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जब गोचाली सगुनहे २०३३ सालमे जेलमे छुटाइ गैलि...

१२ सय जुटाइक लग चन्डा उठाके सगुन सरके जरिवाना टिरम कैह्के दाङ, सुर्खेत, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कन्चनपुर सालभर नेंग्लुँ ओ सेकटसम आपन ओरसे सहयोग फेन मिलल रहे ।
जब गोचाली सगुनहे २०३३ सालमे जेलमे छुटाइ गैलि...

भगवतीप्रसाद चौधरी

२०२५ सालके अन्टिम ओर २०२६ सालके सुरुवाट सँगे सगुनलाल चौधरी सरसे सिढा रतननाथ मा.वि.नारायणपुर दाङमे मोर पहिला भेट हुइल रहे । पहिला भेटमे, अन्जान भेंटमे टिट–मिठके कुछ बाट नै हुइल । वहाँ एस.एल.सि.परिच्छा डेके शिक्षकके रुपमे मा.वि.मे नियुक्टि हुइल रहिंट कलेसे मै वहिके प्रा.वि. के मस्टरवा । ६–७ महिनाके सँग–सँगेके उठ–बाससे हमार डुइ जन्हुनसे एकापसमे बरा गहिँर सम्बन्ढ बैठल । हरेक छेट्रामे एक्के विचार ढर्ना हुइलक ओरसे हम्रे डुनु जे एक सिक्काके डुइ पाटा हस हु गइलि । 

क.नेत्रलाल, नारायणपुर मा.वि.के प्र.अ.रहटि–रहटि भुमिगट हो गइलाँ टे मै बनारस अध्ययनके लग चला गइलँु कलेसे सगुन सर बर्दिया, सेमरह्वा छारा कइके चला अइलाँ । मै बनारससे आके हेकुली प्रा.वि.के प्र.अ. हु गइलुँ टे सगुन सर फेन हेकुली दाङ धरणीधर चौधरीके घरेमे पराइवेट सिच्छक हो गइलाँ । मै फेन प्र.अ. छोरके बैबाङ पदमनाथ चौधरीके घरेम पराइवेट सिच्छक हो गैलु । 

ओहाेंर हमार संघरिया लालबहादुर चौधरीके बैबाङ उट्टर चढान खड्गवीर चौधरीके घरेम पराइवेट सिच्छक हु गइलुँ रहिंट । 

अइसिके हम्रे टिनु जाने संघरियन डोसर–डोसर घरेम लग्गु–लग्गु साँझ बिहान भेंट हुइना मेरिक पर्हाइ लागल रहि । टिन जन्हुनके ‘टिन टिखार, बरे बिखार’ कहे हस टिन जन्हुनके रहाइ बसाइ वहे आनन्ड ओ अलौकिक मेरके रहट रहे । 

यिहिसे पहिले नारायणपुर सिच्छक रहल बेर कमरेड नेत्रलाल अभागीसे सल्लाह कइके हम्रे क.महेश चौधरी, सगुन चौधरी ओ मै मिल्के थारू भाषा तथा साहित्य सुधार समिति पश्चिमाञ्चल नेपाल (गोचाली परिवार (२०२८) नामक् संस्ठा खोल्के टट्कालिन प्रशासनके आँखिक किर्किट बनल रहि । गोचाली परिवार पर परटिबन्ढ लागल । हम्रे जुन ‘कुछ रोग, कुछ भोग’के विचारसे परेरिट मनै हुइलक ओरसे पेसाके बहाना बनाके राजनिटिकसे पछरल ठाउँमे जाके कम्निस्ट विचारहे समाजमे फैलइना रहे । 

टट्कालिन सरकार परटिबन्ढ गोचाली पट्रिका परकासिट करलक बहानामे पकरके सल्यान चलान कर्टि–कर्टि बिच डगरेमेसे सगुन सरहे लइजुइया भगा मर्लस । सगुनजि भग्लग ओरसे मै फेन पुलिसके नजरमे गिर परलुँ । पुलिसके चेवामे बइठे नै सेक्के २०३३ साल बैसाखसे भुमिगट जिवन विटाइ पर्ना बाढ्यटा होके बैबाङ छोर डेलुँ  ।

क.लालबहादुर चौधरी घर आके घर सहेर्के बइठ गइलाँ । सगुन बिच डगरेसे भागके आके पुर्नकालिन भुमिगट जिवन बिटाइ लागल अवस्ठामे फेनसे धनगढीमे पकरवा पइलाँ । धनगढीमे जेलमे एक बरसके लग सजायके साठ साठे १२००।– (एक हजार डुइ सय) जुर्बानके सजा पइलाँ ।

उहे १२ सय जुटाइक लग चन्डा उठाके सगुन सरके जरिवाना टिरम कैह्के दाङ, सुर्खेत, बाँके, बर्दिया, कैलाली ओ कन्चनपुर सालभर नेंग्लुँ ओ सेकटसम आपन ओरसे सहयोग फेन मिलल रहे । उहे सिलसिलामे बर्खाहा खेटि मचलबेर एकडिन बर्दिया मनाउके लग्गे परसेहनी गाउँ डिन बुर्वा राट पर्ना पर्ना पुग्लुँ, घरेम पैठलुँ, पानी झाउ–झाउ पर्टि रहे । 

मै भिजट–टिजट जौन घरेम पैठलुँ टे वहे घरक बुह्र्या बुडि कैह बैठलि, ‘अरे ! भैया टोहार घरेम खेटि–पाटि नै हो का ? अइसिन बरखामे खेटि कइना समयमे पहुनि खाइ अइठो ?’ 

मोर फेन खेटि बा जे बुडि परस्नक उट्टर डेलुँ । समय खेटिके बा, बरखा डिन अइटि बा, जेलके डिन ओरइटि बा । ओट्ठेसे चन्डा उठैना अभियान ओरा गइल ।

ढिरे–ढिरे सक्कु ओरसे संघरियन आपन–आपन ओरसे सहयोग कर्टि गइलाँ । सगुन छुटेबेर कन्चनपुरसे कुलवीर चौधरी, दाङसे अशोककुमार चौधरी अइना सल्लाह रहे । मै भर उहाँ छुटनासे पहिलहि धनगढी पुगल रहुँ । छुट्नासे पहिलहिसे जो जेलमे भेटघाट करे जाउँ । भेट करेबेर जेल बाहर मिझ्नि खैना एकघरि कुल छुट्टी मिलिन । समय आइलमे वहाँ आपन ठाउँ जेल बिच घुस जाइट रहिँट । सगुनहे जेलमे फेन विसेस किसिमके छुट हुइल सुनगइल रहे । 

डोसर डिन छुटना सयम आइल टे दाङसे अशोककुमार चौधरी अइलाँ । कन्चनपुरसे कुलवीर चौधरी अइलाँ । सक्कु ओरसे टिनु संघरियन जुटलि टे आपन–आपन ओरसे पैसा जुटाके जेल प्रशासनहे बुझाके करट ढरट डिनभर लाग गइल, सन्झा हो गइल । 

सगुन साल भर परसे छुटलाँ कैह्के हम्रे जब जट्रा रहि विड्यार्ठि समेट सक्कु जाने मिल्के खान पिनके बेवस्ठा मिलैलि वहि धनगढीमे । सन्झाके खानापिन कइलि, राट बसेँरा वहि डेरामे बिटैलि । कोह्रि पुलिस राटभर हमार खबर लेटि रलाँ ।

बिहान बासि खाके सगुन, अशोक ओ मै डेरासे निकरके धनगढी बजार अइलि । कुलवीर भर विडावारि लेके अन्गुट्टे कन्चनपुर गइ सेक्ले रहिट । सगुनहे डि.एस.पी., सिडिओ घर जइनासे पहिले भेट कैके जइहो कलक ओरसे भेट करे गइलि । अब्बे डि.एस.पी. के नाउँ महि पटा नै हो । सगुनजिहे हुँकार कलक बाट महि याड बा, उहाँ कलाँ, ‘अपनेनके सरकार आ जाइ टे फेन कर्मचारि हम्रहि रहब । हम्रहिन अपने जेल सजा कैलकमे बरा डुःख बा । यि टे हमार कर्टव्य हो । सरकारके नोेन सोझ कैलक किल हो । सरकार जौन अर्हाइ, हम्रे उहे करब । मान लेउ अपनेक सरकार अइलेसे फेन हम्रे डोसरहे असहे करब । हम्रे टे डेसमे अमन चयन कइना जिम्मा पइले बटि । अस्टक सि.डी.ओ.हे फेन भेट करेबेर हाँठमे फुलाके गुच्छा डेके सम्मान साठ सगुनहे विडाइ कइलाँ ।

अन्टिममे धनगढी गौरीफन्टा ओर नेंगे गइलि हम्रे टिनु जाने । गौरीफन्टा टे«नमे चर्हलि गुलरिया चलाअइलि । उहाँसे सगुनके घर बर्दियाके बारबर्दिया नपा–१० (पहिले धधवार पन्चायत) अन्टर्गट सेमरहवा गाउँ पुग्गइलि । अपन मनै भेटैला टे घरक मनै बहुट फोहैलाँ । राटभर उहें रहलि । बिहान कलवा खाके विछिया हुइटि भारत बलरामपुर पुग्लि राट वहि रहलि । वहाँ कवला खाके बलरामपुरसे कोइलावास नेपाल हुइटि गढवा आ पुग्लि । अशोक भर देउखर गढवा, मानपुर मोर घर नै रुक्के सरासर दाङ, मघही चला गइलाँ ।

पाछेके बिच बिचमे थारू भाषा तथा साहित्य सुधार समिति पश्चिमाञ्चल (गोचाली परिवार २०२८) के कार्यक्रममे दाङ, बाँके, कैलाली, कन्चनपुर, सुर्खेतमे फेन सगुन सरसे भेट हुइटि रहुँ । हरेक सालके बैसाख १ गटे गोचाली डिवस मन्टि रहल समयमे पटक–पटक भेट हुइटि रहि । गोचाली भरिम सबसे लग्गुक लगउटि ढार कलक अक्लेश्वर चौधरी अरविन्द (मटेरिया) सगुनलाल सेमरहवा (बर्दिया) कालीराम चौधरी (मानपुर), महेश चौधरी (बैबाङ) यि चार जाने गोचालिनसे जिन्गिभर मिठे–मिठे निवाह गइल । किहुसे फेन कलह नै हुइल । मानो एक सिक्काके डुइ पाटा हस रहल रलहि । 

अब यि ३ गोचालि अरविन्द, महेश ओ सगुन हमार सँगे नै हुइट । सडाके लग विडा हो सेकल बटाँ । ट फेन मुटुके ढकढिउरिम हरडम रटि रहिहि । हमार मन मस्टिकमे जियल रहिहि । गोचाली आन्दोलनमे लागल मोरे गाउँक् कालीरामके पुरा सफलटाके सुभकामना कर्टि यि कलम बन्ड करटुँ । 

 

साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, बरस ७, अंक ४, (कार्तिक–पुस) २०७३
सगुनलाल २०५८ पुस १२ गते प्रशासनसे वेपत्ता पारगइल बटाँ । शीर्षकलगायत कुछ संशोधनसहित प्रकाशित ।–सम्पादक

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