भुलाई चौधरी
२०२५/०२६ साल के बात चियै जब हम बिराटनगर के मोरंङ कलेज मे आई.एस्सी.मे परहैत रहियै वहै समय मे सप्तरी डिमन निबासी मीत भैया गंगाधर झा जे गजेन्द्र नारायण सिहं पार्टी के पार्टी प्रवक्ता रहै, ओकर सम्पर्क मे आईब के हमौ गजेन्द्र नारायण सिंह पार्टी से आवद्घ भ्या गेलरहियै ।
गजेन्द्र नारायण सिंह सप्तरी कोइलारी के निबासी रहै और उ पहिने नेपाली कांग्रेस मे रहै और जब वै पार्टी मे मधेसी प्रति कुछ विभेद देखल्कै त उ नेपाली कांग्रेस पार्टी से अलगे दोसर पार्टी खोलल्कै जे पार्टी वै समय मे गजेन्द्र नारायण सिंह पार्टी से परिचित रहै ।
एकदिन के बात चियै । गजेन्द्र नारायण सिंह के पार्टी के कोनो कार्यक्रम मे हमहुँ बाजलियै । अपना अनुभव भ्याल जे हम खौब नीक बाजलियै । मगर कुछेक समय मे प्रतिक्रिया सुने परलस गंगाधर झार मीत भैया बाजलै जे भुलाई के मैथिली नै आबै छै । सुइनके हमरा बहौत दुःख लागल । हम भैया के कहलियै जे भुलाई के मैथिली आबै छै कि नै, वै से कोन मतलब ? भुलाई चाहे आपने भाषा मे ने बाजेस बात त ई होना चाही जे भुलाई जे बाजलै उ ठीक बात चियै कि नै ? से बात त बाजवहक नै स बाजवहक केवल जे भुलाई के मैथिली नै आबै छै । यैठो मैथिली कते से येलै ?
वै दिन भैया, गंंगाधर झा के भाषावाला बात ल्याके हमरा बहौत दुस्ख लागल और हम वहै समय से गजेन्द्र नारायण सिंह के पार्टी छोइर देलियै । लगभग २०२९/०३० साल से थारु समाज मे सेहो थारु भाषा के संरक्षण, सम्र्बधन तथा विकासवाला चर्चा परिचर्चा बेसी हेबे लाग्लै । फलस्वरुप, २०३३ साल से महान्यायधिवक्ता श्री रमानन्द प्रसाद सिंह के प्रधान सम्पादन मे थारु संस्कृति परिवार के प्रकाशन मे थारु संस्कृति प्रत्रिका प्रकाशन हेबे लागलै । यैठो स्मरणीय बात ई छै जे उ पत्रिका थारु या थारु संघ संस्था संरक्षण केने हेतैै यै मे हमरा शंका लागैये । मगर बहौत मधेशी समुदाय सब वै पत्रिका के बहौत अंक सुरक्षित राख्ने छै ।
एक दिन हम कोनो काम विशेष से मीत विमल झा के घर राजबिराज मे गेल रहियै त गंगाधर झा/मीत भैया प्रकाशित भेलहा थारु संस्कृति पत्रिका के हरेक अंक देखे देने रहे आ तब वै दिन भैया गंगाधर झा फेन प्रतिक्रिया देने रहै जे भुलाई तुहँु सब मैथिलीये बाजै चहक । हमरा सब के बीच ई थारु भाषा सम्बन्ध मे छोट–मोट बहसो भेल रहे और हमर जवाफ रहै जे लगभग आई से १० वर्ष पहिने भैया वै दिन मिटिङ्ग मे तोहे ठीक बाजल रहअ जे भुलाई के मैथिली नै आबै छै । वै समय मे तोहर बात सुइनके हमरा रिस त रिसे उठल रहे । हमरा आशा रहे जे तोहे हमर कथन के समर्थन करवहक । मगर तोहे समर्थन कि करतियह रु उल्टे भुलाई के मैथिली नै आबै छै तै तर्फ बात के अलझ्याके वहै ठाम हमर बात निर्मूल क्या देलहक ।
नतीजा ई भेलै जे हमरा तोहर सब के पार्टीये परित्याग करे परल । मगर फेन आई ई बात कते से येलै जे भुलाई तुहुँ मैथिलीये बाजै चहक । येबकीवेर कि राजनीति छअ रु जे कहै चहक भुलाई तुहुँ मैथिलीये बाजै चहक । ई त नै होना चाही ने ।
जब भुलाई कहे हम मैथिली बाजैचियै त तो कहक भुलाई के मैथिली नै आबै छै आ जब भुलाई कहे जे हमरा मैथिली नै आबै छै त तोहे कहैचहक भुलाई तुहुँ मैथिलीये बाजै चहक । कोनो एक धार मे रह ने । सब बात तोरे सब के रु से आब नै चलतअ । थारु के ने कहियो मैथिली आबै छेलै आ ने अबैछै । सदैव वोकर मातृभाषा थारु रहै और अखुन्तो थारु के मातृभाषा थारु चियै । यै मे आब गलत राजनीति नै चलतअ, कैहके वैठो से हम फेन आपन काम ले विदा भ्या गेलियै ।
सप्तरी, हालः पेप्सीकोला, काठमाडौं
साभारः लावा डग्गर त्रैमासिक, बरस ७, अंक ४, (कार्तिक–पुस) २०७३
प्रकाशित:
१५६ दिन अगाडि
|
९ पुष २०८२
२ दिन अगाडि
|
१४ जेठ २०८३
३ दिन अगाडि
|
१३ जेठ २०८३
४ दिन अगाडि
|
१२ जेठ २०८३
५ दिन अगाडि
|
११ जेठ २०८३
६ दिन अगाडि
|
१० जेठ २०८३
७ दिन अगाडि
|
९ जेठ २०८३
८ दिन अगाडि
|
८ जेठ २०८३
१३२७ दिन अगाडि
|
२५ असोज २०७९
१३६१ दिन अगाडि
|
२१ भदौ २०७९
१३७१ दिन अगाडि
|
१२ भदौ २०७९
१३२६ दिन अगाडि
|
२६ असोज २०७९
१२७५ दिन अगाडि
|
१५ मंसिर २०७९
१३३१ दिन अगाडि
|
२० असोज २०७९
१२६४ दिन अगाडि
|
२७ मंसिर २०७९