‘बाबा एकठो चुटकिला सुनाउ ना
सड्डे सड्डे एक देसके राजकुमार
राजा रानिक् खिस्सा कट्रा सुन्ना ।’
असिक छुटकि छाइ चुटकिला सुनाइक
आग्रह कैलक ढेर हो सेकल
मै एकडिन कलुँ–
‘छाइ, यि चुटकिला सुन्ना समय नै हो
बेन आज फेन
मै टुहिन एकठो खिस्सा सुनैम
आँसके खिस्सा ।’
‘का उ आँसके खिस्सा सुन्के
हाँसि आइ ?’
छाइ जिज्ञासा ढैलि ।
‘नाहि, छाइ नाहि
इ खिस्सामे हाँसि नै हो ।’
‘टब टे नै परि बाबा
मै आँस टे आँस गिराइक चाहटु
मने, खुसिक् आँसके खिस्सा
सुनक् चाहटु ।’
मोर छाइ ओइसिन विचार
कइसिक निकारल
मै अप्नेहे छक्क पर्लु ।
मने, पटा नै हो इ डेसहे
आपन ठनुइयन
पराइ डेसमे जाके
बाकसमा बन्ड हुइटि
स्वडेस घुमेबेरिक
डुःखके आँसके खिस्सा
कब सम डोह्र्यइहि
कब सम ?
का डुइ टिहाइ जिट्ना पार्टी
नेपालिन्के डुःखके आँस पोछे सेकि ?
सुखके आँस लाने सेकि ?
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स्केचः एआइ
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