फोटुः नेपालन्यूज
सतीरानी विश्वास थारू
हे थारू समाज अख्नो नय जाग्वै त जाग्वै कहिया
थारू समाजके अन्त हेतु जहिया ।।
जात धर्मके नाममे लड्छै ऐक दोसरके दुश्मन बन्याके
यथार्थ बुझे लग्ना सदये मौका गम्याके।।
आँख नै हेल मानुस संसारके वास्तबिकता देखे खोज्छि
आँखो हाविके थारू समाजमे गलतीयोरा परम्पराके सहि सोच्छि।।
हमे धनिक, त्या गरिब, हमे सुधर्ल, त्या विगर्ल
एकेरा भगवानके हातसे आपन सिनके जिवन छो बन्ल।।
जेहनेङ करवै ओहनेङ भोग्वै
आपन बेटा बेटिके गलति अचराके आँचलमे लोकहवै।।
लोकके बेटा बेटिके आगु बढेसे आपने सिनके थारू समाज रोकहवै।।
कते धामी कते माता खोज्तै जेछै
धामीनाके दारू दान मातानाके खाता खुल्याके फाइदा देछै।।
समय बदलली संसार बदलली तर थारू समाज नय
आवे वाला पिढीके याहना अन्धविश्वासके ज्ञान देहवै।।
अखने संसारमे सव कुनुके परमाण जुटल छि
भरममे बाँचिके आधुनिक युगोमे थारू समाज आगु बढेसे पाछु छुटलछि।।
भगवान कते छि आपने मनमे शैतान कते छि आपने मनमे
मौसम लखान बदलछि यिटा मन छन छनमे।।
लोकके गलती पकडे लग्ना बैठल छि यिटा समाजमे
आपन गलती सुधारे लग्ना कोई नै सोच्छे थारू समाजमे।।
हे थारू समाज अख्नो नै जाग्वै त जाग्वै कहिया ?
थारू समाजके अन्त हेतु जहिया।।
ग्रामथान गाउँपालिका–५ , सिमरिया
मोरङ्ग
प्रकाशित:
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