिजे घन्कना डिन डुर नैहो । मने जिहिसे नियमित मोर्निङ वाक करिट, उ डिजे (दिलबहादुर–जोहारी) आब कबु नै बजि । जोहारीहे मैंया करुइया सद्भावना टोलवासी हरदम एकापसमे सद्भाव राखिट । थारु समाज पछ्रल बा टे जे फेन कहठ, मने पछ्रल समाजहे टेक्नी लगुइया, अधिकारके लग लरुइया बहुट कम मनै बटाँ । उहे टेक्नी लगुइया मध्ये उहाँ एक रहिट । उहाँक परिवारके सदस्यलोग फेन आब उहाँक सहयोगी भावना, समाजसेवामे चिल्वास राखक चाहि । जिहिसे उहाँक आत्मा सम्मान पाइन् । समयके ख्याल धनगढी पुगेबेर मै विशुद्ध पहुनि किल खाइ नै जैठुँ । कुछ न कुछ अध्ययन, कार्यक्रममे सहभागिताके सिलसिलामे मोर पौलि ओहोर खर्कल रहठ । थारु लेखक संघ नेपालके केन्द्रिय अध्यक्षके नाताले उहाँ दर्ता हुइल संस्थाके वार्षिकोत्सवमे सबहस बरस पुग्ठु । धनगढी गइलबेला वकिलसापसे औपचारिक कार्यक्रममे होए या अनौपचारिक जरुर मुलाकात होए । उहाँ समयके बहुट ख्याल कर्नाहा रहिट । बलाइल समयमे पुग्ना उहाँक बान रहिन । समयके सम्मान करक चाहि कना उहाँसे सब्जे सिख्खा लेहक चाहि । विडम्वना कालभैरव उहाँहे पो असमयमे बलाके लैगैल । थाकस ओ जोहारी वकिल जोहारी बिटल डिन जोहारी, थारू नागरिक समाजके दिलबहादुर चौधरी, अपनसहिट फोटु डारके फेसबुकमे पुरान संझनाबारे थारुवान डटकमके सम्पादक मदन चौधरी लिख्ले बटाँ, ‘धनगढी निवासी अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरीको असमायिक निधनले दुखित बनाएको छ । उहाँ थरुहट मुद्दाका लागि मात्र होइन, धनगढीका थारूहरूको कानुनी सल्लाहकार पनि हुनुहुन्थ्यो । बैकुन्ठ बास होस् । डिजे अर्थात् दिलबहादुर– जोहारीलाल गु्रपसँग मर्निङ वाक र चिया गफ गरियो । यसअघि नै यो गु्रपसँग प्रभावित भएको म धनगढी पुगेर साक्षत्कार गर्ने अवसर खेर फालिन । उहाँहरूको रेगुलर बहसमा आजको मुख्य विषय रह्यो थाकस । थाकसको विकासमा युवाहरूहरूको सहभागिता अनिवार्य भइसकेको निचोड निकालियो । तर, के थारू युवाहरू थाकसको नेतृत्व गर्न तयार छन त ? वा उनीहरूलाई नेतृत्व सुम्पिन अहिलेका पदाधिकारीहरू तयार छन् ? बहस गरौं ।’ अइसिक डिजे गु्रपमे उठल बाटहे पत्रकार मदनके उठाइल मुद्दा जेनजी आन्दोलनके प्रसंगमे एकदम समसामयिक बा । थाकसमे ठँरिया (युवा) लोग नै आइटसम थारु अधिकारके बाट जोन रुपमे उठे पर्ना हो, नै सेकि । जोहारीके भित्री चाहना पुरा हुइ नै सेकि । जोहारी बिटल डिन थाकस महामन्त्री मिनराज चौधरी फेसबुकमे लिख्ले बटाँ, ‘सार्हु अधिवक्ता जोहारीलाल चौधरीके कानुनी सेवा तर्फके विज्ञता, अनुभव, सामाजिक सेवामे समर्पित सालिन भद्र जीवन शैली हमार समाजके लाग हरदम प्रेरणा बनल बा ।’ कोनो मनै बिट्ठाँ कलेसे कुछ डिन सम्झबो ओ बिस्रा डर्बो । ओइनके प्रेरणाहे जिवन्तता डेहक लग समाजके टरफसे फेन कुछ करे परठ । जे जिन्गिभर समाज समाज कहटि डौरटा, समाजके भलो चिटाइटा, ओकर योगदान उ बिट्ले पर फेन नाइ बिस्राइक चाहि । जोहारीहे हरदम सम्झक लग उहाँक् नाउँमे पुरस्कार स्थापना होए, अक्षय कोष खडा होए । थारु अधिकारके वकालत करुइयनहे परटेक बरस उहाँक् पुन्य तिथिमे उ पुरस्कार डे जाए । यम्ने परिवारके सहयोगके साठ साठे थाकसके फेन होस्टेमे हैसे रहे कना मोर अर्जि हो । थाकस महामन्त्री मिनराज चौधरीजि, फेसबुकमे डुचार लाइन लिख्के अपन जिम्मेवारि पुरा हुइल ना ठानि, थाकस केन्द्रसे जोहारीके सम्झनाहे जिवन्त राखक् लग कुछ पहल करि । आबक लग थाकस कैलाली यकर अग्वाइ करे । पहिलक काबा अध्यक्ष माधव चौधरी इ मामलामे ढेर चिल्वास डिंट । मै धनगढी ओल्हैनासे पहिले अक्षय कोष बनल सुखद समाचार सुने मिले, उहाँ गइल बेला कोषके अग्वनसे भलाकुशारी होए, इहे मनसुवा बा । जैटि जैटिः इ लिख्नौटि निम्जाके जैटि जैटि उहाँसे करल वादा जरुर पुरा कर्ना मन बा । धनगढी गइल बेला जोहारी वकिलसाप महि ढेर फेरा अपन घर चाय पियक बलैलाँ । मने डोसर बेर अइम कहटि निप्चटि गइलुँ । समयके लेखा आज उहाँ सदाके लग निपुच गइलाँ । ओ, वकिलसाप अपनेक रस्टि बस्टि रहल ठाउँ जौन रोज मै अइम्, चायक पहिला गिलास अपनेक डुवारिक उठैम । सुगरके बेरामि जरुर उहाँ चिनि डारल चाय नै पियठुइबि । करिया चाइ, उ फेन बिना चिनिक चियर्स कैके पिना अपनेनसे वादा रहल । अपनेसे हलि भेट हुइना डरले चिनि डारल चाय नै पिना अज्कलेसे अभ्यास करटुँ । जय गुर्वावा । सिर्सक परिवर्तनः, साभारः पहुरा दैनिक, १८ पुस, २०८२ https://pahura.com/2026/01/43793/

जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

जोहारी वकिल साप, आब कबु नाइ बजि ‘डिजे’

३०२ दिन अगाडि

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१५ पुष २०८२

डाहिन पाँजर जोहारीलाल चौधरी (उज्जर बुसट), हुँकार छेउमे लेखक दिलबहादुर चौधरी (फुट्र्यार बुसट), थाकस कैलाली पूर्व काबा अध्यक्ष माधव चौधरी लगायट मोर्निङ वाकपाछे चायके क्रममे । ‘बाबा टैं का करटे ?’  ‘कुछ नाई, अस्टे बैठल बाटुँ, टीका भाइसे बट्वाइटु’ मै छावाहे जवाफ डेनु ।  ‘जोहारीक बारेम कुछ पटा पैले बाटे ?’  ‘नाइ टो’ मै कनु ।  ‘बरा गरु बाटैं कना बाट आइटा । पंकज फोन कर्ले रहे, अस्पतालमे बाटैं हुँ ।’  पंकज मोर भान्जा, वकिल जोहारीक भटिजुवा (बरापुक बर्का छावक् छावा) गाउँसे फोन कर्ले रहैं । मै साँझके धनगढी–५, जाईंके बिश्राम राईस मिलके संचालक टीकाराम चौधरी भाइसे मिलमे रहुँ । सँगे कैलारी–५, पवेरा स्कूलके मास्टर सुरेश चौधरी ओ कैलारी गापाके कृषि अधिकृत मैया चौधरी रहि । हमरे घर ब्यबहार, सुख्ना डुख्नाक बाट करटिही । इन्सेक संस्था छोरल पाछे, धनगढी अइलेसे मोर उठबस ढेरजैसिन टीका भाइ, थरुहटवादी नेता खडक चौधरी, शेरबहादुर चौधरीसे हुइठ । छावा पुछ्टी कि मोर चौंकस मन भोहर हो गिल । ‘ठिक बा, मै आइटुँ कनु ।’  छावक फोनसे पहिले सुरेश सर कह सेक्ले रहैं, माइती नेपालके जिल्ला संयोजक शिवचरण चौधरीसे भेट हुइल रहे । ‘जोहारीक का हुइठ ? कहुँ लहाइ जैना खबर ना आए’ कना चिन्ता ब्यक्त करटहैं । शिवचरण मोर गवँलिया, डाडुक साला ओ जोहारी वकिलके सार्हु । शिवचरणके चिन्ता ब्यक्त, भैनेक फोन कराईसे लागल कुछ गरबर बा । मै हाल्हल नास्ता ओर्वैनु । ‘अपनेहुक्रे बैठी, मै एकचो अस्पताल पुगम कनु ओ बिदा लेनु ।’   अस्पतालके चक्कर बेरी जुन हो गिल रहे, भान्जा बिनय (जोहारीक छावा) हे फोन कर्नु, ‘कहाँ बाटी भान्जा ?’  ‘नवजीवन अस्पतालमे बाटुँ मामा’ जवाफ आइल ।  छावै लैके नवजीवन अस्पताल पुग्नु । डुनु भान्जा (जोहारी लालके छावाहुक्रे) बाहर रहैं । मिहिन डेख्टि कि डुनु जे सेवा लग्नै । उ सेवा फे असहज लागल । भोहर मन, उदास बाटाबरनमे लेहल डेहल सेवा कैसिन रही ।  ‘वकिल साप कहाँ बाटैं ? अवस्था का बा ?’ पुछ्नु ।  ‘अस्टे बा मामा, भेन्टिलेटरमे बाटैं । विश्वास कम बा, मने रातके घरे कहाँ लैजिना हो, यिहैं रहब ।’  एकसिर्टे अन्ढार लागल, आँस गिरे लागल । भान्जक सँघरियै भान्जाहे संझाइटहैं । ‘ओइसिन कुछ परी, सहयोग चाही टो कहिस, बटाइस, खबर करिस, हमरे बाटी ।’ मने मै किहु नाइ डेख्नु, मोर लाजभास हेरागिल । बहुट रोक्नु, आत्मा नाइ मानल, मुह फोरडर्नु । अपनहे सम्हर्नु ओ कनु, ‘मै भेट करे चाहटुँ, भेट करे नाइ मिली ?  ‘अब्बे टो नाइ मिली मामा, भेन्टिलेटरमे बाटैं’ भान्जा कनै ।  टब आउर रोइनास लागल, मने रोक लेनु । ‘ठिक बा भान्जा, अब्बे भेट करे नाइ मिली टो काल्ह अइम’ कनु । बिदा लैके नेंगटिही कि आवाज आइल, ‘जोहारी लाल चौधरीके के बा ?’ भान्जा कहनै ‘हमरे बाटी ।’  शायद अस्पतालके कारिन्दा कागजमे सिग्नेचर कराई आइल रहैं । ओइनसे कनु ‘मै भेट करे चाहटुँ ।’ ओइने मिहिन भेट कर्ना अनुमति डेनै । भिट्टर जाके हेर्नु । ढकढिउरा भर चलटेहे, शायद भेन्टिलेटरके जरियासे फे हुई । चिक्कन रहल बेला सडा डिन बिहाने नेग्ना सँघरियक आजसे आवाज बन्द हो गिल रहे । फेन आँस गिरे लागल । मै अवस्था पुछ्नु । स्वास्थ्यकर्मी बाबु कली, ‘अब सम्भावना बिर्कुल कम बा ।’  का बा हजुर हालखबर ? गाउँसे धनगढी आइल डिने (पुस ३ गते) वकिल साप महि फोन कर्ले रहैं, “का बा हजुर हालखबर ? कहाँ बाटी ? कब भेटघाट हुई ?”  ‘मै घरहीं बाटुँ, आजी अइनु । समय मिलाके अइम, भेटघाट करम’ कनु । सोच्ले रहुँ, सुख शनिच्चरके भेट करम ।  ‘ठिक बा, अफिसमे अइबी टो मोर अफिस सरगिल बा । ठिक अपोजिट, सडकके पुरुब बा’ कले रहैं उहाँ । मने सोंचल हस हुइबे नि करल । ५ गते अस्पतालमे भेट करे बलाही डर्नै । उहाँ बोलचाल हुइना टे बाटे नै रहे ।  अस्टहीं समय बरा दुःख लागठ । कुछ न कुछ खट्कठ । हुँकार कहल समय भेट करे पुगजिटुँ टो का हुइट ? लग्गेक सँघरिया फोन कर्नै, ‘मै फे समय मिलाइट रहगिनु ।’ समय कैसिन चिज हो ? जिहिन बुझे नाइ सेक्जाइठ । समयमे नाइ जाके आज भारी गल्ती महसुस हुइटा । आत्मा झक्झोरटा, कहटा ‘सडा डिन भेट कर्ना मनै, समयमे का करे नि गैले ?’ शायद हुँकार आत्मा जनाइट रहल हुई कि आब कम्टिमे फोन करडारुँ कहिके ! कुछ समय भेट हुइल, नेंगल, घुमल, बोलल, बटवाइल मनैन्हे जब अइसिन लागटा टो पीडित परिवारहे कैसिन लागट हुई ? दिदी ओ भान्जनपर का बिटट् हुई ?     कुछ समय भेट हुइल, नेंगल, घुमल, बोलल, बटवाइल मनैन्हे जब अइसिन लागटा टो पीडित परिवारहे कैसिन लागट हुई ? दिदी ओ भान्जनपर का बिटट् हुई ? मनमे मेरमेराइक बाट खेला करल । उ डिन महा रातटक निंद नाइ परल । खुर्चिल खुर्चिल करा कर्नु, कैचो टो करवटे बडल्नु । प्रकृतिके नियम फे अचम्मके बा ! जिन्गिक कोनो ठेकाने नाइ हो । काल्ह बा, आज नाइ हो । सक्कारे बा, साँझके नाइ हो ।  बहुट पुरान चिनजान वकिल (अधिवक्ता) जोहारीसे मोर चिनजान अब्बेक नाइ हो, बहुट पुरान हो । हुइना टो उ जानकी गाउँपालिका वडा न. १ दुर्गौलीक होइँ । मै लम्कीचुहा नगरपालिका वडा न. ७ हरदहनीक हुँ । मने हमार बचपना कुछ समय सँगे बिटल । पहिलेक समय, पहिले भोज, टब अगहन करैंह । दिदीक अगहनेसँगे मोर फे बिदाई हुइल रहे पर्हेक लग । स्कूल कम रहे । दर्जीवक सिअल झोला, झोलामे करिया सिलोट ओ गौखर, कन्धामे बोरा । परहाइक सुरुवात टो सरस्वती प्रा.वि. खैरहनीसे करल रहुँ । मने घरे पर्हना बाटाबरन नाइ रहे । दुर्गौलीमे गावेंमे स्कूल रहे । मै उहैं कक्षा १ से परहाईहे निरन्तरता डेले रहुँ । मै एकमे रहुँ, वकिल साप शिशुमे रहैं । भाटु प्रेम, बिहारी मिहिसे एक कलास आगे रहैं । मै भूषणकुमार उपाध्याय, हेमनाथ उपाध्याय, दुर्गा बम, जिन बहादुर, बीर बहादुर, चुल्ही बहिदार चौधरी लगायतके सँघरियन सँगे पर्हुं । जोहारी, तेजरामहुक्रे सँगे पर्हैं ।  जोहारी भर टो निरन्तर कक्षा टप रहनै, कबो कबो स्कूल टप फे रहनै । ओट्रै किल नाई महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पसमे फे कलास टप रहनै ।   चिरिया चटङ्गन ढुप्पन घाममे मै, जोहारी, तेजराम सँगे घुमी । कुरहरिया (लडिया) मे लहाई । सँगे चिरैं मारे जैना, कोटाल खोज्ना काम खूब कर्ली । मने परहाईमे फे टगरा रही । हमरे कलासमे मजा रही, फस्ट हुई । पहिले ३ सम प्रा.वि. रहे । पाछे नि. मा. वि. ओ मा. वि. ओर जाइक परे । ४ कलाससे एबिसिडी सिखे परे । मै प्रा.वि. सम फस्ट हुइनु । जनता मा.वि. ४ कक्षामे पुग्नु टो लर्कनके भिरमे हेरा गिनु । एकसिर्टे सातौं स्थानमे टरे चलगिनु । उहाँ बहुट प्रा. वि. से आइल लर्का पर्हैं । पाछे १० सम पुगट पुगट थर्ड, फोर्थ फे अइनु । कलास टपरमे पहिले निर्मला बम, पाछे निर्मलक स्थान अधिबक्ता नाथुराम महतो लै लेनै । जोहारी भर टो निरन्तर कक्षा टप रहनै, कबो कबो स्कूल टप फे रहनै । ओट्रै किल नाई महेन्द्र बहुमुखी क्याम्पसमे फे कलास टप रहनै ।   वकालतके डगर मै फे कानुनके विद्यार्थी रहुँ । मने इन्टर कट्टी कि मै राजनीति (बि.स. २०४९ मे एमालेसे गापा उपाध्यक्ष) ओर छिरगिनु । मोर परहाई ओरा गिल । जोहारी सर निरन्तर पर्हनै ओ वकालत करे लग्नै । ५ वर्षे राजनीतिक अनुभव पाछे मै इन्सेक क्षेत्रीय कार्यालय धनगढी (२०५६ सालसे) अइनु । धनगढी आइल समयसे हमार फेनसे दोस्ती जम्गिल । २०६२/०६३ के जनआन्दोलन, उहिनसे पाछे हुइल थरुहट आन्दोलनमे हमार निरन्तर संलग्नता, सहभागिता रहल । मोर्निङ्ग वाक फे निरन्तर हुइल ।  आस्थाके हिसाबसे वकिल साप काँग्रेस रहैं, मै एमाले रहुँ । उहाँ पाछे स्वतन्त्र काँग्रेस हु गिल रहैं, मतलब दासतासे उप्पर हु गिल रहैं । जौन सही डेखैंह्, उहे कहैं । मै टो २०५८, ०५९ से स्वतन्त्र बामपन्थी, २०६० सालसे स्वतन्त्र नागरिक हु गिल रहुँ । मोर बोलीमे लगाम नाइ रहे । स्वतन्त्र विचार परोसुँ । अब्बे जेन जीहुक्रन गरिआइ हस टमाम नेताहुक्रे मिहिन गरिआइँह् । कतिपय नेताहुक्रे मोर हाकिमसे चुग्ली खाइँह् ‘दिल बहादुरहे सम्झा डेहो, बरा कडा लिखठ’ कहैं । बिचार परोसना पत्रिका रहे पहुरा दैनिक (थारु भासा) ओ धनगढी पोष्ट दैनिक (नेपाली भासा) । वकिल साप आपन लेखन ना रोक्बि कहैं ।  आब नाइ बजि डिजे चिक्कन रहटसम वकिल सापसे निरन्टर सँगे मोर्निङ्ग वाक कर्ली । हमार जोरी बनगिल रहे । हमरे डिजे (दिल बहादुर, जोहारी लाल) ग्रुपके नाउँसे ढेरजहन चिन्हा डर्ले रही । सक्कारे खोज्लेसे मनै सँगे भेटाइँह । मोर्निङ्ग वाकमे समसामयिक बिसयमे छलफल चले । कबो थारु चालचलन, टरट्यौहार, कबो बालबिबाह, कबो लिभिङ्ग टुगेडर, कबो प्रेममे डरार पर्लेसे उत्पन्न बलात्कार, मालपोत कार्यालयके मिलोमतोसे हुइना पास बन्धकी (राजीनामा), मिटरब्याजी कारोबार ओ ओइनके सन्जाल आदिके बारेम मजा छलफल चले । इ समस्यासे समाजहे कैसिक बचाई ? कैसिक रोकी ? थारु कल्याणकारिणी सभाहे कैसिक सक्रिय बनाई ? खूब चिन्तन मनन, छलफल करी ।  अदालतमे कौन मेरके मुद्दा ढेर आइठ ? कैसिक ईमान्दार मनै फँस्ठै, वकिल साप अनुभव शेयर करैंह् । साला भाटुक नाट, कबो कबो टो मजासे बाझी हमरे । अदालतमे कौन मेरके मुद्दा ढेर आइठ ? कैसिक ईमान्दार मनै फँस्ठै, वकिल साप अनुभव शेयर करैंह् । साला भाटुक नाट, कबो कबो टो मजासे बाझी हमरे । भाटु टो कमे कहनु, कबो कबो भिनाजु कनु । सकहुनठे नाट पकर्ना फे सोहाइहस नाइ लागे । ओम्ने फे आधुनिक मनै, थारु शब्द भाटुसे भिनाजु कना ठिक लग्ना काहुँ । मिहिन चित्त नाइ बुझ्टी कि बाझ जाउँ । कहुँ, ‘अपने वकिलहुक्रे फे टो करे सेक्ठी, मजा भूमिका निर्वाह करे सेक्ठी । मालपोत ओ अदालतहे बिग्रुइया टो अप्नेहुक्रे (लेखनदास ओ वकिल) हुई ।’  ‘अरे दिल बहादुर जी, सब काममे नाइ सेक्जाइठ, कानुनके बाट रहठ । निर्दोष मनैन् फँसट डेख्बो, मने हेर्टी रहजिबो, अइसिन अवस्था रहठ । मने मै ढेरहस मनै न्याय पाइँह् कनामे ध्यान डेठुँ । झगडा मिलैना, मुद्दा ओरवैनामे ढेर जोरडेठुँ । डुनु पक्ष जीत जीतके अवस्थामे रहैं कहना मोर जोर रहठ’ कहैं । हमरे आपसमे बझ्लेसे फे बहुट मन मिल्ना सँघरिया रही । छलफलमे टैटै मैमै करी, बिदा हुइबेर काल्ह फे निक्रेक परी ना कहके बिदा हुई । मोर्निङ्ग वाक नाइ अइना रलेसे पहिले जानकारी कराई । भिन्सहरे उठ्टी कि फोन सम्पर्क हु जाई, ‘केहरसे नेगटी ? केहर भेट हुई ?’ पुछ्डारी । फेन सँगे चल्डी । नियमित फोन सम्पर्क कर्नक कारन रहे, उ धनगढी सदभावना टोल (देवहरियाक लग्गे घर रना, मै जाई गाउँक रना । बिना फोन कर्ले, मोर्निङ्ग वाक कर्ले हमरे रहे नाइ सेकी । हमार सँगे कबो कबो अधिबक्ता सर्जुप्रसाद चौधरी फे लाग जाईंह् ।  हमरे आपसमे बझ्लेसे फे बहुट मन मिल्ना सँघरिया रही । छलफलमे टैटै मैमै करी, बिदा हुइबेर काल्ह फे निक्रेक परी ना कहके बिदा हुई । मोर्निङ्ग वाक नाइ अइना रलेसे पहिले जानकारी कराई । अज्कलिक भोज बिना डिजे सोहावन नाइ रहठ । डिजे नाइ बजैलेसे लौला लौलिनके लर्का गोंगहा हुइठ हुँ । इ लिख्नौटि लिखेबेर मोर अंग्री काँपटा, इ सोंच्के कि आब हमार मोर्निङ्ग वाकके कबु नाइ बजि डिजे ।  वकिल साप सूचनाके श्रोत सही कहुँ कलेसे मोर लग टो वकिल साप सूचनाके श्रोत रहैं । सक्कारे हुँकहिनसे हुइल टमाम छलफल मोर कलम चलैना आधार बनजाए । डिनके मेरमेराइक मुद्दा अइना, सक्कारे छलफल हुइना । लावा कानुन का आइल ? न्यायालय का निर्णय करल ? लावा नजिर का बा ? इ सब बाट मिहिन उहाँसे पटा हो जाए । वकिल सापके दोस्तीसे बहुट कुछ जानकारी मिले महिन ।                                                                        एक कानुनी कार्यशालामे प्रशिक्षणके क्रममे जोहारीलाल चौधरी वकिल सापसे टमाम थारुन हमरे सँगे मानव अधिकार सम्बन्धि तालिम फे डेली । उहाँके टो बाटे छोरी, वहाँ हजारौं मनैन् तालिम डेनै । कैलाली टो हुइगिल, कञ्चनपुरसम् ढवाही मारैंह् । बहुट सरकारी कर्मचारी फे हुँकहिनसे कलास लेले हुइहीं । उ अपन कानुन ब्यबसाय किल नाइ चलैनै, समाजहे फे ढेर सहयोग कर्नैं । हरेक छलफल, अन्तक्र्रियामे हुँकार सहभागिता रहे । खबर पाइल ढेर जैसिन् कार्यक्रम उ नाइ छोरैंह् । आउर वकिलहे कहलेसे फुर्सत नाइ हो कहना जवाफ मिले कलेसे जोहारी सरसे ढेर जैसिन ‘ठिक बा, आइक परी’ कहैं । धनगढीमे टोकल समयमे पुग्ना कलेक उहे रहैं । कुछ समय समाजके लग फे निकर्ना चाही कना मान्यता राखैंह् उ ।  लिखाईमे टप  डेख्नामे सिढा, छिहर फुहर कबो नाई बोल्ना, कामेक बाट किल कर्ना, तालिम चलाइबेर धाराबाहिक घन्टौ बोले सेक्ना हुँकार गुन रहिन । सोझ मनै कैसिक वकालत पेशा चलैहीं कना लागे मिहिन्, सायद बहुट मनैन् फे यिहे लागे । मने पेरपेर पेरपेर बोल्टी कि ब्यबसाय नाइ चलठ । ठिक भर बोल्लेसे फे मजासे ब्यबसाय चलठ कना उहाँ प्रत्यक्ष उदाहरन रहैं । डेखगिल बाट हो ।  न्यायालयमे कैसिक बहस कर्नै, हेर्ना मौका टो नाइ मिलल् । मने हुँकार लिखल मुद्दा पह्रना मौका मिलल । हाँठ डारल मुद्दाके फैसला सुने मिलल । ढेर जैसिन् मुद्दामे हुँकार पक्षमे फैसला हुइल सुने मिलल्, डेखे मिलल् । हुँकार मुद्दा पह्राई, लिखाई गहन रहिन । जस्टे कलासमे टप होइँ, ओस्टे मुद्दा बुझाई, लिखाईमे फे टप रहैं ।   २०७५ सालओरसे हमार निरन्तर भेटघाटमे ब्रेक हुइल । इन्सेकके जागिरके सिलसिलामे मै सुर्खेत लागल पाछे हमार भेटघाट पाटिर हो गिल । सुर्खेते रहल समय कोरोना आ गिल । मनैन्से मनै डरैना अवस्था आ गिल । लगट्टे मै इन्सेक छोर्नु । इन्सेक छोरल पाछे मै गाउँओर बैठे लग्नु । उ सुगरसे पीडित हु गिनै । मने कठैं छुटल घोर बुसेहला ठार्ह । धनगढी अइटी कि हमार चाल उहे रहे । बानी कहाँ छुटी । मन मिल्ना सँघरिया हुइलेक ओरसे हुई । चले सेक्नासम् हमार फोन सम्पर्क, भेटघाट हुइल करे । उ अपन खैना अपने बोकैंह् । सक्कारे चाह पिना गिलासके सादा दूध ओ अपन बोकल फलफूल खाईंह् । मै दूधके चाह ओ खास्टा खाउँ । चाहल समयमे समसामयिक बिसयमे छलफल हुइल करे । हमार दिनचर्या इहे रहे ।  ५५ बरस ढेर उमेर नाइ हो । नेपालीनके औसत आयु नाइ पुग्टी, सरकारी बृद्धभत्ता नाइ पैटी वहाँ बिदा हु गिनै । मै बहुट सल्लाह पटना, मन मिल्ना सँघरिया गवाँ डर्नु, ज्ञान ओ सूचनाके श्रोत गवाँ डर्नु । समाज एक हिरगर अधिकारकर्मी गवैंले बा । कानुनके ज्ञाता, परिस्थितिके बिस्लेसक गवैंले बा । प्रशिक्षक, गुरु गवैंले बा । बार अपन सक्रिय, ईमान्दार सदस्य गवैंले बा । थारु लेखक संघ अपन संस्थापक सदस्य गवैंले बा । पहुरा दैनिक लगायट बहुट संघसंस्था कानुनी सल्लाहकार गवैंले बा । वकिल सापहे बहुट मनै बहुट रुपमे फे बुझट् हुइहीं ।    वकिल साप आरक्षणसे ढेउर, खुल्ला प्रतिस्पर्धामे जोर डेइँह् । उत्पीडित जातिहुक्रे आरक्षण टो मग्ना चाही, मने ढेर जोर मेहनतमे डेना चाही कना हुँकार बुझाई रहिन् । इ राज्य हो, राज्य संरचनाहे तुरन्त भट्काई सेकजिना अवस्था नाइ रहठ् । अधिकार मग्टि कि पैना अवस्था नाइ रहठ । मागो ओ सँगे मेहनत फे करो । समाजहे सचेत बनाउ, थारु कल्याणकारिणी सभाहे निस्पक्ष ओ सक्रिय बनाउ । समाजमे सचेतना फैलाउ । मिटर ब्याजी, पास बन्धकीवालनसे बचाउ, कानुनी ठगहुक्रनसे बचाउ कहैं उ ।  घरपरिवारसे खुस वकिल साप अपन घरपरिवारसे बहुट खुस रहैं । बर्का छावा (मनोज चौधरी) हे कृषि पर्हाके संस्थामे लगाडर्ले रहैं कलेसे छोटकी छावाहे अपनेहस वकिल बनैना सोच्ले रहैं । इहे ओर्से छोटकी छावा (बिनय चौधरी) हे बिबिएम कर्वाके कानुनी अभ्यास कराइटहैं ओ एलएलबी जोइन करैले रहैं । बर्का छावक भोज कर सेक्ले रहैं कलेसे छोटकी छावक भोज कर्ना बाँकी रह गिलिन् । छोटकी छावक फे भोज हाल्हल कर्ना चाहना रहिन् । मोर्निङ्ग वाकमे मै फे कहुँ ‘वकिल साप, छोट्की छावक फे भोज कर डारे परल ।’  छोटकी छावक फे भोज हाल्हल कर्ना चाहना रहिन् । मोर्निङ्ग वाकमे मै फे कहुँ ‘वकिल साप, छोट्की छावक फे भोज कर डारे परल ।’  ‘अरे कहठुँ कि । कहट कहट हैरान बाटुँ । सम्ढिनिया नाइ मन्ठैं । पोर सालेसे कहटुँ । अब असौं नाइ रे, अइना साल हुई कना सल्लाह हुइल बा’ उ कहैं ।  पाछेक घुमाई बाटचित अनुसार छोटकी छावाके भोज कर्ना ओ हुँकहिन करियाकोट लगाके अदालतमे जाइट डेख्ना हुँकार भारी चाहना रहिन, जौन अढकचरा रहगिलिन जैसिन मिहिन लागठ् । भान्जा हुँकार सपनाहे सहजे पुरा करहीं कना मिहिन विश्वास बा । मने जिन्दा रहल बेला उ डेखे नाइ पैनै, अटरै हो । करिया कोट लगाके अदालतमे पुगल दिन सायद पितृदेवके रुपमे उ स्वर्गसे हेर्हीं कनाअस लागठ ।  ओरौनीमे जोहारी संघारीसे बिटाइल मोर उ सुनहरा डिनके बाट कबु नाइ ओराइ । आबक लग इ लेखके ओरौनीमे अटरै कहुँ, मनैक जिन्गी हो । आज बाटी, काल्ह नाइ हुई । समयहे रोके सेकेवाला कोई नाइ हो । हमार डगरा फे उहे हो । एक डिन सब्जे जैहिक परी । सँगे सुटट्, उठट्, नेंगट्, घुमट्, बोलट्, बटवाइट् मैया मोह अइसिक बाझ जाइठ कि लागठ हुँकार बिना कैसिक जिअम । मने जिहिक परठ । जिउ चाहठ मै ना मरु, मने मरे परठ । इहे सत्य हो । सत्य इ फे हो कि बुर्हाइल मनै जैठैं टो ठोरिक कम दुख लागठ । लर्का, ठँरिया बठिनिया जवान मनै जैठैं टो ढेर दुख लागठ ।  सत्य इ फे हो कि बुर्हाइल मनै जैठैं टो ठोरिक कम दुख लागठ । लर्का, ठँरिया बठिनिया जवान मनै जैठैं टो ढेर दुख लागठ ।  मनैन्के कुछ न कुछ ईच्छा, चाहना अढ्कचरा रहजाइठ । महा बिद्वान रावणके फे कुछ सपना अढ्कचरा रहगिल रहिस । कहठैं रावण समुन्दरके पानीहे मिठ बनैना, सोनमे मगमगैना बास भर्ना, बाबा मुनासे पहिले छावाहे नाइ मरे पैना नियम बनैना, स्वर्गटक जैना खोढ्ढा बनैना सपना रहिस्, जौन अढ्कचरा रहगिलिस । सपना सक्कु पुरा हुइठ कना नाइ हो । कौनो पुरा हुइठ, कौनो नाई । मने सेक्नासम हरेक लर्का अपन डाईबाबक सपना पुरा कर्ना कोसिस कर्ना चाही, अटरै हो । भान्जा हुँक्रे जरुर उ सपना पुरा करहिं कना लागठ ।  अन्तिममे बि.स. २०२७ साल कार्तिक २९ गते जन्मल बारके पूर्व केन्द्रीय उपाध्यक्ष, थारु लेखक संघके संस्थापक सदस्य, समाजके हिरगर खम्बा, अधिकारकर्मी वकिल साप हमहन ठे अपन मिठ छाप, मिठ सम्झना छोरके २०८२ पुस ६ गते स्वर्गके डगरा पकर सेक्नै । जबटक जिन्दा रहैं, चिन्तासे घेरल रहैं, चलगिनै चिन्तासे मुक्त हु गिनै । हमरे कौन डिन चिन्तासे छुट्टी पैठी, पटा नाइ हो । अब चिन्तासे लर्टी, सोंचहे शक्तिमे बडल्टी हुँकार मृतात्माहे स्वर्गमे बास मिले कहना कामना कर्ना सिवाय हमारठन् बिकल्प नाइ हो । अलबिदा ! वकिल साप अलबिदा ! ! अपनेहे लाख लाख सेवा, लाख लाख नमन ! ! !      

जब गोचाली सगुनहे २०३३ सालमे जेलमे छुटाइ गैलि...

जब गोचाली सगुनहे २०३३ सालमे जेलमे छुटाइ गैलि...

३०५ दिन अगाडि

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१३ पुष २०८२

भगवतीप्रसाद चौधरी २०२५ सालके अन्टिम ओर २०२६ सालके सुरुवाट सँगे सगुनलाल चौधरी सरसे सिढा रतननाथ मा.वि.नारायणपुर दाङमे मोर पहिला भेट हुइल रहे । पहिला भेटमे, अन्जान भेंटमे टिट–मिठके कुछ बाट नै हुइल । वहाँ एस.एल.सि.परिच्छा डेके शिक्षकके रुपमे मा.वि.मे नियुक्टि हुइल रहिंट कलेसे मै वहिके प्रा.वि. के मस्टरवा । ६–७ महिनाके सँग–सँगेके उठ–बाससे हमार डुइ जन्हुनसे एकापसमे बरा गहिँर सम्बन्ढ बैठल । हरेक छेट्रामे एक्के विचार ढर्ना हुइलक ओरसे हम्रे डुनु जे एक सिक्काके डुइ पाटा हस हु गइलि ।  क.नेत्रलाल, नारायणपुर मा.वि.के प्र.अ.रहटि–रहटि भुमिगट हो गइलाँ टे मै बनारस अध्ययनके लग चला गइलँु कलेसे सगुन सर बर्दिया, सेमरह्वा छारा कइके चला अइलाँ । मै बनारससे आके हेकुली प्रा.वि.के प्र.अ. हु गइलुँ टे सगुन सर फेन हेकुली दाङ धरणीधर चौधरीके घरेमे पराइवेट सिच्छक हो गइलाँ । मै फेन प्र.अ. छोरके बैबाङ पदमनाथ चौधरीके घरेम पराइवेट सिच्छक हो गैलु ।  ओहाेंर हमार संघरिया लालबहादुर चौधरीके बैबाङ उट्टर चढान खड्गवीर चौधरीके घरेम पराइवेट सिच्छक हु गइलुँ रहिंट ।  अइसिके हम्रे टिनु जाने संघरियन डोसर–डोसर घरेम लग्गु–लग्गु साँझ बिहान भेंट हुइना मेरिक पर्हाइ लागल रहि । टिन जन्हुनके ‘टिन टिखार, बरे बिखार’ कहे हस टिन जन्हुनके रहाइ बसाइ वहे आनन्ड ओ अलौकिक मेरके रहट रहे ।  यिहिसे पहिले नारायणपुर सिच्छक रहल बेर कमरेड नेत्रलाल अभागीसे सल्लाह कइके हम्रे क.महेश चौधरी, सगुन चौधरी ओ मै मिल्के थारू भाषा तथा साहित्य सुधार समिति पश्चिमाञ्चल नेपाल (गोचाली परिवार (२०२८) नामक् संस्ठा खोल्के टट्कालिन प्रशासनके आँखिक किर्किट बनल रहि । गोचाली परिवार पर परटिबन्ढ लागल । हम्रे जुन ‘कुछ रोग, कुछ भोग’के विचारसे परेरिट मनै हुइलक ओरसे पेसाके बहाना बनाके राजनिटिकसे पछरल ठाउँमे जाके कम्निस्ट विचारहे समाजमे फैलइना रहे ।  टट्कालिन सरकार परटिबन्ढ गोचाली पट्रिका परकासिट करलक बहानामे पकरके सल्यान चलान कर्टि–कर्टि बिच डगरेमेसे सगुन सरहे लइजुइया भगा मर्लस । सगुनजि भग्लग ओरसे मै फेन पुलिसके नजरमे गिर परलुँ । पुलिसके चेवामे बइठे नै सेक्के २०३३ साल बैसाखसे भुमिगट जिवन विटाइ पर्ना बाढ्यटा होके बैबाङ छोर डेलुँ  । क.लालबहादुर चौधरी घर आके घर सहेर्के बइठ गइलाँ । सगुन बिच डगरेसे भागके आके पुर्नकालिन भुमिगट जिवन बिटाइ लागल अवस्ठामे फेनसे धनगढीमे पकरवा पइलाँ । धनगढीमे जेलमे एक बरसके लग सजायके साठ साठे १२००।– (एक हजार डुइ सय) जुर्बानके सजा पइलाँ । उहे १२ सय जुटाइक लग चन्डा उठाके सगुन सरके जरिवाना टिरम कैह्के दाङ, सुर्खेत, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कन्चनपुर सालभर नेंग्लुँ ओ सेकटसम आपन ओरसे सहयोग फेन मिलल रहे । उहे सिलसिलामे बर्खाहा खेटि मचलबेर एकडिन बर्दिया मनाउके लग्गे परसेहनी गाउँ डिन बुर्वा राट पर्ना पर्ना पुग्लुँ, घरेम पैठलुँ, पानी झाउ–झाउ पर्टि रहे ।  मै भिजट–टिजट जौन घरेम पैठलुँ टे वहे घरक बुह्र्या बुडि कैह बैठलि, ‘अरे ! भैया टोहार घरेम खेटि–पाटि नै हो का ? अइसिन बरखामे खेटि कइना समयमे पहुनि खाइ अइठो ?’  मोर फेन खेटि बा जे बुडि परस्नक उट्टर डेलुँ । समय खेटिके बा, बरखा डिन अइटि बा, जेलके डिन ओरइटि बा । ओट्ठेसे चन्डा उठैना अभियान ओरा गइल । ढिरे–ढिरे सक्कु ओरसे संघरियन आपन–आपन ओरसे सहयोग कर्टि गइलाँ । सगुन छुटेबेर कन्चनपुरसे कुलवीर चौधरी, दाङसे अशोककुमार चौधरी अइना सल्लाह रहे । मै भर उहाँ छुटनासे पहिलहि धनगढी पुगल रहुँ । छुट्नासे पहिलहिसे जो जेलमे भेटघाट करे जाउँ । भेट करेबेर जेल बाहर मिझ्नि खैना एकघरि कुल छुट्टी मिलिन । समय आइलमे वहाँ आपन ठाउँ जेल बिच घुस जाइट रहिँट । सगुनहे जेलमे फेन विसेस किसिमके छुट हुइल सुनगइल रहे ।  डोसर डिन छुटना सयम आइल टे दाङसे अशोककुमार चौधरी अइलाँ । कन्चनपुरसे कुलवीर चौधरी अइलाँ । सक्कु ओरसे टिनु संघरियन जुटलि टे आपन–आपन ओरसे पैसा जुटाके जेल प्रशासनहे बुझाके करट ढरट डिनभर लाग गइल, सन्झा हो गइल ।  सगुन साल भर परसे छुटलाँ कैह्के हम्रे जब जट्रा रहि विड्यार्ठि समेट सक्कु जाने मिल्के खान पिनके बेवस्ठा मिलैलि वहि धनगढीमे । सन्झाके खानापिन कइलि, राट बसेँरा वहि डेरामे बिटैलि । कोह्रि पुलिस राटभर हमार खबर लेटि रलाँ । बिहान बासि खाके सगुन, अशोक ओ मै डेरासे निकरके धनगढी बजार अइलि । कुलवीर भर विडावारि लेके अन्गुट्टे कन्चनपुर गइ सेक्ले रहिट । सगुनहे डि.एस.पी., सिडिओ घर जइनासे पहिले भेट कैके जइहो कलक ओरसे भेट करे गइलि । अब्बे डि.एस.पी. के नाउँ महि पटा नै हो । सगुनजिहे हुँकार कलक बाट महि याड बा, उहाँ कलाँ, ‘अपनेनके सरकार आ जाइ टे फेन कर्मचारि हम्रहि रहब । हम्रहिन अपने जेल सजा कैलकमे बरा डुःख बा । यि टे हमार कर्टव्य हो । सरकारके नोेन सोझ कैलक किल हो । सरकार जौन अर्हाइ, हम्रे उहे करब । मान लेउ अपनेक सरकार अइलेसे फेन हम्रे डोसरहे असहे करब । हम्रे टे डेसमे अमन चयन कइना जिम्मा पइले बटि । अस्टक सि.डी.ओ.हे फेन भेट करेबेर हाँठमे फुलाके गुच्छा डेके सम्मान साठ सगुनहे विडाइ कइलाँ । अन्टिममे धनगढी गौरीफन्टा ओर नेंगे गइलि हम्रे टिनु जाने । गौरीफन्टा टे«नमे चर्हलि गुलरिया चलाअइलि । उहाँसे सगुनके घर बर्दियाके बारबर्दिया नपा–१० (पहिले धधवार पन्चायत) अन्टर्गट सेमरहवा गाउँ पुग्गइलि । अपन मनै भेटैला टे घरक मनै बहुट फोहैलाँ । राटभर उहें रहलि । बिहान कलवा खाके विछिया हुइटि भारत बलरामपुर पुग्लि राट वहि रहलि । वहाँ कवला खाके बलरामपुरसे कोइलावास नेपाल हुइटि गढवा आ पुग्लि । अशोक भर देउखर गढवा, मानपुर मोर घर नै रुक्के सरासर दाङ, मघही चला गइलाँ । पाछेके बिच बिचमे थारू भाषा तथा साहित्य सुधार समिति पश्चिमाञ्चल (गोचाली परिवार २०२८) के कार्यक्रममे दाङ, बाँके, कैलाली, कन्चनपुर, सुर्खेतमे फेन सगुन सरसे भेट हुइटि रहुँ । हरेक सालके बैसाख १ गटे गोचाली डिवस मन्टि रहल समयमे पटक–पटक भेट हुइटि रहि । गोचाली भरिम सबसे लग्गुक लगउटि ढार कलक अक्लेश्वर चौधरी अरविन्द (मटेरिया) सगुनलाल सेमरहवा (बर्दिया) कालीराम चौधरी (मानपुर), महेश चौधरी (बैबाङ) यि चार जाने गोचालिनसे जिन्गिभर मिठे–मिठे निवाह गइल । किहुसे फेन कलह नै हुइल । मानो एक सिक्काके डुइ पाटा हस रहल रलहि ।  अब यि ३ गोचालि अरविन्द, महेश ओ सगुन हमार सँगे नै हुइट । सडाके लग विडा हो सेकल बटाँ । ट फेन मुटुके ढकढिउरिम हरडम रटि रहिहि । हमार मन मस्टिकमे जियल रहिहि । गोचाली आन्दोलनमे लागल मोरे गाउँक् कालीरामके पुरा सफलटाके सुभकामना कर्टि यि कलम बन्ड करटुँ ।    साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, बरस ७, अंक ४, (कार्तिक–पुस) २०७३ सगुनलाल २०५८ पुस १२ गते प्रशासनसे वेपत्ता पारगइल बटाँ । शीर्षकलगायत कुछ संशोधनसहित प्रकाशित ।–सम्पादक

मेरमेरिक टलकिच्रन

मेरमेरिक टलकिच्रन

३२३ दिन अगाडि

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२४ मंसिर २०८२

                                                                                                                                                            लेखक मान बहादुर चौधरी “पन्ना” “इ टलकिच्रा लौरा कुछुबन लेह पठैबो ट कुछ टेख्बो नइकरट । उप्र ट्यारा रठिस । खोजखाज नइपर्ना, मजासे नइहेर्ना कहाँसे भेटाजाइ ? कहाँसे डेखि उन्ड्वा, उपरटेरी ।” इ कहाइ म्वार बाबक हुइटिन् । सायद उ ब्याला मै चार पाँच किलासम पह्रल हुइम ।  टलकिच्रा ठेट थारु भासक मौलिक शब्द हो । यकर शब्दिक अर्थ केराइबेर उन्ड्वा, चिप्रा, अकडेर्वा, डेख्टी डेख्टी फे नइ ड्याखलसक कर्ना, अर्थात् जरजर आँढर असक हो । जरजर आँढर कहबेर और मेरिक अर्थ लागसेकी । आँखीक आघक बन निडेख्ना, डेख्लसे फे नइडेखलसक कैक बहाना बाजी बनैनाह टलकिच्रा कैजाइट । थारु गाउँघर ओहर टिबोली मर्टी कहना शब्द फे हो इ । हमार गाउँम एकठो बन्टरान काका बाट । उहाँक सद्द आँखी टिरमिर रठिन् । निसोख्लक दिन नै निरठिन् । घरम काम करुइया जनशक्ति फे निहुइन् । भर्खर अर्ति कर जुकुर छोटछोट दुइठो छावा ओ एकठो छाइ बाटिन् । सक्कु काम जन्नीक भरम रलक कारन घरक धन्दा उसर्ना फे मुस्किल हुइठिन् । बन्टरान काका बाहरसे आइल ब्यालम गोरुबछरु, मुर्घी चिङ्ना, सुवर माकर चोच्चाइट डेख्ख खुब कल्कलैठ । “इ टलकिच्री जन्नी फे कहाँ मरगिल । बसेरा लेना जुन फे सुवर माकरिन ना खुद्रा डर्ल हो, ना मुर्घी चिङ्ना करैल हो । इ टलकिच्री टलकिच्रा लर्का फे एकठो काम फे नइडेख्ठ ।” हेरी पाठकवृन्द ! आफन उत्तरदायित्व निभाइक छोर्क जन्नी ओ लर्कन पर रिस उटर्ना इ बाबक बानी कसिन लागल ? “इ टलकिच्री जन्नी फे कहाँ मरगिल । बसेरा लेना जुन फे सुवर माकरिन ना खुद्रा डर्ल हो, ना मुर्घी चिङ्ना करैल हो । इ टलकिच्री टलकिच्रा लर्का फे एकठो काम फे नइडेख्ठ ।” मै आफन एकठो कहानी सुनैनास लागल । म्वार बनबनेट नैकुड्लक दशकसे ज्यादा होगिल रह कि का ? इ साल साउन महिनम गाउँक संघरेन सँग टावा काट जा गिलस् । गाउँसे करिब २ घन्टा पैदल न्याङ पर्ना बन्नोम निनेङ्लक ढेर दिनके बादम पुरान संघरेनसँग बन्वा जाइ मिल्लक ओहर्से लौव अनुभव हुइ कैक टावा कट्ना बहानाम जा गिल रह ।  जब बन्वाम पुग्ली, टब पानी फे महा जोरसे डर्कल । निकास लडिया भरिभराउ हो गिल । सबजन निकास लडिया टरक्ख गैगिल । मै फे टेक्नी पकर्ख टर्क टनहु । पठ्राम ग्वारा रपटगिल । झबाकसे गहिर ठाउँम अटक गैनु । सारा झुल्वा भिज्गैल । भिजल गिदारसक बन्वा ओहर लग्नु, टावा ख्वाज ।  सबजन कोइ कोहर, कोइ कोहर फरक फरक टारी नेङ्ल । मै अनसिख्वा मनै बरापुक मन्ह्ला छावासे  डख्खिन् ओहर  लग्नु । गाउँक संघरेन टावा चटाचट काट काट झ्वाला भराडर्ल । ओहोर मै जुन अक्को टावा नैडेखु । भर्खर निक्रल बाँसक टुसाम माटी लाग्खन कर्या कर्या ठेटकुरसक डेखु । मन्ह्ला डाडुह कनु– डाडु मै ट एक्को टावा नइभेटाइठुइटु जे ।  डाडु कल– “अरे भाइ कसिन ट नैडेख्ठो, टलकिच्रासक ।”  हजुर मै ट एक्को चिन्ह निसेक्ठु कनु । ऊ दिन बरा मुस्किलले दु तिन किलो टावा काट्गिल हुइ । बरापुक छावा आफन काटल टावा थपडेल ट ठनिक सुहैना भरिक हुइल ।   छोटम मामा घरक एक्ठो घटना याद आइल । मै कभुकाल मामा घर जाउँ । एकदिन अस्टह मकै निकाइ ब्याला हो । ममान घरक छुट्की माइ मामक पर गराइ लग्ली । गरैलक कारन का रह कलसे मामा मकै निकाइ व्याला भर्खर फर भिरल बोरी बुट्टा काट मर्ल काहु ।  माइ कल्कलाइटलही–“इ उन्ड्वा थारुक ढन्ढा अस्ट रठिन् । टलकिच्रा ट होगिल । हेरहार पार परठ । आँखिक आघ फर भिरल बोरी कट्ना । इ मनैन टिना रिझाइ व्याला का रिझाउँ कबो ।”   कौनो कौनो जन्नी मनै आफन ठरोक नाउँ टलकिच्रा ढर्ल रठ ट कौनो थारु मनै आफन जन्नीन्के नाउँ टलकिच्री ढैल रठ । इ ट हुइल घरायसी मामला, हजुर । हमार देशम टलकिच्रनके जमात जोहर फे बट । गहिर्ख अध्ययन कर्बी कलसे राज्यक हर निकायम टलकिच्रा भेटैबी । प्रशासनिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक हर क्षेत्रम टलकिच्रनके कमी निहुइट । आजकाल हमार थारु समाज लगायत और समुदायम आफन धर्म संस्कृति छोर्ख, और क्रिश्चियन धर्म मान भिरल बाट । हुइना ट धर्म निरपेक्ष देशम धार्मिक स्वतन्त्रता बा । हर मनैन आपन इच्छा अनुसार धरम संस्कृति मान पैना अधिकार बा, तर आफन मानल धरम संस्कृतिके बहुट बखान कर्ना आनक भरि कुव्याख्या कर्ना संघरेन डेख्क दङ्ग पर्ठु । आपन चल्टी आइल धरम संस्कृति भित्तरके निमजा पक्षह सुधारक छोर्क आनक धरम मजा हो कना मही निलागट । थारु संस्कृति ठिक निहो थारु धरम मानु ट खुबसे बोक्सिन लागट । आजकाल क्रिश्चियन धर्म मान्नु ओठसे बोक्सिन नैलग्ठ कना बखान कर्ना मनैन्के कन्पट्टीम चराट पर्नास मन लागठ । असिन व्याख्या कर्ना मनै जात्तिक टलकिच्रा हुइट । और डोसर मेरिक कहानी जोर्नास मन लागल । आजकाल हमार देशक लाखौ युवा विदेश गिल बाट । हमार गाउँमसे केल करिब एक दर्जन युवा विदेश कमाए गिल बाट ।  जिबलाल भर्खर भ्वाज कैल रह बोप्रा । बठिन्या जन्नी छोर्ख किही जैनास मन लागी, विदेश । तर बाध्यता, आफन घर पर्यारके आर्थिक गर्ज टर्ना ओ कुछ कमैना हिसाबसे दक्षिण कोरिया गैल रह । गैलक एक बरस नै पुगल रलहिस् कि का यहर लौली जन्नी डुसर छिमेकी गाउँक बुह्र्वासे सिलिग गिलिस् । विदेससे ठरोक पठाइल रुप्या मनरख्नकम उराइ लागल । आब का लेबी । मिलघस बहर्टी गिलिन् । सौतमुर भटरसे ठर्वा ले मर्ली । इ घटनाके प्रतिकृया डेटि धरकटान बुबा कल–“अट्रा मजा घरबार रटि रटि फे दु दुठो लर्कक् बाबासे हरबरा परल टलकिच्री ।” धरकटान बुबा कल–“अट्रा मजा घरबार रटि रटि फे दु दुठो लर्कक् बाबासे हरबरा परल टलकिच्री ।” पाठकवृन्द ! आब मै अप्नेक हुकहन आजसे ११ बरस आगेक वि.स. २०७१ साउन महिनक २८ गते अइलक बह्र्याके प्रसङ्ग जोर्नास मन लागल । उ बह्र्याले सुर्खेत, दाङ, बाँके, बर्दिया लगायत कैलालीम फेन महा जोरसे धनजनके क्षति करल । असिन विनासकारी प्राकृतिक प्रकोपले सयौके ज्यान लेहल, सयौं बेपत्ता हुइल, हजारौ विस्थापित हुइल । बाढीपिडित हुकहन स्थानीय स्तरम विभिन्न संघ संंस्था, व्यापारी हुक्र आफन नाउँ मिडियाम आनक लाग एकएक पोक्री चाउचाउ, चिउरा राहत वितरण कर्ना टलकिच्रन डेख्गिल ।   ‘स्थानीय बुद्धिजीवी मुफतलालले बाढीपीडितलाई दुई पेटी चाउचाउ प्रदान गरेका छन्’ कना मेरिक समाचारप्रेमी टलकिच्रा यहाँ ढ्यारनक बाट । तर वास्तविक समस्या हल कर्ना ओहर ध्यान निडेना प्रशासनके तालफे खेचुइहेक चालम अनि बाट भर बरे बरे कर्ना टलकिच्रा सरकार ना ट कौनो व्यवस्थापन कर्ल हो ।  हमार देशके टलकिच्रा सरकार फे ओस्ट बा ।  प्रति बाढी पिडित घरम एक लाख डेना राहत रकम महिनौ समय बिटट् घरिम सम्वन्धित पिडित व्यक्ति नइपइट । टब्ब सुर्खेतके राजनीतिक दल हुक्र पिडितके नाउँम राहत संकलित रकमके दश प्रतिशत लेहल सुन्नु ट चुट्टी पकर्ख घुमा घुमा गालम चराट चराट मर्नान मन लागल । असिन ट हमार दलके नेता बाट । असिन मौकाम चौका मर्ना इमानदारिता निम्जल दल ओ नेता रलक देशम टलकिच्रनके संख्या ढ्यार बाट । नेतनके आसेपासेन डान डान पानी केल पैठल, पिडित राहत पा सेक्ल कल । जेकर घरबास निहुइन, हुकनक अबस्था जिउके टिउ बाटिन् । असिन ट टलकिच्रा राज्यक निकाय बा । अस्टख हर क्षेत्रम एकसे एक टलकिच्रा बाट ।  काम कर्नासे नाउँ कमाए खोज्ना समाजसेवी; लेखरचना कभ्बु नैलिख्ना, आनक लेखम हाँसीमजा उरैना पाठक; स्कुलिम पह्राइक छोर्ख टिउसनके खेती कर्ना शिक्षक, बिना काम निप्टैल कमिशन खाक ठेक्दारिन रकम डेना कर्मचारी, नक्कली बिल भर्पाइ बनाख बजेट निप्टैना हाकिम; राजनितिक भागवन्दाम नातपात, कार्यकर्तन केल जागिर खुओइना नेता, नक्कली समान बेच्ख पैसा असुल्ना व्यापारी सबका सब टलकिच्रा हुइट ।   बीरेन्द्रनगर, सुर्खेत  

जब समुन्डरके बिच्चे बिच हमार लाउ बिल्टल

जब समुन्डरके बिच्चे बिच हमार लाउ बिल्टल

३३२ दिन अगाडि

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१५ मंसिर २०८२

ओंरि टारेबेर २०१८ नोभेम्बरके अन्टिम अँठवार । राटके ११ बजे हमार उरान हुइलक ओरसे मैं एयरपोर्ट ८ बजे ओर पुग रख्ले रहुँ । करिब आढा घन्टा भिट्टर सक्कु संघरियन जुट गइलि । टब हम्रे भिट्टर पैँठलि । हमार पुग्ना फिलिपिन्सके ‘मनिला’ टक रहे । करिब डुइ अँठवारके बैठाइ रहल ओरसे लुगरा–लट्टा भरल एकठो सुटकेस ओ खटरपटर समान बोक्ना ‘ह्यान्ड क्यारी’ रहे मोर ठन ।  हम्रे बैडेसिक टालिम ओ अवलोकन भ्रमनमे जाइटहि । हमार जम्मा १२ जन्हुनके टोलि रहे । ओकर अगवाहि संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्रालयके सहसचिव रुद्रसिंह तामाङ कैले रहिँट । हमार ‘चेक इन’ हुइल । काठमाडौसे मनिला सोझे उडान नैहुइलक कारन हमार बिचका पराव मलेसियाके क्वालालम्पुर एयरपोर्ट रहे । क्वालालम्पुरसे डोसर चिल्गारि बडलि कैना रहे । उहे मारे सक्हुन डुइ डुइठो ‘बोरिङ पास’ ठम्हा डेहल । सक्कुजने आआपन बोरिङ पास गोझ्यइलि ओ आआपन ‘लगेज एयरलाइन्स’के जिम्मा लगाके हाँठे झोला बोक्के आगे परगा नमैलि ।  नम्मा लाइनमे बैठके सुरछ्या जाँच हुइल । ‘इमिग्रेसन’मे सक्कु कागजाट डेखैना काम हुइल । सब काम निप्टाके ‘वेटिङ रुम’मे बैठलि । चिलगारि उर्ना अभिन एक घन्टा रहे । समय रलक ओरसे कोइ गफमे गफे लागल, कोइ आआपन मोबाइलमे चले लागल । मै फेन मोबाइलसे फिलिपिन्सके बारेम जानकारि लेहे लग्लुँ ।  हमार उर्ना समय हुइल चिल्गारि ओर लग्लि । आआपन सिटमे बैठलि । एकघचि परसे चिलगारि भुइया छोरल आसमान छुअल । टिसरा मुलुक गइलक मोर पहिलचो रहे । मैं बहुट हौसल रहुँ । करिब पाँच घन्टाक उरान खाइट पियट आरामसे उर्टि मलेसियक समय अनसार बिहान करिब छ बजेओर हम्रे मलेसिया उटर्लि । वहाँ फे हमार कुछ समय बिसैना रहे । करिब डुइ घन्टाके ‘टूान्जिट’ पाछे फेन मलेसियन एयरलाइन्ससे फिलिपिन्सके मनिला ओर लग्लि । ‘तकरिबन’ चार घन्टाके उरान परसे ‘मनिला एयरपोर्ट’ पुग्लि । बाहर निकर्लि टे संस्ठक मनैं ‘ओलिभर लरेन्स’ हमार कार्यालयक ‘प्ले कार्ड’ लेले बैठल रहे । पहिले फे ओलिभरसे च्याटमे, इमेलसे बाटचिट हुइल रहे । उ फे प्रसिछ्यक हुइलक ओरसे अक्के घचि सक्हुनसे हिमचिम हु गैल । गफसफ कैटि एयरपोर्टसे ‘उर्टिगास ट्वीन टावर’ होटलमे गैलि ।  रिसेप्सनमे सक्कु संघरियन आआपन नाउँ लिखैलि । जनपट्टे एक एकठो ‘पासवर्ड कार्ड’ डेहल जिहिसे कोठक डुवार खोले सेक्जाए । मोरलग यी सिस्टम फे लावा रहे ।  मनिलाके जोँइकहा (ट्वीन टावर) होटलके ४५ औ टल्लाके डिलक्स कोठामे बैठना सुविस्टा मिलाइल रहे । जहाँसे लावा डुल्हनियाँहस सँप्रल, मनिला सहरके रमझमके नजारा हेरे मिले । बैठ्ना कोठामे चाय, कफि, चिनि, पाकेटके डुढ ढैल रहे । अस्टके सन्झाके सिहरा मेटैना डु चार बोटल बियर फे छोटमोट फ्रिजमे ढैलढराइल रहे । पँजरे फोन रहे, जहाँसे घन्टि डबाके आपन मन लग्लक चिजबिज मगाइ सेक्जाए ।  हरेक कोठाक छुटे छुटे ‘पासवर्ड’ रलक ‘सेन्सर’ लागल रलक ओरसे बैठुइया पहुना सुरक्षित महसुस करे सेके वहाँ । आपन कार्डले आपन कोठा बाहेक आउर कोठामे छिर्ना असम्भव रहे । अभिन लिफ्टमे फेन आपन बैठलक टल्ला बाहेक उ कार्डले आउर टल्लाके डुवार नै खुल्ना सिस्टम बनाइल रहे । यहाँसम कि आपन संघरियनके कोठामे छिर्ना फे महा कर्रा रहे ।  पहिल रोज हमार आराम कैना डिन रहे । उ डिन होटलमे आराम कैलि । मनिलामे टालिम फिलिपिन्सके राजढानि मनिलामे डोसर डिनसे हमार टालिम रहे । बैठना होटलसे अस्टे पाँच मिनेट पैडर पुगे सेक्ना ठाँउ आयोजक ‘लोकल गोभर्नमेन्ट एकाडेमी’के हलमे टालिमके सुविस्टा कैगैल रहे । एक डिन सैड्ढान्टिक विसय पर्हना, डोसर डिन फिल्ड घुमे जैना मेरके टालिका मिलाइल रहे । वहाँ जाके आपन खर्च करक लग पहिलहे अफिससे नगड मिलल रहे ।  टालिम कैना ठाउँमे मजा सुविस्टा कैल रहे । कार्यालयके हलमे रलेसे फेन कौनो फाइब स्टार होटलके सुविस्टासे कम नै रहे यहाँ । विग्य अनुभवि सिखुइयनसे टालिम लेके ढेर चिज सिखे मिले । सिखैना टरिका वयस्क सिकाइमे आढारित हुइलक ओरसे समय गैलक पटे नै चले ।  बिहानके कलवा, मिझ्नि, चाय पानिक लग टालिम हलके पँजरे चिटिक्क परल अस्ठाइ भन्सा बनाइल रहे । टाटुल, जुर सब पँजरहे सुविस्टा रहे । रोजडिन मेरमेरके फिलिपिनो खाना । समुन्डरके आँरि टिरके डेस हुइलक कारन खानामे समुन्डरके जिव सालमोन, अक्टोपस, जेलिफिस, झिँगा, गेक्टा, घोँघि टे सामान्य रहे । घोँघि, गेँक्टा नैखैलक आउर संघरियन ठनिक सिकसिक मानिट । मोर टे बचपनसे बान परल खाइट मजा लागे ।   फिलिपिन्सके प्रख्याट खानामसे एक परिकार बालुट हो । एक डिन परिकारके लाइनमे एकठो भाँरा भरके रिझाइल आँरा बाहरसे हेर्लेसे कबरार करिया घोलघोल्हा आँरा हस बिल्गे । खासमे उहिहे जो बालुट कठाँ । हमार सहजकर्टा ओलिभर लारियन बहुट खिटहर रहे । यि खैबो टे टागुट डेहठ, मनैनहे चोटगर बनाइठ कहल । सक्कु संघरियनहे खाइक हौस्याइल । अपने फे महा मिठके खाके डेखाइल ।  मै फे लावा चिज चिखलिउँ कैह्के उठैलुँ । एकठो उस्नल बालुट फोरलुँ टे साँचामे सिर्जल भुट्लहे बच्चा रहे । सस्मे बिलोरके सर्जेहे गच्चसे खाइ पर्ना । मै फे मुहेम डरलुँ । मने महा बिस्साइन्ढ लागल, ओक्लास लक्ना मेरिक । टुरुन्टे उगिल डेलुँ । उ डिन डिनभर जिउ सुक्सुकाइल । खासमे उ बालुट हंसक् बच्चा सिर्जल अन्डा रहे, उसिनके मिठ मानके खैठाँ वहाँक मनै । फिल्डमे घुमे जाइबेर टे जहाँ हो टहाँ उहे बालुट डेखे मिले । टब पटा चलल् कि बालुट हमार नेपालके मःम हस सर्वसुलभ सबजने मन परैना परिकार हो ।  निढरख राट एक डिन संघरियन फिलिपिन्सके राटिक जिन्गि हेरे जाइ कलाँ । मै फेन का कम, संघरयिनसंगे बेरि ओरि खाके निकर्लि । ‘मकाटी’ सहरमे ‘नाइट लाइफ’के मजा लेहे मिलठ कना बाट ओलिभर बटैले रहे । हम्रे ट्याक्सी लेके करिब आढा घन्टाके परसे मकाटी सहर पुग्लि । ट्याक्सीमसे उटरके पैडर घुमे लग्लि ।  टब्बे क्रिसमसके सिजन रहे । चारुओरे झिलिर मिलिर डिया बरल । बरे बरे क्रिसमसके रुखवा ओमहे मेरमेरिक जानवर हाँठि, घोरि, चिरैक बनाइल डिया बरल । जनावर नन्हेँ डिया फेन जिट्टि परानिहस यहोर ओहोर चलट डेखके लागे कौनो चिडियाघरमे बटि । बरे बरे गगनचुम्बि घर, ओमहे चिम्चिमियाँ डिया । बर्का चाकर सरकके आँजर पाँजर, बिच्का खालि भागमे सब झलरमलर डियाले पुरे सहर लावा डुल्हनियाँहस डख्नौस बिल्गाए । चारुओर ढिच्चुक ढिच्चुक डिस्को बाजा बजे ।  मनैनके चहलपहल डेखके राट हो कि डिन अल्गैना कर्रा । ठोरचे डुर गैलि टे ‘डान्स बार’ सुरु हुइल । हरेक बारके आगे टु पिसमे पाँट लागल एकसे एक सुन्डरिन आपन हाउभाउ डेखैटि आँख सन्क्याँइट । कोइ गफमे मस्ट, कोइ अपने अपने ठिट्ठा मारमार हाँसिट । हमार परगा आगे नम्टि गैल । आउर रकम रकमके नजारा डेखे मिलल । एकसे एक सुन्डरिनके बगाल डेखे मिल्ना । विपरिट लिंगि एकठो ठारु–जन्नि आपन आगे कामुक पहिरन ओ हाउभाउमे डेख्लेसे मोहिट हुइना स्वभाविक हो । ओइने आगन्टुक पर्यटकहे मोहिट पर्ले ।   अट्रा सुग्घर सुग्घर बठिनियन रहिँट कि मानो स्वर्गके परिलोग राटके पिरठम्मिमे विचरन करे आइल बटाँ कनाहस । उ बेर स्वर्गमे सयर करेअस लागे । ओइनके हाउभाउ हेरके लागे, मानो वहाँ यौन बजारके मेला लागल बा । जहोर जाउ कामुक मुड्रामे  बठिनिया ठह्र्याइल । उ नजारा डेखके मन नै लल्चैना सायडे कोइ रहठुइ ।  फिलिपिन्समे यौनबजार खुल्ला टे नै हो । टब्बोपर अघोसिट रुपमे यौनबजार बहुट फस्टाइल बा कना पटा चलल् । हम्रे खालि हेरे किल वहाँ पुगल रहि । घुम्ना क्रममे संघरियन कहे लग्लाँ– यहाँ टक आइल बटि टे भिट्टर फे छिरजाइ, बाहर बाहर किल का करे घुमि । सबके सहमटि अन्सार एकठो डान्सबार भिट्टर छिर्लि ।  डान्सबार भिट्रक माहोल आउर हेरे लाइक रहे । डिस्को लाइट, सेक्सि सेक्सि गाना बजटा । उहे गानक सुरमे नर्टकि कामुक हाउभाउमे स्टिलके पोलमे लटपट लटपट कैटि नाचटा । आपन गोप्य अंग भर छोप्ले, बाँकि सब अल्गट्ठे ।  डान्सबार भिट्रक माहोल आउर हेरे लाइक रहे । डिस्को लाइट, सेक्सि सेक्सि गाना बजटा । उहे गानक सुरमे नर्टकि कामुक हाउभाउमे स्टिलके पोलमे लटपट लटपट कैटि नाचटा । आपन गोप्य अंग भर छोप्ले, बाँकि सब अल्गट्ठे ।  हम्रे एकठो सोफामे बैठलि । टब आगैलाँ डुइठो लँवरियन अर्डर लेहे । सक्कुजने एक एकठो फुच्चे बियर ओ खास भुख नै लागल रहे टब्बोपर बियर छिराइक लग ओर्सि फेन्च फ्राइ अर्डर कैलि । हमार अगहवा अर्डर स्लिपमे सहि कैल । वेटर लँवरिया एकघचिक परसे खैना पिना लानल ।  ओहोर स्टेजमे आपन गानामे पालिक पाला एकसे एक सुन्डर बठिनियनके नाच जारि रहिन । वेटर लँवरियन संगे आके बैठ्ना, गफ सफ कैना टे सामान्य रहे । मने कौनो चिजमे जवरजस्टि नै कैना मजा बान । आपन जट्रा मन लागल अर्डर कैना खैना, नैमन रलेसे नाच हेर्ना ओ जैना । कुछ ठप अर्डर करे परल टे अर्डर स्लिपमे आपन सहि अनिवार्य करे पर्ना । सब हिसाब पारदर्शी रलक ओरसे ठगि हुइना डर कम ।   पहिले महि डेखके अचम्म लागल । मनेम सोचु कि का करे सहि करुवइठाँ । मने पाछे पटा चलल ग्राहकलोग बिल टिरेबेर बिल ओ सहि कैल अर्डर स्लिप मिलान कैके भुक्टानि करे मिल्ना । यि चलन महा मजा लागल । नेपालके डान्स बारमे एक हजारके खा पिके चार पाँच हजारके बिल टिरे परलक घटना ढेउर सुन्गैल रहे । लेकिन वहाँ ना कौनो बारगेनिङ, ना कौनो चिटिङ । सब चिज पारडर्सि रना प्रचलन मन परल । फिलिपिन्सके ‘नाइट लाइफ’के भरपुर आनन्ड लेके आढा राट फे टेक्सि लेके आपन होटल ओर लग्लि ।  हैदरावादी विरयानि सुरु सुरुमे टे फिलिपिनो खाना मजे लागल । डुइ टिन डिन परसे  फिक्कल फिक्कल खाना, विना टिना दालके उसिठ उसिठ भात खाइट खाइट सबके ठोँरह टुटगैल । मसलाह खैना बान हमार । वहाँ टे सब साडा, ना नोन ना टेल, ना टे मसाला । बासि, कलवा, मिझ्नि सब जुन भाटे खाइ पर्ना । ठन्चे हुइलेसे फेन भाट अनिवार्य रना चलन । विना डाल टिना अचारके उसिठ भाट किल खाके जिउ मिच्छा गैल ।  सबजने नेपालि खानाके खोजिमे रहि । नेपालि नै रलेसे इन्डियन खाना हुइलेसे फेन मसलहा चटपट खानाके खोजिमे रहि । एक डिन टालिमसे छुटके निकर्लि मसलहा खानाके खोजीमे । हमार टिम लिडर गुगलमे इन्डियन होटल सर्च कैलाँ । महराजा रेष्टुरेन्ट कना पटा लागल । टयाक्सीम करिब २० मिनेट लग्ना रहे । हम्रे सक्कु संघरियन ओँहरे लग्लि ।  गुगल नक्शाके इसारामे खोज्टि उ ठाउँ पुग्लि । वहाँ डाल, भाट टे कहाँ मिलि, परोठा, डोसा, नान, विरियानी अस्टे अस्टे रहे । हमार सबके रोजाइमे हैदरावादी विरयानी परल । मटन विरयानी, डहि अर्डर कैलि । बहुट डिनके खवासल सबजने डिल खोलके खैलि । भुखाइल मनैन खिर पाइलअस लागल ।  पहिल परोसन ठनचेचे रहे हबर डबर खाके अक्के घचि ओरागैल । बरा मिठ लागल फे ठपके पेटभर खैलि । लास्टमे बिल टिरेबेर जनपट्टे करिब २५ सय परल रहे । राम रे यहाँ अढाइ सयमे सिकार, भाट खैलक ओट्रा पैसा टे महा मँह्गा रहे । टब्बोपर खोजल स्वाड पैलक ओरसे डिल खुस हुइल । इ फे जिन्गिक सम्झना बन, एक छाकके ओट्रा मँहगा टिरगैल ।                                                                                                                                                                             लेखक शत्रुघन चौधरी जब लाउ बिल्टल एक डिन बिहाने होटलसे बासि खाके अफिसके गारिमे सक्कु जाने लग्लि समुन्डरके सयरमे । हमारसंगे संस्ठक टिन जाने स्टाफ फे रहिँट एकठो जन्नि ओ डुइ ठारु । हमार मुकाम रहे पटंगास पालम बिच रिसोर्ट । मुकाममे जाइबेर सहरसे निकर्लि टे गाउँ आइल, गाउँ डेखके पुरुबक टराइक याड आए । ठाउँ ठाउँमे टोल चेकपोस्ट ढैल, फराक सरक, सरकके डुनु पाँजर नरिवल, सुपारिक रुखवा सोनमे सोहावन बिल्गे ।  ओस्टक बरे बरे फँटवा, कहु उरुड, कहु अरहर, कहु पर्टि खेटवा, कहुँ टिना फारम, कहुँ फुलक डिहवक सुन्डर मनमोहक ठाउँ रहे । इ सारा नजारा हेरटि करिब डुइ घन्टाके नेगाइसे हम्रे समुन्डरके ढिक्वामे रलक पालम रिसोर्ट पुग्लि । लग्गु छोटमोट बजारमे आआपन लग चाहल ‘स्विमिङ कस्टुम, अन्डरवेर खरिडलि ।  उ डिनके कार्यक्रम एडभेन्चरस नेँग्ना रहे । समुन्डरमे मोटरबोट इन्जिन लागल बनाना बोटके मजा लेना । समुन्डरमे जैनासे आगे लग्गुक रिसोर्टके स्विमिङ पुलमे लहाके एक घचिक जिउ ढिकैलि । ओकर परसे हम्रे समुन्डर ओर लग्लि । ढिक्वामे बनाना बोट लागल रहे । केरा आकार ओ रंग हुइलक ओरसे बनाना बोट नाउँ हुइल हुइहिस कना अन्मान लगैलु ।  लाउमे सिट अन्सार हम्रे १२ जाने सयर करे जाइटहि । इ लाउ मोरलग लावा रहे । आउर लाउ चापर चापर खोङ्च्यार रहठ लेकिन बनाना बोट केरा हस सिलिन्डर आकारके ट्युब ओम्हे हावा भरल । एक जाने बैठे बन्ना ठाउँ छोरके आगे पकर्ना डुइठो हट्ठा फे लगाइल रहे ।  सक्कु जाने ‘लाइफ जाकेट’ घालके बनाना बोटमे बैठलि । मै बिच्चे रहुँ । हमार बगालमे डुइ जाने जन्नि फे रहिँट । भडभडियामे बैठेअस डुनुओर टंगरि कैके बैठे पर्ना । सक्कुजे हट्ठा पकरके अरगरके लाउपर बैठलि । उ लाउहे टानक लग डोसर मोटर बोट रहे आपन पाछे लसरि बाँढके हमार लाउहे टाने लागल ।  समुन्डरमे साहासिक खेल पहिलचो खेलटहि, सक्कु जाने हौस्याइल रहि । जस्टे लाउ मचे ओस्टे मजा आए । हम्रे जट्रे हल्ला करि, चिल्लाइ ओट्रे चलुइयैहे फे जोस आइस काहुन्, मन्के एक्सिलिटर डबाए ओ उर्ना मेरके डौराए । समुन्डरमे साहासिक खेल पहिलचो खेलटहि, सक्कु जाने हौस्याइल रहि । जस्टे लाउ मचे ओस्टे मजा आए । हम्रे जट्रे हल्ला करि, चिल्लाइ ओट्रे चलुइयैहे फे जोस आइस काहुन्, मन्के एक्सिलिटर डबाए ओ उर्ना मेरके डौराए । जट्रे जोरसे डौरे ओट्रे आउर हम्रे सबजे जोर जोरसे चिल्लाइ । लाउ अट्ना टेजसे जाए कि लाउ पानिक सटहसे उप्पर फे उरजाए ।  मै टे टिन जन्हुनके पाछे रहुँ मने अरगर लागे पछिल्का मनैं कबुकाल हाँठ छोरल कलेसे कहाँ गिरल कहाँ नै पटे नै चल्ना मेरके टेजके डौरे । लाउ डौरसे पानिक छल्का छुटे ओ सबके जिउमे छर्र छर्र परे, टब आउर मजा आए । सबजे फे जोस्साके हुटिंग करि । आहा, अट्ना मजा आए कि लागे जिन्गिके सबसे मजा डिन रहे उ । मुहेम पानि फेन छिरे, समुन्डरके पानि नोनखल्लाहे नोनखल्लाह ।  करिब ५ किलोमिटरके डुर टक जैना डग्गर रहिस, उहे डग्गरमे हम्रहिन चार पाँच चक्कर लगाइल । जब अन्टिम फेरा रहे, हम्रे घुमटहि डौर टुफान रहे । लाउ अभिन समुन्डरके बिच्चे रहे । सिढा जैटि जैटि चलुइया एकफाले हैन्डिल उल्टाओर घुमा मारल । हमार लाउ फट्टसे बिलिट गैल । जब समुन्डरमे लाउ बिल्टल, टब साटो हेराइलहस लागल ।  एक घचिक आघक उ जोस जाँगर, उमंग, उल्लास सब समुन्डरमे मिलगैल, माहोल अक्के घचिक सन्नाटामे बडलगैल । अफरा टफरि मचगैल । लाउ अल्गे, मनै अल्गे । सक्कुजे समुन्डरमे उटमुट उटमुट करे लग्लि । उ समयमे महि लागल, आब अट्रै हो जिन्गि । एक घचिक सारा चिज अन्ढार हु गैल ।  जब अचानक डुर्घटना हुइठ टे कौनो चिजके औसान नै आइठ । मै पानिम पौँरहे टे जन्ले रहुँ, मने एक फाले बिल्टलटे हाँठ गोर कुछ नै चलल । सक्कुजे लाइफ जाकेट घल्ले रहि, उ कारन एक घचि रैह्के पानिम टुम्मा उटराइहस फुलुर फुलर उट्रा गैलि । मैं फे उट्रैलुँ, टब मोर हाँठ गोर चले लागल । छाटिसे उप्परके जिउ पानिक बाहर आउर पानिम रहे । पौंरहे लग्लु ढिरेढिरे लाउ पुग्लु । फेन हट्ठा पकरके केँहकुँह कैके लाउमे बैठलि ।  सबजाने डरके मारे लगलग लगलग करटहि । सबके जिउ ठरठर ठरठर कैटि रहे । ना रोइम ना हाँसेम हुइल रहे  । मनेम लागल आझ भगन्वा सोझ रहे, कुछ नै हुइल, भगन्वाँ बचा डेहल । नै टे काल्ह समवेदनाके समाचार बने परट, अस्टे अस्टे बाट मनमे खेले लागल ।  डुइ जाने जन्नि संघरियन, एकठो ठारु संघरिया लाउ पकरे नैसेक्लाँ, ओइने पाछे रहिँट । उहेक मारे बहुट डुर उछिटके गैल रहिँट । ओहाँेर ढिक्वा परसे हम्रहिन कोइ कोइ हेरटि रहिँट । हमार लाउ बिल्टल टे टुरुन्ट डुइठो मोटर बोट लग्गु आ गैल, संघरियनहे फेन निकर्लां । हम्रि उहे बनाना बोटमे ढिक्वा ओर अइलि । पहिले आउर मचा आउर मचा कहुइया संघरियन टे आब ढिरे ढिरे लैजा कहे लग्लाँ ।  लाउ बिल्टलो पर अभिन हौस नै पुगल रहे । ओहेसे ढिक्वामे आके एकघचिक सिंगल बोट राइड कैलि । हमार संगसंगे एक जाने पन्डिट संघरिया रहे, उहिसे मन्ट्र जपके समुन्डरके आँरिटिर शान्ति पुजा कैलि । रिसोर्टमे लहा खोरके फर्छिन हुइलि । सक्कु जाने चलुइयाहे गरियइलि ।  पाछे पो पटा चलल कि उ अचानक हुइलक डुर्घटना नै रहे । वहाँ टे जान बुझके अचानक बिल्टैना चलन पो रठिन । लाउ सिंउर सेकल पुरान मनैं कहे लग्लाँ– यकर मजे इहे हो । पाछे पो पटा चलल कि उ अचानक हुइलक डुर्घटना नै रहे । वहाँ टे जान बुझके अचानक बिल्टैना चलन पो रठिन । लाउ सिंउर सेकल पुरान मनैं कहे लग्लाँ– यकर मजे इहे हो । पहिलेहे बटा डेलेसे फिक्कल हु जाइट कटिहुन । उहेक मारे बिन बटाइल एकचो लाउ बिल्टैठाँ । जे अप्नहे जानल टे जानल नै टे डुर्घटना मानल । हमार कलवा टयार रहे, पालम रिसोर्टमे कलवा खैलि । टब फेर मनिला ओर लग्लि ।  एशियाके सबसे भारि मल मोर जिन्गिमे पहिलचो एशियाके सबसे भारि मलमे बजार खेल्ना मौका मिलल रहे । उ मलके नाउँ ‘मल अफ एशिया’ हो, जहाँ एक चोटिम २० हजार मनै बजार खेले सेक्ना । हम्रे फेन एकडिन समय निकारके ओहाँ घुमे गैलि । मल भिट्टर छिरलेसे कहाँ हो कहाँ । जहोर हेर्लेसे अक्केमेर बिल्गना । हम्रे करिब २ घन्टा जट्रा घुम्लि, मने एक फलाटके एक कोन्वामे किल ।  अस्टके हमार बैठना होटलके पँजरे डोसर बर्का मल रहे । उ फे बहुट बरा रहे, जहाँ हम्रे सुरुवाटि डिनमे भुलाइल रहि । हमार ठन केक्रो मोबाइल फोन नै रहे । सिमकार्ड टे लेले रहि, मने नम्बर साटासाट नै कैले रहि । टालिम ओराके कोठामे आइबेर मल घुमि कैह्के छिरलि । उ मलके नाउँ मेगा मल रहे । हम्रे नेँगट नेँगट भिट्टर जाइल कैलि मनै छुट्टि गैलाँ ।  घुमट घुमटसमय विटलक पट्टे नै मिलल । साँझके बेरि खैना समय हुइटहे हडबड हडबड निकर्ना खोजे लग्लि । घुमघुमके उहे जगा जाइ । अपने अपने हाँसि, जहाँ जाइ सबओर अक्के बिल्गे । हमार समुहमे ४/५ जाने रहि । मने केउ फे सहि डग्गर पटा लगाइ नै सेकल । हम्रहिन होटलके नाउँ याड रहे । टब गार्डसे पुँछलि टिवन टावर होटल जैना गेट कौन हो । उ हाँठले इसारा कैल, महा डुर । पुँछट पुछट बल्ले टल्ले होटल जैना गेटमे निकर्लि, टब कहाँ साँस आइल ।  ऐतिहासिक रिजाल पार्क टालिमके डौरानम एक डिन रिजाल पार्क, मल अफ एशिया ओ ओकाडा होटलके वाटर फाउन्टेन हेरे जैना कार्यक्रम रहे । मल अफ एशिया जैना डगरेम रिजाल पार्क परलक ओरसे गारि रुकाके पार्क घुमे गैलि । पर्यटकिय छेट्रा घुमे जाइबेर अफिसके एकठो टुरिस्ट गाइड फेन रहे । हम्रहिनहे घुमैना वहाँक बारेम बटैटि भिट्टर लैगैल । रिजाल पार्क फिलिपिन्सके सहिड जोसे रिजालके सम्झनामे बनैलक पार्क हो । उहे जगामे उ आपन डेसके स्वटन्त्रटाके लग लरट लरट सहिड हुइल रहिँट । करिब ५८ हेक्टर ठाउँमे फैलल उ पार्क एक मेरिक ऐतिहासिक संग्रहालय फे हो । फिलिपिन्स स्वटन्त्र हुइनासे पहिले अठारौ सटाब्डिमे स्पेनके उपनिवेस रहे । अस्टके स्पेन ओ अमेरिकाके लराइके चपेटामे फे फिलिपिन्स परलक इतिहास बटिस । पाछे कुछ समय अमेरिकाके फे उपनिवेस रहे ।  सन् १९४६ मे फिलिपिन्स स्वटन्त्र हुइलक घोसना हुइल रहे । फिलिपिन्स फे बहुट लराइ कैके आजुक अवस्ठामे आइल बा । वहाँक संग्रहालय फिलिपिन्सके इतिहास बोक्ले बा । सहिडके स्मारक, लराइ खेल्लक घर, भिटामे गोलिक छर्रा लग्गक खोभल्टा, डुस्मनसे बचक लग बनाइल बन्कर, बरे बरे टोप ओ टोपके गोला अभिन जसके टस डेखे मिलठ । सहिड रिजालके विद्रोह कैलक सुरुवाटि डिनसे सहिड हुइलक टकके फोटु, मुरट, डस्टाबेज सजोग लगके ढैल बा ।  उ पार्कके भिट्टर जैनासे पहिले पहुना पर्यटकहे गुट गुट बनाके करिब १५ मिनेटके डकुमेन्टि डेखाजाइठ । उ छोट भिडियोसे पार्कके बारेमे, फिलिपिन्सके इतिहासके बारेमे बुझ्ना बहुट सजिल हुइठ । भिडियो हेरके कौटुहलटा बर्हल रहठ, ओकर पाछे सोझे ठाउँ पुगके  हेरबो टे आउर मजा आइठ ।  थरुहट क्षेत्रके जंगलवा कुटी, चखौरा थारु संग्राहालय, घोरिघोरा ताल, गढीमाइ जसिन ऐतिहासिक, ढार्मिक ठाउँमे पहुननहे छोटछोट भिडियो डेखाइ सेक्लेसे उ ठाँउक महट्व आउर बर्हाइ सेक्जाइट कना लागठ ।  हमार डेसमे फे बहुट ऐतिहासिक ढरोहर बा जस्टे कि पाटन दरबार, नारायण हिटी संग्रहालय, हनुमान ढोका आदि ऐतिहासिक ठाउँ हेरुइयनहे छोट भिडियो क्लिप डेखाइ सेक्लेसे उ ठाउँक महट्व आउर बर्हट कना हस लागठ ।  अस्टक थरुहट क्षेत्रके जंगलवा कुटी, चखौरा थारु संग्राहालय, घोरिघोरा ताल, गढीमाइ जसिन ऐतिहासिक, ढार्मिक ठाउँमे पहुननहे छोटछोट भिडियो डेखाइ सेक्लेसे उ ठाँउक महट्व आउर बर्हाइ सेक्जाइट कना लागठ ।  ओरौनि हमार डुइ अँठवारके बैठाइ आढा टालिम लेना ओ आढा अवलोकन भ्रमन कैना हुइलक ओरसे फिलिपिन्सके नेगाइ बहुट याडगार हुइल । टालिमके डौरानमे लावा लावा सिख्खा सिखे मिलल । अस्टके वहाँक जनप्रतिनिधिन जनटन कटना मन्ठाँ कना डेखे मिलल । ‘भेलेन्जुयलक मेयर’ राटडिन जनटनके सेवम खटल वर्नन सुनगैल । हम्रे वहाँ जाके अवलोकन फेन कैलि, कार्यालयक कर्मचारि सेवाग्राहिमे बहुट सम्बेडनसिल । काम लेना सहज हुए कैह्के सक्कु फाँट अक्केठन बनाइल । हरेक फाँट सेवाग्राहिनके सुझाव लेहक लग फारम ढैल सक्कु जाने सेवा कसिन हुइल कैह्के फारममे आपन मजा नैमजा अनुभव लिखे मिल्ना, कहे मिल्ना सिस्टम मजा लागल ।  वहाँक मनैन्के चहा जिहिसे हाँसके बोल्ना ओ सक्हुन सम्मान कैना बोलि व्यवहार तारिफयोग्य लागल । सरकमे फे डग्गर काटेबेर गारिक स्पिड डुरेसे स्लो कैना, जेब्रा क्रसमे ढिरे ढिरे सवारि चलैना, बस स्टपमे बस चौँरहक लग लाइनमे बैठल रना । समग्रमे कना हो कलेसे फिलिपिन्स भ्रमनसे ढेर सिखाइ हुइल । इ भ्रमनहे एक्ठो बरा उपलब्ढिके रुपमे लेले बटुँ । देउखर, पिपरी, हालः कीर्तिपुर, काठमाडौं साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक  अंक ४८ (२०७८ काट्टिक, अग्हन ओ पुस)  

कोपिलाके ‘हमार संस्कृति’मे एक लजर

कोपिलाके ‘हमार संस्कृति’मे एक लजर

३३५ दिन अगाडि

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१३ मंसिर २०८२

२०५९ सालमे मुक्तिक खोज उपन्यासमार्फत् थारू साहित्यके फँटुवामे पैला ढारल छविलाल कोपिला संयुक्त संग्रह लगाके दर्जनसे ढेर पोस्टा निकार सेक्ले बटाँ । उपन्यासबाहेक उहाँक आकुर पोस्टा खासकैके कविता बिधामे केन्द्रित बटिन् । उहाँ साहित्यकार व्यक्तित्वके अलावा पत्रकार व्यक्तित्वसे फेन परिचित बटाँ । आजकल लावा डग्गर त्रैमासिकमार्फत् साहित्यिक पत्रकारितामे उहाँक् पैला आगे बह्रल बटिन् । इहे सिलसिलामे उहाँक् ‘हमार संस्कृति’ नामक् खोजमूलक लेख संग्रह २०७१ वैशाखमे प्रकाशन हुइल बा ।  पत्रकारितामे लेख लिख्ना सिलसिलामे समसामयिक बिसयमे कलम चलैना एकठो बाट, मने पत्रकार मनै आपन लेखके छुट्टे संग्रह जो निकारेबेर सन्दर्भ स्रोतमे बहुट ध्यान पुगाइ परठ । यम्ने सन्दर्भ सामग्रीके उल्लेख हुइल बा । ओहेसे इ पोस्टा थारू सांस्कृतिक लेखके लग महत्वपूर्ण दस्तावेज ओ संग्रह करे लाइक बनल बा । इ पोस्टामे १९ ठो सांस्कृतिक लेख संग्रहित बा । थारू जातिनके लोकगीत, संस्कृति ओ गीतिसाहित्य सिर्सकके पहिला लेखमे ढेर बाट अँट्वइना प्रयास कइगैल बा । थारू समुदायमे लोकगीत कहटि कि गीतिसाहित्य ओस्टे आ जाइठ । उप्परसे संस्कृति बिसय जोरटि कि यकर फैलावट ओस्टे बह्र जाइठ । ओहेसे इ लेख कुछ छ्र्यासमिस लागठ । मने थारू समुदायमे गा जैना टिउहारगीत, ऋतुगीतलगायत मेरमेरीक गीत, नाचके बारेम कुछ आख्यान सहितके वर्णन लेखहे खोजमूलक बनैले बा ।  जहाँ सजना गैलेसे पानी बर्सठ्, सिर्सकके डोसर लेखमे गोरु बेह्रना चलनके बारेम उल्लेख बा ।  गोरु बेह्रना चलनहे कहुँ कहुँ गैया बेह्रना फेन कैह जाइठ । इ चलन कहियासे ओ कसिक चलल् ? यकर उत्तर खोज्ना प्रयास कैगैल बा । इ लेखके कमजोर पक्ष गोरु बेह्रेबेर गा जैना सजनाके सप्रसंग व्याख्या नइ हो । सजनामे जन्निन्के जौन बिरह बेदना रठिन, ओकर व्याख्या छुट्टे पोस्टा जो बन सेकठ ।  महाभारतके प्रारुप बर्का नाच टिसर लेखमे खास कइके डस्या ओ डेवारीम नाचजैना महाभारतके कथावस्तुसे जोरगैल बर्का नाचके बारेम बा । इ नाच आब केवल दाङदेखउर, घोराही उपमहानगरपालिका, जलौरा गाउँमे किल नाचजाइठ कना लेखकके कहाइ बटिन ।  मै सुनल अनुसार बर्दियाके उल्टनपुरमे फेन बर्का नाच कैना चलन रहे । बर्का नाचके बारेम कुर्ट मेयर ओ पामेला डुयल अंग्रेजी संस्करण महाभारतः द थारु बर्का नाच (२०५५) मे पोस्टा निकारके अन्तर्राष्ट्रियकरण कर्ले बटाँ । असिन आउर ढेर थारू लोकगीत, नाचके बारेम अन्तर्राष्ट्रियकरण करे पर्ना जरुरि बा । थारू समुदायमे भोज—वियाह ओ थारू समुदायमे भोंर—पैठ्ना चलन, इ छुट्टाछुट्टे लेखमे मेरमेरिक भोज कैना चलनबारे वर्नन बा । पहिला लेखमे ठोकौनिसे, विदाइ समके बाट ओ माँगरके चर्चा ढेर बा । डोसर लेखमे भोंर पेलल् बाबासे हुइल लर्कापर्का, भोंरपैठा स्वयम् अंशके दावेदार हुइ नइ पैना कानुनी समस्याके जटिललताके बारेम लेखक अंग्रेयइले बटाँ ।  छैठौसे बाह्रौ लेख थारू समुदायमे मनाजैना टरटिउहारके बारेम केन्द्रित बा । जेम्ने गुर्ही, अष्टिम्कि, अँट्वारि, डस्या  डेवारि, माघ ओ ढुर्हेरि मनैना चलनके बारेम खोज कैगैल बा । यम्ने थारू जलम संस्कार ओ मृत्यु संस्कार बारेम फेन छुट्टाछुट्टे चर्चा बा । टरटिउहार असिक मनैठाँ, ओसिक मनैठाँ कना छिछलि चर्चासे लेख कुछ उप्पर उठ्लेसे फेन थारू समुदायमे मनाजैना टरटिउहार आब् कसिक रंग बड्लटा ? उ बड्लाउ का अर्थ राखठ ? इ बारेम चिन्तन मनन कम बा ।  जस्टे कि माघ टिउहारके चर्चा । माघ डेवानिके भुरा खेलमे गाउँक् अगुवा बरघर चुनजैना प्रसंग टे यहाँ बा, मने थारू गाउँक् अगुवाइ आब गैरथारून्के हाँठेम् जाइटा । इ सवालमे बहस कर्ना कि नै कर्ना ? मुक्त होके कमैयन् गाउँक् अगुवाइ अपनेहे कैके सभासदसम बन्टि बटाँ । मने आम थारू अगुवन् बरघरमे किल सीमित बटाँ, ओइन चुनावमे गोटि किल बनाजाइटा । माघ डेवानिके अवसरमे आपन मुद्धा, आपन नेतृत्व इ सवालमे बहस कर्ना कि नै कर्ना ?  ओस्टक जरुरी बा– अष्टिम्कि, अँट्वारि, डस्या  डेवारि, माघ ओ ढुर्हेरिम बनाजैना परिकारके व्यावसायिकताके चर्चा फेन । लेखकके चिन्तन बटिन कि थारू समुदायमे विकृति बन्टि जाइटा जाँर डारु । इहे हो थारून् कमैया, कमलहरी बनुइया । महि लागठ, कुछ प्रतिशत यकर फेन हाँठ हुइ सेकठ, मने वास्ताविकता का हो कलेसे राज्यके नीति जो थारून् गरिब बनाइल, ओइनके मोहियानि हक सुरक्षित नै करल । ओइन मतवालीमे गरना करल । धर्म, थारू समाज ओ वास्तविकता इ लेखमे थारू जाति किल नाहि, अन्य समुदायके मनै फेन पुरान, रुढिवादी ओ अन्धविश्वासमे अन्धभक्त होके दुःख पैलक बाट उठागैल बा ।  थारून्के धर्म का ? यकर बारेम कौनो चर्चा नइ हो ।  थारू भासा ओे पत्रकारिताके अवस्था लेखमे लेखकके ठहर बटिन कि थारू भाषक् पत्रिका संख्यात्मक हिसाबसे ढेर प्रकाशन हुइल बिल्गैलेसे फेन गुणस्तर ओ निरन्तरताके हिसाबसे बहुट नाजुक अवस्था बिलगाइठ, इ सोह्रे आना सहि हो । मने हालसम कठेक थारू पत्रिका निक्रल, उ खुलाइल नइ हो । गुणस्तर ओ निरन्तरता कसिक कायम कर्ना यकर कौनो उपाय नइ सुझाइल हो । हमार कला, साहित्य ओ संस्कृति लेखमे बर्गीय साहित्यके चिन्तन बा । हाल आधुनिकताके नाउँमे संस्कृति परिवर्तनमे डेख्गैलक विकृतिक् बारेम टिस्लार प्रहार बा । थारू पहिचानके धरोहर जंगलकुट्टी  ऐतिहासिक पर्यटकीय क्षेत्रके परिचयात्मक जानकारि डेहल इ पोस्टाके पुछ्यावन लेख हो । मोर जानकारि अनुसार इ लेख कार्यपत्र हुइल ओरसे आउर लेखसे गरु बा ।  यम्ने संकलित लेख पहिले कहाँ कहाँ छपल रहे ? ओकर सुचि फेन डेहल रहट टे उचित हुइना रहे । कौनो कौनो लेखमे फोटु नइ हो । मने ढेरहस लेखके बिच बिचमे डेगैल फोटु पोस्टाहे आउर वजनदार बनैले बा, यद्यपि छपाइमे फोटु ढुमिल बा । फोटु मौलिक हो या औरे जन्हक साभार ? इ फेन अनिवार्य खुलाइक चाहि । काजेकि आब मनै अपन फोटुक कपिराइट खोजे लागल बटाँ । हमार संस्कृति इ पोस्टा मातृभासा थारूमे जो अनुसन्धानमूलक कृतिके लावा परम्परा बैठाइल ओर्से लेखक धन्यवादके पात्र बटाँ ।  अन्तमे, छविलाल कोपिला अनुसन्धानकर्मीके परिचय इ पोस्टामार्फत् उजागर कर्ले बटाँ ।  महि अस्रा बा, पत्रकारिता ओ साहित्यकारके पगरिसंगे अनुसन्धानकर्मीके पगरिहे उहाँ अइना डिनमे फेन निरन्तरता डिहिं । थारू समुदायके ढेर बखारि उहाँक् मनेम भरल बटिन । उ बखारिमे घुन लगैनासे आम पाठकमे बँटहि ओ खोजमूलक लेखनमे निरन्तर लग्हि, बहुट बहुट सुभकामना । ओ इ पोस्टाहे प्रकासनमे सहयोग करल आदिवासी जनजाति उत्थान राष्ट्रिय प्रतिष्ठान धन्यवादके पात्र बा ।  (पोस्टाके भूमिकासे, कुछ संसोढिट)