जग्गु प्रसाद चौधरी (भगोरिया)
थारु भाषाक् शब्द बेल्साइके बहस चलल् बा
आपन मनक विचार डेना डगर खुलल् बा
आओ गोचाली बहस करी सक्कुजे मिलके
जिन नुकल रहो कुई बाट बट्वाई खुलके ।
थारु भाषाक आजसम नै मिलल हो लिपि
देवनागरिक लिपिक कुछ वर्ण हटैना काजे कर्ना ढिपी
निमाङ् शब्द जस्टक बोल्ठी ओस्टक हम्र लिखी
साहित्यम लौव लौव शब्द बेल्स सिखी ।
वर्णसे शब्द बनल शब्दसे साहित्य माला
सक्कुजान बोली हम्र आपन आपन पाला
डारल घाना सब्जे मिल्के निख्राय पर्ना बा
दुरगामी विचार कैक बाट हमन ढर्ना बा ।
साहित्यम चलाई हम्र अरगरसे कलम
भाषा कहोंर विग्रटा लगाई हम्र मलम
उठी पह्रल यूवा वर्ग जङ्ग्रार बन परल
छलफल कैक थारु भाषा मानक बनाइ परल ।
भाषा साहित्य कला संस्कृति हमार पहिचान
यहीह बँचाइक लाग हम्र चलाइ अभियान
ठाउँ ठाउँम विचार गोस्ठी अन्तरक्रिया करी
मौलिक ओ आगन्तुक शब्द मिलाके बेल्स परी ।
बारबर्दिया नगरपालिका–१०, मेरैया, बर्दिया
प्रकाशोन्मुख कविता संग्रह म्वार मनक् फुलरिया (२०८३) से साभार । इ कविता संग्रह २०८३ वैशाख १ गते ५५वा गोचाली दिवसके अवसरमे बर्दियामे विमोचन हुइटि बा ।

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