प्रशुराम चौधरी
ओहे तराजुम मलिक्वा
एक होर धान टौलल्
एक होर कमैयक ज्यान टौलल्
बरस भरिक कमाहि पाँच बोरा धान डेहल
कब टक रहि जाँगर ई बुढापा शरिरमे
बुढापा गोरु जैसिन कमैयन
अपन घरमसे निकार डेहल
तिन हजार ऋण हे तिस हजार लिख डेहल
दुई बिघा खेट्वा रहे सारा सक्कु लैलेहल
आज टे जग्गा विहिन सुकुम्वासी बना डेहल ।
धनगढी, कैलाली
प्रकाशित:
७५ दिन अगाडि
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