टिका गुरुवा
जौन घर डेखब्या र डंग्या छटरि टंगाइल र
सखिर उह घर हुइटिस दंग्या सोरहिनेक घर ।
थारु जातिनके सांस्कृतिम डस्या एक महत्वपुर्ण टिहुवार हो । डस्याके अवसरम थारु गाउँम सखिया नाच विशेष महत्वके साथ नाच जिठा । यि नाच गाउँ भरिक लवन्डिन सन्झ्याके जम्मा होके, गाउँके बरघरके अंग्नम नच्ना चलन बा । पहिले ट एक महिना सम नच्ना करट । यि नाच महाभारत कथाम आधारित होके नच्ना चलन बा, जहाँ पाँच पाण्डव, द्रौपदी, कौरव, कान्हा मुख्य पात्रके रुपमा सख्या गितम चित्रण कैजिठा ।
सखिया नाच पाछ डिउटा बैठिना कलक रमाइलो कर्ना केल नै होख याकर गहिर सामाजिक, सांस्कृतिक भावनात्मक महत्व फे बा । सख्या नाच सुरु करल दिन गाउँके ठनुवाम रलक सक्कु डिउटनके नाउँ लेख सम्ह्रना काम कैजिठा । ओसहक डिउटा बैठिलक दिन फेरसे उह ठनुवामक सक्कु डिउटनके नाउँ लेख बैठिना चलन रहल बा । यि नाच नाच बेर अगुवा मन्डर्या, पछ्वा मन्डर्या, मोरहिन्या, पस्गिन्या, मोरहिन्याके जेठ्गोर्या ओ पस्गिनयाके जेठ्गोर्या रना चलन बा ।
किशोर थारु कठ– नाचके सुरुवाट डिउटन सम्ह्ररके करलक ओरसे अन्तिम म फेरसे उह डिउटन बैठाइ परठ । यदि नै बैठिलसे ठन्वामक डिउटा गाउँम दुःख डेठ । डिउटा बैठाके सेक्के ठन्वाम बरघरसे धारढुप डेना कैजिठा । बर्दियाके बारबर्दिया नगरपालिका-१०, मेरैया गाउँम जिउरा ढरलक दिनेसे सुरु करलक सख्या नाच टीकाके रोज विधिवत रुपमा डिउटा बइठइलक नाचके मोरहिन्या किरण चौधरी जनैलि ।
बर्दियाके बारबर्दिया नगरपालिका, मेरैया गाउँके सख्या नाच टोली
डिउटा बैठिनाके महत्व
१. नाचके औपचारिक समापन
–सख्या नाच डस्यक ब्याला बहुट दिन नच्ठ ।
–अन्तिम म डिउटा बैठिना ब्यालम सक्कु नचुन्या हुँकन सम्मानके साथ विदाइ कर्ठ ।
२. सामुहिक एकता ओ भाइचाराके सुदृढीकरण
–सख्या नाचम गाउँ भरिक लवन्डिन मिलके नच्ठ ।
–डिउटा बैठाइबेर सक्कु जे जम्मा होके डिउटनके नाउँ लेना, गफ कर्ना, हँस्ना खेल्ना ओ अनुभव साटासाट
कर्ठ । यहिले एक आपसम समझदारी ओ सामाजिक सम्बन्ध बल्गर बनाइठ ।
३. डट्करावन मेट्ना ओ बिसैना समय ।
–नाचबेर शारिरिक रुपमा डट्करावन लाग स्याकठ । डिउटा बैठिना ब्यालम नचुइएन विश्राम डेना ओ राहारङ्गि कर्टी नाच ओरैना अवसर फे मिलठ ।
४. सख्या नाच लौव पुस्ताह पुस्तान्तरण ।
–डिउटा बैठाइबेर पुरान पुरान गित सम्झना ओ लौव पुस्ताह परम्परा सिखैना अवसर मिलठ । यहिले परम्परागत संस्कृति निरन्तरता पलि रहना हुइठ ।
५. सहभागिनके सम्मान ओ कदर
–नाचम सहभागि सक्कु जहन धन्यवाद डेना, खास कैख योगदान डिहुइएन कदर कर्ना चलन फे डिउटा बैठाइ बेर करजिठा ।
६. सामाजिक समावेशिता ओ सहिष्णुता
–थारु जातिनके सांस्कृतिक विविधता व सहिष्णुताह यहिसे उजागर करजिठा । काखर कि सक्कु उमेर, जात ओ पृष्ठभुमिके मनै यि डिउटा बैठिना ब्याला सहभागि हुइ सेक्ठ ।
थारु समुदायम सखिया नाच पाछ डिउटा बैठिना परम्परा नाच ओरैना प्रक्रिय केल नै हो । यि एक सांस्कृतिक संवाद, सामाजिक एकता, परम्पराके पुस्तान्तरण ओ समुदाय भिट्टरके सम्बन्ध सुधारके अमुल्य माध्यम हो । यहिसे थारु समाजकृ सामुहिक जिवनशैली, परम्परा ओ सांस्कृतिक चेतनाह जिवन्त ढरक लाग योग्दान फे पुगइना काम करठ ।
बारबर्दिया नगरपालिका-१०, मेरैया, बर्दिया
प्रकाशित:
३४६ दिन अगाडि
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१८ असोज २०८२
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